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Uttarakhand

थम नहीं रहा धर्म नगरी में नशे का काला कारोबार

थम नहीं रहा धर्म नगरी में नशे का काला कारोबार

पिछले दिनों ‘दि संडे पोस्ट’ ने धर्मनगरी में नशे के कारोबार का खुलासा करते हुए खास खबर प्रकाशित की थी। जिसमें स्पष्ट रूप से धर्मनगरी में अवैध शराब के काले कारोबार के ठिकानों का उल्लेख किया गया था। अवैध शराब की रोकथाम के तमाम दावों के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारी कुछ नहीं कर पाए हैं। ऐसे में लोगों का आक्रोश व्यक्त करना काफी हद तक जायज है कि सब कुछ पता होने के बावजूद  वे शराब माफियाओं के अवैध मयखानों पर हाथ ड़ालने से बचते हैं। जनता का यह आक्रोश अकारण नहीं है। पूर्व में यहां मित्र पुलिस और आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों की शराब माफियाओं के साथ संलिप्तता भी सामने आ चुकी है।

‘दि संडे पोस्ट’ को अपनी पड़ताल में जानकारी मिली है कि कई वर्षों से धर्मनगरी के नशा बाजार पर एक ही कंपनी का कब्जा चला आ रहा है। यह अलग बात है कि पिछले वर्ष इस कंपनी के मुख्य कर्ताधर्ता बदल गये हों, परंतु धर्मनगरी में गली-मौहल्लों तक शराब पहंुचाने के लिए जिम्मेदार शराब गैंग की नीति में कोई बदलाव नजर नहीं आया। बताया जाता है कि भले ही कंपनी मालिक बदल गए, लेकिन कर्मचारी तो वही हैं। यह कम्पनी अपने बड़े और मजबूत नेटवर्क का लाभ उठाते हुए धड़ल्ले से पंचपुरी के गली-मौहल्लों में शराब सप्लाई कर रही है। दिखाने के लिए भले ही पुलिस और आबकारी विभाग कोई कार्यवाही कर रहे हों, परंतु यह भी कटु सत्य है कि तमाम दावों के बाजवूद आज तक भी पुलिस या आबकारी विभाग धर्मनगरी में सप्लाई होने वाली अवैध शराब पर अंकुश नहीं लगा पाए हैं।

इससे अधिक अफसोसजनक बात और क्या हो सकती है कि विश्व विख्यात हरकी पैड़ी के प्लेट फार्म तक अवैध शराब आसानी से उपलब्ध है। यही नहीं ज्वालापुर से भीमगौड़ा तक निर्मित गंगा के तमाम घाटों पर अवैध शराब का यह कारोबार गंगा के समान्तर धड़ल्ले से चल रहा है। बताया जाता है कि धर्मनगरी में सक्रिय शराब माफिया, पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों का नेटवर्क इतना ताकतवर है कि मद्य-निषेध घोषित होने के बाजवूद यह क्षेत्र आज सबसे सस्ती और सुलभ नशे की दुकानों के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।

चर्चा है कि शहर को नशे में तब्दील करने के लिए एक शराब किंग का रुतबा इस कदर कायम है कि वह हमेशा नगर निगम हरिद्वार की सीमा से लगी हुई लगभग सारी दुकानों पर कब्जा जमा लेता है। नगर निगम की सीमा से लगी शराब की दुकान का चाहे लाॅटरी में किसी के भी नाम लाइसेंस निकला हो, परंतु शराब किंग की कम्पनी उस दुकान को साम-दण्ड-भेद का प्रयोग करते हुए अपने कब्जे में ले ही लेती है। चाहे फिर इसके लिए कोई भी कीमत देनी पड़े।

