Uttarakhand

भाजपा का बेलगाम घमासान

अनुशासन का दावा करने वाली भाजपा के विधायक अपने बयानों और कारनामों से निरंतर पार्टी की फजीहत करते आ रहे हैं। लेकिन प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार के मुखिया उनके सामने बेबस दिखाई देते हैं। विवाद सामने आने पर जांच कमेटियां अवश्य बना दी जाती हैं, लेकिन कार्यवाही के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ। लोकसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा विधायकों का घमासान जारी रहा, लेकिन  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और भाजपा संगठन एकदम लाचार दिखाई दिए
प्रचंड बहुमत का हैंगओवर कैसा हो सकता है, यह प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार को देखकर समझा जा सकता है। जहां एक ओर राज्य सरकार को दो विधायकों कुंवर प्रणव चैम्पियन और देशराज कर्णवाल ने तिगनी का नाच नचाया हुआ है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा संगठन भी उनके आगे बेबस दिखाई दे रहा है। बेबसी भी इस कदर है कि कार्यवाही के बाद के राजनीतिक परिणामों से सरकार के मुखिया त्रिवेंद्र रावत और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भयभीत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि भाजपा ने इस पूरे प्रकरण में एक जांच कमेटी बनाई हुई है और दोनों ही विधायकों को एक बार फिर से कारण बताओ नेटिस जारी किए गए हैं। लेकिन जिस तरह से भाजपा के भीतर राजनीतिक समीकरणों का दौर चल रहा है, उससे लगता नहीं है कि जांच कमेटी किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो आज भले ही मामला खानपुर के भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैम्पियन और झबरेड़ा के विधायक देशराज कर्णवाल के बीच दिखाई दे रहा हो, लेकिन पूर्व में भी भाजपा अपने विधायकां की आपसी रार और झगड़ों के चलते खासी फजीहत झेल चुकी है। जांच कमेटियों का गठन किया गया और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए जाते रहे। लेकिन आज तक किसी भी जांच कमेटी की रिपोर्ट को न तो सार्वजनिक किया गया ओैर न ही किसी पर कोई कार्यवाही की गई। मामला पार्टी का बताकर दबा दिया जाता रहा है। माफी मांगने के नाम पर रफा-दफा कर दिया गया।
अतीत पर निगाह डालें तो रुद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल ने कई बार पार्टी की फजीहत कराई। लेकिन भाजपा संगठन ने उन्हें कारण बताओ नेटिस जारी करके मामलों को रफा-दफा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जबकि ठुकराल पर कई मामलों में गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं। चाहे वह टोल कर्मचारियों से गाली-गलौच का मामला रहा हो या महिलाओं से मारपीट एवं गाली-गलौच का मामला हो या फिर धमकी देने का मामले हो, तकरीबन हर मामले में भाजपा संगठन ने अपने कदमों को कार्यवाही करने के बजाय पीछे ही रखा है। पूर्व में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों के बीच मचे घमासान का मामला भाजपा के लिए बड़ी फजीहत का कारण बना। हरिद्वार नगर निगम के मेयर और सतपाल महाराज के बीच झगड़ा इस कदर बढ़ गया था कि सतपाल महाराज के आश्रम के सामने नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा कूड़ा फेंक दिया गया था। माना जाता है कि मेयर मदन कौशिक के सबसे बड़े और खास समर्थक माने जाते हैं। इस मामले में मारपीट की घटना तक हुई औेर मेयर को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। भाजपा ने इस प्रकरण में जांच कमेटी भी बनाई, लेकिन जांच में क्या पाया गया, यह आज तक किसी को पता नहीं चला। भाजपा द्वारा इस मामले का किसी तरह से पटाक्षेप करके रफा-दफा कर दिया गया।
जांच कमेटियों के गठन करने तक जहां भाजपा बड़े-बड़े दावे करती रही है, वहीं जांच कमेटियों की रिपोर्ट पर शायद ही कभी कोई निर्णय लिया गया हो। इसका सबसे बड़ा प्रमाण पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निंशक’ और वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के समर्थकां के बीच मचे घमासान का प्रकरण माना जा सकता है। 2014 में डोईवाला उपचुनाव में त्रिवेद्र रावत की कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट के हाथों करारी हार होने के बाद हार का ठीकरा निशंक के सिर फोड़ा गया। त्रिवेंद्र रावत और निशंक समर्थकों के बीच जबर्दस्त हंगामा और मारपीट तक हुई। मामला यहां तक बढ़ गया कि भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एक-दूसरे का पुतला फूंका गया।
