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Uttarakhand

नौकरशाही को अभयदान

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की पिता के पिण्ड संस्कार के नाम पर उत्तराखण्ड के बद्रीनाथ केदारनाथ का सैरसपाटा करने वाले उत्तर प्रदेश के बहुबली विधायक अमनमणी त्रिपाठी को उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा कड़ी कार्यवाही करके न केवल उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर के गिरफतार किया है साथ ही लाॅकडाउन का उलघ्न करने पर क्वारंटीन तक कर दिया है। पंरतु उत्तराखण्ड सरकार ऐसी ताकत नही दिखा पाई है। हालंकी सरकार ने अपनी नाक बचाने के लिये सामान्य पुलिस द्वारा ही इस पूरे प्रकरण की जांच करने का आदेश जारी कर के यह साफ कर दिया है कि सरकार ओैर शासन पूरी तरह से मामले मे पास और पास के लिये शिफारिशी जारी करने वाले नौकरशाहो को बचाने के लिये जांच के नाम पर मामले को ही समाप्त करने का प्रयास कर रही है।

उल्लेखनीय है कि लाॅकडाउन के समय उत्तर प्रदेश के महाराजहंग जिले के नैतवा सीट से निदर्लीय विधायक अमनमणी त्रिपाठी को राज्य के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ के पिता के मृतक कार्यक्रम के लिये बदरीनाथ और केदारनाथ के लिये पास जारी करने के लिये देहादून जिलाधिकारी को शिफारिशी पत्र लिखा। जिस पर अपर जिलाधिकारी देहरादून के द्वारा अमनमणी और अन्य 8 व्यक्तियो को बदरीनाथ ओैर केदारनाथ की यात्र. के लिये पास जारी कर दिया। हैरानी की बात यह है कि राज्य में अंतरराज्य और अंतर जिले पर यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध है सथ ही बदरीनाथ के कपाट बंद होने तथा केदारनाथ में दर्शन पूजा आदी पर भी रो क लगी हुई है। बावजूद इसके अपर मुख्यसचिव के द्वार यात्रा के लिये पास जारी करने का शिफारीशी पत्र जारी कर दिया गया और जिला प्रशासन देहराून के द्वारा यात्रा पास भी जारी कर दिया गया।

इसी पास को लेकर अमनमाणी त्रिपाठी आने 12 साथियों के साथ बदरीनाथ की यात्रा में निकल पड़ा। नियम विरूद्ध पास होने के बावजूद कई पुलिस थानो से अमन मणी का काफिला तीन वाहनो से गुजरता रहा लेकिन सत्ता और रसूख का जलवा इतना बड़ा था कि किसी भी थाना क्षेत्र के नाके ने यह तक देखने की जरूरत तक नहीं समझी कि पास  केवल 9 व्यक्तियों के लिये जारी किया गया है जबकि काफिले मे 12 व्यक्ति यात्रा कर रहे है।

आखिरकार अमन मणी त्रिपाठी को चमोली जिले के कर्णप्रयाग थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा जांच के लिये रोका गया तो पुलिस के साथ बदसलूकी करने में भी अमनमणी त्रिपाठी ने कोई कसर नही छोड़ी। जानकारी के अनुसार कर्णप्रयाग के उप जिलाधिकारी के द्वारा सख्ती से अमनमणी त्रिपाठी को काूनन का पाठ पढाया। लेकिन यहां भी अमनमणी त्रिपाठी के राजनैतिक रसूख से चमाली जिला प्रशासन अपने आप को बचा नही पाया और उनके खिलाफ लाॅकडाउन के उल्लंघ्न की कार्यवाही करने की बाजाय उसको उसके काफिले के साथ वापिस लैटा दिया गया। जबकि नियमानुसार पास 8 व्यक्तियों के नाम जारी होने क ेबावजूद काफिले में 12 व्यक्ति यात्रा कर रहे थे और इन सथी के पास स्वास्थ्य से संबण्धिकत जरूरी मानको का पालन तक नही किया गया था।

निमयानुसार कानूनी कार्यवाही के साथ साथ वाहन को भी जबत किया जाना चाहिये था लेकिन रसूख के चलते असानी से अमनमणी त्रिपाठी को छोड़ दिया गया और कर्णप्रयाग से वापिस लौटा दिया गया जबकि यदि कोई सामान्य यात्री इस तरह की हरकत करता तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने और वाहन को जब्त करने की कार्यवाही की जाती है।

