कांग्रेस महासचिव हरीश रावत बता रहे हैं ‘लाठी वाले भैय्या’ की महिला को। अवश्य पढ़ें ‘दि संडे पोस्ट’ के आगामी अंक में। इसे आप शुक्रवार 5 जुलाई से हमारी वेबसाइट www.thesundaypost.in पर भी पढ़ सकते हैं।

मेरी मौसी के बड़े लड़के जगत दा, पीते भी खूब थे, सिगरेट का धुआं भी खूब उड़ाते थे। दूसरी पीढ़ी में ठेकेदार थे। मांस आदि का खूब शौक था। उनकी पत्नी उत्तराखण्ड यात्रा के दौरान महाराज की भक्त बन गई। धीरे-धीरे जगत दा भी महाराज के सानिध्य में आए। एक रोज मुझे मिले, बताने लगे कि मैंने मांस, मदीरा, सिगरेट सब छोड़ दिया है। बाद में मुझे पता चला कि ऐसा करने वाले हजारों में हैं। जहां-जहां महाप्रभु गए सामाजिक बुराई तिरोहित होती गई। न जाने कितने घर उजड़ने से बच गए, जो उजड़ गए थे पुनः हरे हो गए। मेरे भारत को आज ऐसे ही प्रेरणा स्तंभों की आवश्यकता है। महाराज प्रकाश स्तंभ हैं, जिनकी आभा जिंदगी का मार्ग बदल डालती है। आज जितनी तकनीक विकसित हो रही है, आधुनिकता आ रही है। मानवता एवं मानवीय सद्गुण गायब हो रहे हैं। यह एक खतरनाक स्थिति है, समृद्धि है, मगर वाह्य आवरण के रूप में। अंदर हम शनै-शनै खोखले हो रहे हैं। आज जितना बड़ा नामचीन शहर और प्रख्यात संस्थान, कॉलेज या स्कूल है, वहां उतना ही नशा। आज लाखों नौनिहाल देश के भविष्य, नशेड़ी बनकर रह गए हैं। देहरादून, हल्द्वानी आदि शहरों में मैं इन नशेड़ियों को देख-देखकर कुड़ता हूं। मेरे मझोले बेटे आनंद ने तो नशे की लत के खिलाफ एक जंग छेड़ रखी है। ‘नशे से लड़ेंगे हम, परमपरागत खेलों के संग’ यह उसका नारा है। मुख्यमंत्री के रूप में मैंने पुलिस एवं शिक्षा विभाग के माध्यम से कई अभियान इस लत के खिलाफ प्रारंभ किए। एक मैराथन तो अब भी चल रही है। मैंने निश्चय बांधा है, इस बार महाप्रभु से कहूंगा कि लाठी वाले भैय्या जरा इस नशेड़ी होते उत्तराखण्ड की फिर से परिक्रमा प्रारंभ करो। इस बार नशे की लत को छुड़ाने के जन अभियान के लिए, नशे के खिलाफ जंग के पर्वतक बन जाओ। लाखों माताओं को जिनके बच्चे नशे के आदी हो गये हैं, तिल-तिल गलकर मरने से बचाओ। हजारों बाप अपनी पीढ़ी और सपनों को नशे में डूब कर मरते देख रहे हैं। महाप्रभु आप अभियान उठाइए, शायद मेरी बेचैनी का भी समाधान निकल आए। मैं 3 वर्ष राज्य का मुख्यमंत्री रहा हूं। मेरा विवेक मुझे कोसता है। तुम इस फैसते जहर से अपनी भावी पीढ़ी को नहीं बचा पाए, प्रभु हमारे जिंदा रहते अभियान का शंखनाद कर दो।

You may also like