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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर चल रही थी। लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के भाजपा नेता इस कार्यक्रम की आड़ में राजनीति करने से नहीं चूके

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेयी के महाप्रयाण से देशभर में शोक की लहर दौड़ पड़ी। पक्ष हो या विपक्ष सबकी नम आंखें उस महान नायक को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे रही थीं। ऐसे में कार्यक्रम बना कि उनका अस्थि विसर्जन हरिद्वार स्थित हरकी पैड़ी पर किया जाना है। फिर क्या था, प्रदेश के सभी वरिष्ठ राजनेताओं में अपनी राजनीतिक धाक जमाने की जैसे होड़-सी मच गई। प्रदेश में मौजूद भाजपा के बड़े धड़े पूरे कार्यक्रम का क्रेडिट लेने की जुगत भिड़ाने लगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई दिग्गज नेता शरीक होने वाले थे। इसलिए क्रेडिट ज्यादा बड़ा होने की पूरी संभावना थी और इसे पाने के लिए प्रयास भी उसी स्तर के किए जा रहे थे।

कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो भाजपा नेताओं में वर्चस्व द्वेष, प्रतिद्वंदिता की इस लड़ाई ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम की खिल्ली उड़ा दी, जिसकी मीडिया और राजनीति के हर प्लेटफार्म पर जमकर आलोचना की जा रही है। हालांकि इस अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत को छोड़कर करीब 57 विधायक और सभी मंत्रीगण मौजूद थे, पर सरकार के सभी नुमाइंदे अलग-अलग धड़ों में बंटे दिखाई दिए, जिसने अस्थि विसर्जन कार्यक्रम को राजनीतिक अखाड़े का रूप दे दिया। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के परम प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले निशंक खेमे के सभी विधायक और नेताओं ने ज्यादा भाषणबाजी से बचकर सतपाल महाराज के आश्रम में ही सुरक्षा महसूस की।

दरअसल इस सारे विवाद की जड़ें 17 अगस्त को उसी वक्त फैल चुकी थीं जब प्रदेश महासचिव नरेश बंसल को हरिद्वार अस्थि विसर्जन कार्यक्रम का कॉर्डिनेटर बनाकर भेजा गया था। नरेश बंसल ने भाजपा कार्यालय पहुंचकर कार्यक्रम की रूपरेखा तय कर डाली जिसमें अस्थि कलश यात्रा का कार्यक्रम सतपाल महाराज के प्रेम नगर आश्रम से शुरू होकर हरकी पैड़ी तक जाना तय हुआ। हालांकि उस बैठक में खुद मदन कौशिक मौजूद थे। पिछले वर्ष प्रेम नगर आश्रम की दीवार गिराए जाने से उपजे विवाद के बाद मदन और महाराज के रिश्ते कड़वाहट भरे थे। सूत्रों की मानें तो प्रेम नगर आश्रम में मदन कौशिक के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा था, पर उस बैठक में मदन कौशिक शायद चाहकर भी कार्यक्रम का स्थान बदला नहीं पाए, परंतु 18 अगस्त को मदन कौशिक ने जाने कौन सी गुगली फेंकी कि खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत धर्मनगरी पहुंचे और सभी को चौंकाते हुए उन्होंने डॉ प्रणव पंड्या से मुलाकात की एवं वाजपेयी जी की अस्थि कलश यात्रा शांतिकुंज से शुरू होकर हर की पैड़ी तक जाने की घोषणा कर दी। वे खुद शाम तक व्यवस्था का जायजा भी लेते रहे। हालांकि सब जानते हैं कि यह सब किसके इशारे पर कर रहे हैं। अस्थि विसर्जन के इस कार्यक्रम की अधिकारिक घोषणा भी कर दी गई, परंतु चर्चा है कि शाम ढलने तक भाजपा के एक पूर्व कद्दावर कहे जाने वाले नेता शांतिकुंज में कार्यक्रम को लेकर खुलकर विरोध में आ गए। उनके साथ-साथ गंगासभा तीर्थ पुरोहित समाज भी शांति कुंज में कार्यक्रम के विरोध में आ गया। जिस कारण तमाम तैयारियों के बीच कार्यक्रम में बदलाव किए गए। शांतिकुंज में तो इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयारियां जोरों पर थी। दूर-दूर से साधक और छात्र-छात्राओं को भी बुलाया जा चुका था। कार्यक्रम शांतिकुंज की जगह भल्ला कॉलेज स्टेडियम से शुरू होगा, शायद यह सूचना रात्रि में शांतिकुंज तक पहुंची जिसके बाद शायद प्रणव पंड्या को आघात पहुंचा। तभी उनके आह्नान पर पूरे शांतिकुंज ने अस्थि विसर्जन कार्यक्रम से किनारा कर लिया। शांतिकुंज का एक भी साधक कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुआ। चर्चा है कि कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक शांतिकुंज में यह कार्यक्रम कराकर दोहरा लाभ लेना चाहते थे। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद उनकी फजीहत और किरकिरी चौगुनी हो गई।

यात्रा के दौरान केंद्रीय नेतृत्व के आला नेता व्यवस्थाओं को लेकर भी नाखुश दिखाई दिए। उनकी नाराजगी कई कैमरों में भी कैद हुई। यहां तक कि खुद अमित शाह का भी मूड कई जगह खराब दिखाई पड़ा। हर की पैड़ी पर फैली अव्यवस्थाओं ने तो उनके खराब मूड में भारी ईजाफा कर दिया। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब अटल जी के परिजनों और खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जूते ही गायब हो गए। सूत्रों की मानें तो हरिद्वार के पूर्व दिग्गज नेता ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को पूरे मामले की जानकारी दी और मदन कौशिक की शान में जमकर कसीदे पढे़। शायद इसी का परिणाम था कि अस्थि विसर्जन कार्यक्रम के तुरंत बाद सतपाल महाराज के प्रेम नगर आश्रम में एक समीक्षा बैठक बुलाई गई। इसमें भाजपा के केंद्रीय संगठन मंत्री शिवकुमार, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट मौजूद थे जिसमें मदन कौशिक को बुलाया गया। बताया जा रहा है बंद कमरे में चली बैठक में मदन कौशिक को जमकर लताड़ा गया और अस्थि विसर्जन कार्यक्रम को हास्यास्पद बनाने का पूरा ठीकरा फोड़ दिया गया। हालांकि इस दौरान मीडिया और अन्य किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई थी।

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