बहरहाल टिहरी जिले के मुनिकी रेती थाने की व्यासी पुलिस चैकी में अमनमणी के काफिलो को रोका गया और उसके खिलाफ राष्ट्रीय आपदा एक्ट और पुलिस कह धरा 188 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इस मामले मे ंभी पुलिस के द्वारा अमनमणी त्रिपाठी के रसूख का जलवा बरकरार रखते हुये उसे चैकी से ही नीजि मुचलके पर छोड़ दिया गया यहां तक कि उसके तीना वाहनो और साथ मे ंसभी लोगो को मुचलके पर छोड़ दिया गया। जबकि यह स्पष्ठ हो चुका था कि यात्रा पास केवल 8 व्यक्तियों के लिय ही जारी किया गया है लेकिन याख में 12 लोग यात्रा कर रहे थे।

इस मामले शायद ही कभी सामने नही आता लेकिन सोशल मीडिया और पोर्टल न्यूज चैनलो में तुरंत ही इस मामले की खबरे चलने लगी और पूरे मामले का खुलासा हो गया कि किस तरह से सअमनमणी को यात्रा पास जारी करने वाले राज्य के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश और यात्रा पास जारी करने वाला देरहादून जिलाधिकारी कार्यालय है।

आम आदमी को लाकडाउन तोड़ने पर कड़ी कार्यवाही भुगतना पड़ रही है लेकिन रखूख दारो को सभी नियमों को ताक पर रख कर शासन स्तर से बदरीनाथ केदारनााि की यात्रा के लिये पास जारी किया गया। जबकि बदरीनाथ के कपाठ केवल इस लिये नही खोले गये हे। कि बदरीनााि के रावल ऋषिकेश में 14 दिनो के क्वारंटी में रखे गये है। एक धर्माणिकारी रावल को कोरोना के चलते 14 दिनो के लिये क्वारंटीन केवल इसलिये किया गया हे कि वे बदीनाथ के कपाटदो उदघाटन के लिये उत्तराखण्ड पहुंचे लेकिन निमानुसार रावल को 14 दिनो के क्वांरटीन मे रखा गया है यहां तक कि रावल की सभी जांच रिपोर्ट मे ंयह ासफ हो चुका है कि उनको कोरोना संक्रमण नही है। लेकिन सरकार ने रावत को बदरीनाथ के कपाट खेलने की इजाजत देने की बाजया बदरनीनाथ के कपाट खेलने की तीथी को ही टिहरी राजदरबार स वर्ता कर के 15 मई कर दी है।

अमनमणी त्रिपाठी को जो कि उत्तर प्रदेश से लाकडाउन का पूरा उलंघ्न करते हुये उत्तराखण्उ आया ओर उसे बदरीनाथ केदारनाथ की यात्रा करने के लिये पास जारी कर दिया गया। इस पर प्रदेश सरकार के खिलाफ भारी नारजगी देखने को मिली यासहं तक कि सरकार ओर शासन के खिलाफ जम कर सोशलमीडिया में भडास निकाली गई।

मामले के सुखिर्ये में आने पर सरकार को अपनी सफाई देनी पड़ी ओर सरकार के प्रवक्ता और केबिनेट मंत्री मदन कौशिक के द्वारा यम माना गया कि अमनमणी त्रिपाठी को यात्रा पास जारी करने मे चूक हुई है। यहां पर गोर करने वाली बात यह हेै कि पूरे मामले मे यह साफ हो गया हे कि अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के द्वारा यात्रा पास जारी करने के लिये शिफारीशी पत्र जारी किया गया ओर इसी के आधार पर जिलाधिकारी देहरादून के द्वारा पास जारी किया गया। इसके बावजूद पास जारी करने में बड़ी चूक मह कर सारकार ने साफ कर दिया कि वे इस मामले में कोई बड़ी कार्यवाही नही करने जा रही है। इसके अलावा इयस मामले में कोई जांच एजेसी बनाये जाने की बजाये उसी मुनि की रेती थाने को ही जांच करने की बात कही गई है जिसने अमनमणी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर के नीजि मुचलके पर छोड़ दिया था।

सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया हे कि सरकार हर हालत में इस मामले को दबाना चाहती है। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाशस ओर जिलाधिकारी देहरादून के जबाब तलक करने के लिये एक पुलियस के दरोगा को जांच देने से मामला साफ हो गया है कि यह मामला अब सरकार के द्वारा हेमशा के लिये दबा दिया जायेगा। जानकारो का कहना हे कि यह बड़े हास्यास्पद पात हे कि राज्य के वरिष्ठतम नोकरशाह और जिलाधिकारी केस  एक पुलिस का जांच अधिकारी किसी तहर से जांच करेगा और उनको जबाब तलक करने का साहस कैसे कर सकेगा। याफ है कि सरकार नोकरशाहो को बचाने का काम कर रही है जबकि अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने मामले से पहले ही पल्ला झाड़ते हुये पूरा ठीकरा जिलाधिकारी के सिर फोड़ने मे ंदेरी नही की। उनको कहना हे कि पास केवल जिलाधिकारी ही जारी करते हैं उनको देखने चाहिये था कि पास जारी हो सकता है या नही।

वैसे इस मामले में अभी और भी पेंच है जिनका खुलासा  होना जरूरी है। उत्तर प्रदेश के बिजनैर जिलो में अमन मणी के खिलाफू मुकदमा दर्ज कर के उनको गिरफतार किया गया। लेकिन उनके काफिले में केवल दो वाहन की दर्ज किये गये हे जिसमें 8 लेागो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि उत्तराखण्ड में 11 लोगो को यात्रा पास जारी करने के लिये शिफारिश की गई थी लेकिन पास अमन मणी त्रिपाठी के साथ उसके 8 साथियों के लिये कुल 9 लोगो के लिसे पास जारी हुआ था। मुनिकी रेती थाने में 12 लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया ,जिसमें तीन वाहनो का उल्लेख भी किया गया। लेकिन बिजनैर जिले के नजीबाबाद में केवल दो वाहनो और 7 लोगो को ही मुकदमें मे उल्लेख किया गया है। जबकि इनमेे से 5 लोग जिसमे एक दो अमनमणी त्रिपाठी के गनर भी है गायब हो गये। हैरानी इस बात की है कि जिलाधिकारी देहरादून के द्वारा जारी किये गये पास में दो गनर और एक व्यक्ति का नाम नही था। जबकि मुनीकी रेती थाने में 12 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सूत्रो की माने तों कर्णप्रयाग मे भी 12 लोगो की बात समाने आई थी। साफ है कि अमनमणी त्रिपाठी के दो गनर ओर एक सहायक भी उसके साथ ही यात्रा पर था लेकिन बिजनैर के नजीबाबाद थाने में सिर्फ 7 लोगो के ही खिलाफ मामला दर्ज कर के कार्यवाही की गई।

अब मामला और भी दिलचस्प हो गया है। इसमें एक वाहन देहरादून का है जिसका मालिक कोई जय प्रकाश तिवारी बताया जा रहा है। यह जय प्रकाश तिवारी कौन है इस पर न तो पुलिस और न ही सरकार कुद बात कह रही है। अब इस मामले में क्या जांच सामने आती है यह सिर्फ देखने वाली बात होगी क्योंकि सरकार तो पहले ही इसे बड़ी चूक बात कर मामले को ठंडे बस्ते मे डालने का काम कर चुकी है।

हैरानी इस बात की है कि महाराष्ट्र के यस बैंक के घोटाले में नामजद बदावन बुधुओ के लिय पास जारी करने के मामले में भाजपा के द्वारा जम कर बबाल काटा गया। भाजपा ने इसे जनता के स्वास्थ्य से बड़ा खिलवाड़ करने और सरकार पर गम्भीर आरोप लगाये थे। आरोपो धिरने पर महाराष्ट्र सरकार को इसके लिये एक उच स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर के पास जारी करने वाले राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को लम्बी छुट्टी पर भेज दिया गया लेकिन वही भाजपा उत्तराखण्ड में जहाँ  उसकी सरकार है उसी तरह के यात्रा पास जारी करने के मामले को बेहद हल्के में लेकर मामले को ही समाप्त करने का काम करती हुई दिखाई दे रही है।

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