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बीस जनवरी 2004, इस दिन पश्चिमी यूपी के बाहुबली नेता डीपी यादव को भाजपा में शामिल किया गया था। यह खबर मीडिया की सबसे बड़ी सुर्खियां बनी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज समेत कई नेताओं की नाराजगी चलते महज चार दिन में ही डीपी यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। आज 20 साल बाद भाजपा का चाल-चरित्र और चेहरा बदल सा गया है। हालात यह हैं कि अब भ्रष्टाचार के आरोपी नेता अपने आपको बचाने के लिए पार्टी का दामन थाम रहे हैं। पौड़ी जिले के ब्लॉक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा का भाजपा में शामिल होना यही करार दिया जा रहा है। राणा पर पद पर रहते भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं

प्रदेश के युवा सीएम पुष्कर सिंह धामी  उत्तराखण्ड में ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा कर जनता का दिल जीत रहे हैं। लेकिन उन्हीं की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट इसके उलट काम करते दिख रहे हैं। पौड़ी जनपद के द्वारीखाल ब्लॉक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा का भाजपा में शामिल होने को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि राणा अपने को बचाने के लिए भाजपा की शरण में गए हैं। राणा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। राणा ने पद पर रहते हुए अपनी पत्नी की विवादित कंपनी द्वारा करोड़ों के सरकारी ठेके हासिल किए, साथ ही पद से हटने के बाद भी अपने चहेते ठेकेदारों को लाखों का भुगतान करवाने का काम भी राणा द्वारा किया गया।

अपने कार्यकाल में भुगतान का मामला नए ब्लॉक प्रमुख के आने से लटक सकता था जिसके लिए सबसे आसान रास्ता अपनाया गया कि महिला सीट होने के चलते अपनी पत्नी बीना राणा को ब्लॉक प्रमुख बनाया जाए और अपनी राजनीति को बचाने के लिए द्वारीखाल से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा जाए। महेंद्र सिंह राणा आसानी से द्वारीखाल क्षेत्र पंचायत के ब्लॉक प्रमुख बन गए और कल्जीखाल से अपनी पत्नी बीना राणा को ब्लॉक प्रमुख बनवाने में सफल रहे।

महेंद्र सिंह राणा की एक जांच रिपोर्ट

पंचायत राज अधिनियम 2016 के अनुसार अगर ब्लॉक प्रमुख अपनी क्षेत्र पंचायत सीट से अपना नाम निर्वाचन मतदाता सूची से हटवा देते हैं तो वह उस पद पर आहर्ता नहीं रख सकता। महेेंद्र राणा वर्ष 2008 से ही कल्जीखाल ब्लॉक के क्षेत्र पंचायत बिलखेत के ग्राम चोपड़ा से क्षेत्र प्रचायत सदस्य का चुनाव जीतकर ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित होते रहे। हैरत की बात यह है कि महेंद्र राणा द्वारा कल्जीखाल विकास खंड के चोपड़ा ग्रामसभा के मरोड़ा गांव से अपना नाम कटवाकर द्वारीखाल विकास खंड के ग्वाड़ी गांव में तो करवा दिया। साथ ही वे पद पर न सिर्फ बने रहे बल्कि लाखों के निर्माण कार्यों के भुगतान के चेक साइन करके भुगतान करते रहे। 24 जुलाई 2019 से लेकर 8 अगस्त 2019 तक के महज 16 दिनांे के भीतर ही महेंद्र सिंह राणा द्वारा 28 लाख के 17 निर्माण कामों के भुगतान की पहली किश्त 15 लाख 50 हजार का भुगतान पीएमएसएफ प्रक्रिया में अपने हस्ताक्षर से जारी किए गए जिसमें तत्कालीन खंड विकास अधिकारी कीर्ति बल्लभ नेगी ने भी पूरा साथ दिया, जबकि नियमानुसार महेंद्र राणा एक भी दिन ब्लॉक प्रमुख के पद पर योग्य नहीं रह गए थे और न ही भुगतान प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते थे। इन सबके बावजूद पंचायत प्रशासन आंखे मूंदे महेंद्र राणा के हर काम में उनका भरपूर सहयोग कर रहा था नव नियुक्त ब्लॉक प्रमुख बीना राणा द्वारा 10 अगस्त 2020 से 18 अगस्त 2020 तक के महज 8 दिनों के भीतर ही सभी 17 निर्माण कार्यों के भुगतान की दूसरी किश्त 10 लाख 13 हजार 938 रुपए का भुगतान कर दिया। इससे यह साफ हो जाता है कि महेंद्र सिंह राणा द्वारा कल्जीखाल क्षेत्र में अपने चहेते ठेकेदारों के भुगतान के लिए न सिर्फ नियम विरुद्ध भुगतान तो किया ही, साथ ही शेष भुगतान भी अपनी पत्नी बीना राणा को ब्लॉक प्रमुख बनवाकर करवा दिया। लेकिन कोई कार्यवाही होना तो दूर इस मामले की जांच तक नहीं होने दी गई जिसका असर यह रहा कि बीना राणा की कंपनी द्वारा अनेक सरकारी ठेके लगातार स्वीकृत होते रहे और इसका भरपूर लाभ ब्लॉक प्रमुख दंपत्ति द्वारा उठाया जाता रहा।