यही नहीं जो विक्रेता अपनी दुकान कम्पनी को सौंपने से इंकार कर देता है तो उस दुकान की सप्लाई पर ही कंपनी कंुडली मारकर बैठ जाती है। आखिर में थक हारकर लाइसेंसधारी विक्रेता कम्पनी के सामने सरेंडर कर देता है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी भी नगर निगम सीमा से लगे करीब आधा दर्जन से ज्यादा शराब के ठेके यही ग्रुप संचालित करता आ रहा है। शराब की दुकानों से हर रोज कई हजार बोतलें और पव्वे अलग-अलग जगहों पर पहुंचाए जाते हैं। इसके लिए समय और लोग भी निर्धारित हैं। 80 फीसदी से ज्यादा सप्लाई केवल स्कूटी सवारों के द्वारा होती है। हर दिन सैकड़ों स्कूटी सवार शराब के ठेके से हरिद्वार शहर के भीतरी भागों तक दौड़ लगाते हुए नजर आते हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नशे के इस कारोबार में सबसे ज्यादा चांदी मित्र पुलिस की है क्योंकि वह सर्वाधिकार युक्त होती है और बात अगर जिम्मेदारी की करें तो वह सीधे तौर से जिम्मेदारी आबकारी विभाग पर डाल देती है, जबकि आबकारी विभाग दोधारी तलवार पर काम करता है क्योंकि आबकारी विभाग के ऊपर निर्धारित राजस्व के अनुसार शराब की बिक्री की जिम्मेदारी भी होती है। यदि शराब के ठेकों पर शराब की बिक्री कम होती है, तो तब भी आबकारी विभाग के अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जाता है। दूसरी ओर यदि अवैध रूप से कहीं शराब बिकती है तो भी सीधे तौर से उंगली आबकारी विभाग के ऊपर ही उठती है।

कैसे होती है सप्लाई

शराब के ठेकों से स्कूटी सवार नई उम्र के युवकों के जरिये शराब की सप्लाई कराई जाती है। हर दिन ऐसे दर्जनों स्कूटी सवार युवा दौड़ लगाते रहते हैं। एक स्कूटी सवार युवक 2 पेटी देसी पव्वे तक एक बार में ले जा सकता है। इनके पीछे पिठ्ठू बैग होता है जिसमें ठूंस-ठूंसकर शराब के पव्वे भरे जाते हैं।
इसके अलावा स्कूटी की डिग्गी से सारा सामान निकाल कर उसमें भी केवल शराब के पव्वे ही होते हैं।

स्कूटी के पायदान पर भी एक बड़ा सा थैला होता है जिसमें भी शराब के पव्वे भरे होते हैं। हर शराब के ठेके पर ऐसे दर्जनों युवा स्कूटी सवार काम करते हैं  जिन्हें सप्लाई बाॅय कहा जाता है। ये स्कूटी सवार सुबह चार बजे से देर रात तक ठेके से शहर के बीच चक्कर लगाते रहते हैं। सूत्रों की मानें तो अकेले कांगड़ी से प्रतिदिन करीब 6000 शराब के देसी पव्वे धर्मनगरी में भेजे जाते हैं।

इसके साथ ही शिवालिक नगर से भी करीब 5000 देसी पव्वे हर रोज प्रतिबंधित क्षेत्र में सप्लाई होते हैं। अंग्रेजी शराब की सप्लाई भी अलग से होती है। यही हाल जगजीतपुर और नयागांव जैसी दुकानों का भी है जहां से भी हजारों पव्वे हर दिन प्रतिबंधित इलाकों में भेजे जाते हैं। कनखल का एक हिस्ट्रीशीटर पिछले लंबे समय से शराब का अवैध कारोबार कर रहा है जिसे कुछ सफेदपोश राजनेताओं का भी संरक्षण बताया जाता है। इसी संरक्षण के चलते इसका यह धंधा जोरों पर है।

बात अपनी-अपनी

शराब का ये अवैध कारोबार हरिद्वार पर कलंक है। हर की पौड़ी जैसी जगह पर शराब बिकना बेहद गंभीर प्रकरण है। मैं भी अपने स्तर से शासन को अवगत कराकर इसे पूरी तरह से बंद कराने का प्रयास करूंगा।  –धर्मेन्द्र चैहान, सांसद प्रतिनिधि, हरिद्वार

भगवान शिव की ससुराल कहे जाने वाले कनखल क्षेत्र में कई जगह अवैध शराब का धंधा जोरों पर है। जो बेहद निराश कर देने वाला विषय है। पुलिस और आबकारी विभाग को चाहिए कि कम से कम धार्मिक स्थलों पर तो ऐसे कारोबार को रोके। –भूपेंद्र कुमार, वरिष्ठ भाजपा नेता

मैं अभी मीटिंग में हूं, बाद में बात करूंगा, इस विषय पर। –डी सेंथिल अबुदई, पुलिस कप्तान, हरिद्वार

-अरूण कश्यप

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