तत्कालीन समय में भाजपा ने इस मामले को  संज्ञान में लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया और इसे अनुशासन समिति को भेज दिया। पार्टी सूत्रों की मानें तो अनुशासन समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रदेश संगठन को सौंप दी, लेकिन भाजपा ने आज तक उस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं की। यहां तक कि पार्टी किसी को नेटिस तक जारी नहीं कर पाई। मामलों को बड़े स्तर से दबा दिया गया। अब कुंवर प्रणव चैम्पियन और देशराज कर्णवाल के मामले में भी भाजपा के हाथपांव फूले हुए हैं। पार्टी के लिए दोनों विधायकों का मामला गरम दूध के समान हो चला है।
ऐसा नहीं है कि भाजपा संगठन और सरकार ने इस मामले को संभालने का प्रयास नहीं किया हो। लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सक्रिय हुए और दोनों विधायकों को मुख्यमंत्री कार्यालय में बुलाकर मामले को शांत किया गया। एक बार तो लगा कि आखिरकार भाजपा संगठन जो काम नहीं कर पाया वह मुख्यमंत्री ने करके दिखाया, लेकिन दो दिन बाद ही जिस तरह से कुवंर प्रणव चैम्पियन के स्वर ओैर भी मुखर होने लगे उससे साफ हो गया कि दोनों विधायकों को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री के प्रयास भी महज रस्म अदायगी के लिए थे।
कुंवर प्रणव चैम्पियन और देशराज कर्णवाल की आपसी रार थमने के बजाय औेर भी तेज होने लगी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करने में दोनों के समर्थकों ने कोई कमी नहीं की। चैम्पियन ने तो दो कदम आगे बढ़कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ बयान देकर भाजपा को और भी परेशानी में डाल दिया। चैम्पियन ने महात्मा गांधी के बजाय भीम राव अम्बेडकर के राष्ट्रपिता होने की बात कहकर सनसनी फैला दी। यहां तक कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अय्याश बताते हुए उनका अपमान तक कर डाला।
कांग्रेस ने इस बयान को हाथों-हाथ लिया औेर राज्यपाल को इसकी शिकायत कर डाली। चैम्पियन का यह बयान भाजपा के लिए गले की फांस बनता देख भाजपा ने इस मामले में एक जांच कमेटी का गठन किया जिसकी अध्यक्षता राजपुर के विधायक खजानदास कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि जांच कमेटी अपनी क्या जांच रिपोर्ट भेजती है और भाजपा उस पर क्या कार्यवाही करती है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा के लिए अपने विधायकों के खिलाफ कार्यवाही करना दूर की कौड़ी है। आने वाले समय में यह मामला किसी भी सूरत में शांत नहीं होने वाला है। जो आरोप देशराज कर्णवाल पर चैम्पियन द्वारा लगाए गए हैं, वह बेहद संवेदनशील हैं। इसमें फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप सबसे ज्यादा गंभीर है। चैम्पियन द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर कांग्रेस पार्टी खासी मुखर हो चली है। राज्यपाल से शिकायत करने के बाद वह इस मामले को न्यायालय में भी ले जाने की सोच रही है।
वैसे इस पूरे प्रकरण के पीछे भाजपा नेताओं की आपसी प्रतिद्वंदिता भी बतायी जा रही है। निश्ांक के चुनाव को प्रभावित करने के लिए इस पूरे प्रकरण को चुनाव के समय ही सामने लाए जाने के आरोप भाजपा के भीतर उठ रहे हैं जिनको एक दम से नकारा नहीं जा सकता है। माना जा रहा है कि दोनों विधायकों का आपसी घमासान प्रदेश संगठन और सरकार द्वारा जानबूझ कर अनदेखा किया जाता रहा है। यह बात इससे पुख्ता हो जाती है कि निंशक को प्रवासी बताए जाने के बयान चैम्पियन द्वारा ही दिए गए थे। जिस पर प्रदेश भाजपा संगठन को तत्काल ही कार्यवाही करना चाहिए थी। लेकिन इस बयान का संज्ञान तक नहीं लिया गया। दोनों विधायकों के बीच का घमासान पूरे चुनाव प्रचार पर हावी रहा जिससे निशंक को परेशानी हुई।
प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट स्वयं नैनीताल से चुनाव लड़ रहे थे। वे नैनीताल से बाहर आ पाने में असमर्थ थे। कार्यकारी अध्यक्ष नरेश बंसल केवल कारण बताओ नोटिस तक ही अपने आप को सीमित कर चुके थे। मुख्यमंत्री इस मामले में अपनी चुप्पी बनाए हुए थे। इससे यह कहीं न कहीं भाजपा की अदंरूनी राजनीति से प्रेरित मामला बताया जा रहा है। चैम्पियन कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं, जबकि देशराज कर्णवाल भाजपा के नेता रहे हैं। इसके चलते यह मामला आयातीत भाजपा और मूल भाजपा के बीच भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस समीकरण के चलते ही भाजपा इस मामले को समाप्त करने में कोई ठोस प्रयास नहीं कर पाई।
वैसे कई मामले ऐसे हैं जिनको लेकर आने वाले समय में भाजपा को फजीहत झेलनी पड़ सकती है। अगर कुंवर चैम्पियन की मानें तो वे इस पूरे मामले को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ चुके हैं। चैम्पियन के बयानों से लगता है कि आने वाले समय में भाजपा को एक साथ कई मोर्चों पर जूझना पड़ सकता है। वैसे कैबिनेट मंत्री अरविंद पाण्डे द्वारा पुलिस थाने में अवैध खनन के करोबारी को छुड़ाने का मामला भी सामने आ चुका है। इसके लिए भाजपा ने एक जांच कमेटी भी बनाई हुई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इन मामलों को किस तरह से संभालती है।