पौड़ी के अधिवक्ता महेंद्र सिंह असवाल द्वारा सभी प्रमाणों को न्यायिक शपथ पत्र के साथ पंचायती राज निदेशक को भेजा जिस पर पंचायती राज सचिव द्वारा जिलाधिकारी पौड़ी को 10 अक्टूबर 2022 को इस मामले की जांच के आदेश दिए। अपर जिलाट्टिाकारी पौड़ी ईला गिरी द्वारा इस पूरे मामले की जांच आरंभ की गई और अपनी 2 दिसंबर 2022 को जांच सचिव पंचायतीराज उत्तराखण्ड शासन को प्रेषित कर दी गई। हैरत की बात यह है कि 8 जून 2022 को जांच शासन को भेजे जाने के बावजूद 30 मई 2023 को पंचायती राज निदेशक ओमकार सिंह द्वारा इस मामले में कोई कार्यवाही करने की बजाए महेंद्र सिंह राणा को सिर्फ चेतावनी देकर मामले का निस्तारण कर दिया। निदेशक पंचायती राज द्वारा सचिव पंचायती राज को लिखे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि जांच में कोई वित्तीय अनियमितता नहीं पाई गई। जबकि अपर जिला अधिकारी ईला गिरी द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि पद से हटने के बाद किसी तरह की धनराशी का आहरण नहीं किया जा सकता है।

हालांकि जांच में यह माना गया कि महेंद्र सिंह राणा द्वारा प्रमुख पद से हटने के पश्चात धनराशि का आहरण नहीं कर सकते थे लेकिन इसी जांच में यह भी उल्लेख कर दिया गया कि जो भी 17 कार्य हुए हैं उनका निर्माण सही पाया गया है। जबकि जांच निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उसके निर्माण अवट्टिा की नहीं थी। जांच केवल पद पर न रहते हुए भुगतान किए जाने के बिंदु पर ही थी। बावजूद इसके जांच आख्या में निर्माण कार्यों के पूरा होने और सही पाए जाने को भी जोड़ दिया गया। अधिवक्ता महेंद्र सिंह असवाल का कहना है कि जांच आख्या में निमार्ण कार्यों की गुणवत्ता का जिक्र जान-बूझकर जोड़ा गया जिससे महेंद्र सिंह राणा द्वारा वित्तीय अनियमितता को हल्का किया जा सके और यह माना जाए कि भुगतान केवल निर्माण पूर्ण होने के बाद किए गए जिनका भुगतान जरूरी था।

इस मामले में महेंद्र सिंह राणा द्वारा अपने कार्यकाल में वित्तीय अनियमितता की जांच रूकवाने के लिए हाईकोर्ट तक का सहारा लिया और विशेष याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई में ‘‘जो भी आरोप लगे हैं वे अपराधिक प्रवृति का नजर आता है। अगर जांच में यह पाया जाता है तो उसके अनुसार ही आगे की कार्यवाही होगी’’ कहते हुए राणा की याचिका निस्तारित कर दी। हाईकोर्ट से भी कोई राहत न मिलने के बाद महेंद्र सिंह राणा अपने कार्यकाल में की गई वित्तीय अनियमितता की जांच रूकवाने में सफल तो नहीं हुए और जांच के बाद उन पर कार्यवाही होने की प्रबल आशंका बढ़ गई। सूत्रों की मानें तो जाचं रिपोर्ट के बाद महेंद्र सिंह राणा और तत्कालीन खंड विकास अट्टिाकारी के खिलाफ कार्यवाही होना तय मानी जा रही थी जिससे बचने के लिए लिए महेंद्र सिंह राणा एक वर्ष से भाजपा में शामिल होने के भरपूर प्रयास कर रहे थे और आखिरकार भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट ने एक बड़ा समारोह कर के महेंद्र सिंह राणा को भाजपा की सदस्यता दिलवा दी।

बात अपनी-अपनी
करोड़ों के फर्जीवाड़े के कार्य और ब्लॉक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा की पत्नी की कंपनी के भी फर्जीवाड़े हैं जिन पर हमने शिकायत की है लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं हुई। पूरा अमला शासन-प्रशासन सभी महेंद्र सिंह राणा को बचाने में लगे हुए हैं।
महेंद्र सिंह असवाल, अधिवक्ता पौड़ी

अब मैं पंचायतीराज में नहीं हूं, मामला पुराना है इसलिए मुझे इस बारे में कुछ याद नहीं है।
ओमकार सिंह, तत्कालीन अपर सचिव व निदेशक पंचायतीराज

आप कौन हैं। पहले ये बताइये।
इला गिरी, अपर जिलाधिकारी जांच अधिकारी पौड़ी

राणा जी ब्लॉक प्रमुख पद पर काम कर रहे थे। उनके नाम कटने के बाद पद से हटने की प्रक्रिया चल रही थी इसलिए भुगतान में उनके साइन लिए गए। यह क्षेत्र पंचायत की भुगतान की प्रक्रिया है जिसका मैंने अनुपालन किया। इसमें कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। अब मैं रिटायर्ड हो चुका हूं।
कीर्ति बल्लभ सिंह नेगी, तत्कालीन खंड विकास अधिकारी, कल्जीखाल

कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई। मैं ब्लॉक प्रमुख पद से हटा नहीं था। मैंने अपना नाम वहां से कटवा दिया था। बीडीओ ने मेरे सामने ऑनलाइन भुगतान के लिए साइन करने के लिए फाइल मेरे सामने रखी तो मैंने साइन कर दिए। अगर कोई मामला है भी तो बीडीओ का होगा। निदेशक ने भी कोई वित्तीय अनियमितता नहीं पाई और मुझे क्लीन चिट दी है। आप निदेशक का ऑर्डर पढ़ें। आपको जिन कलाकारों ने मेरे बारे में उल्टा सिधा बताया है मैं उन सभी कलाकारों को अच्छी तरह से जानता हूं, वे मेरे खिलाफ लंबे समय से साजिश रच रहे हैं और कुप्रचार कर रहे हैं। अब मैं भाजपा में आ गया हूं।
महेंद्र सिंह राणा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख, कल्जीखाल

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