बात अपनी-अपनी

आपको इस मामले में खजान दास जी से बात करनी चाहिए, क्योंकि मैं तो चुनाव में व्यस्त था। हालांकि जैसे ही चुनाव से फ्री हुआ तो मैंने तुरंत इस मामले को संज्ञान में लिया। दोनों ही विधायकों की बातों को सुना। माननीय मुख्यमंत्री जी और मैंने  इन दोनों के विवाद खत्म करवा दिए हैं। दोनों ने ही भविष्य में इस तरह के प्रकरण को न दोहराने का वादा भी किया। लेकिन इसके बाद भी दोनों के बीच बयानबाजी होती रही। पार्टी ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अनुशासन समिति में जवाब देने को कहा है। अभी कई लोग चुनाव प्रचार में भी लगे हुए हैं। 20 तारीख तक दोनों विधायकों के जवाब पार्टी को मिल जाएंगे। जिसने भी पार्टी का अनुशासन भंग किया होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
अजय भट्ट, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
मैं सात चुनाव लड़ चुका हूं जिसमें चार बार विधायक का चुनाव जीत चुका हूं और तीन बार जिला पंचायत का चुनाव जीता है। प्रदेश में ऐसा कोई और नेता नहीं है जो मेरे बराबरी का हो। मैं आपको बता रहा हूं कि मैं देशराज कर्णवाल और उसकी पत्नी के कारनामों को सामने लाने का पूरा प्रयास कर रहा हूं। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के अलावा कर्णवाल की पत्नी के आपराधिक मामले हैं जिन पर मैं उन्हें न्यायालय तक नहीं छोड़ने वाला। मैं उच्च शिक्षित व्यक्ति हूं और आबीसी समाज का नेतृत्व करता हूं। हरद्विर में ओबीसी 60 प्रतिशत हैं। भाजपा ने कभी भी ओबीसी को महत्व नहीं दिया है। वह हमेशा से दलितों को ही महत्व देती रही है, जबकि दलित भाजपा को कभी वोट नहीं देता है। ओबीसी समाज भाजपा को वोट देता रहा है। जांच कमेटी के पास मैं नहीं गया हूं। मेरे पास अभी समय नहीं है। जब समय होगा तब अपना जवाब दे दूंगा।
कुंवर प्रणव चैंपियन, विधायक लक्सर
मेरे खिलाफ बयान देना और मेरा अपमान करना प्रणव ने ही शुरू किया था। मैंने अपना जवाब पार्टी फोरम में दे दिया है। अब मामला पार्टी की कमेटी में है। मैं इस मामले में कोई बयान नहीं दे सकता।
देशराज कर्णवाल, विधायक झबरेड़ा

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