उत्तराखण्ड सरकार की मंत्री रेखा आर्य अल्मोड़ा लोकसभा सीट से टिकट के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता बेहद डरे हुए हैं कि कहीं पार्टी आलाकमान गलत निर्णय न ले डाले। कार्यकर्ताओं के डर की ठोस वजह यह है कि रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उत्तर प्रदेश में हिस्ट्रीशीटर रहे हैं। उत्तराखण्ड में जमीनों की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी को लेकर वह सुर्खियों में रहे हैं। यही नहीं साहू एक गरीब व्यक्ति की किडनी चोरी कर अपनी पहली पत्नी बैजयंती माला को ट्रांसप्लांट करवाने के मामले में भी चर्चा में रहे। साहू का आपराधिक रिकॉर्ड रेखा आर्य की राह का रोड़ा बन सकता है। भाजपा शायद ही उन्हें टिकट देने का जोखिम उठाए, लेकिन फिलहाल उनकी दावेदारी से राज्य भर के भाजपा कार्यकर्ता भयभीत हैं कि कहीं पार्टी आलाकमान उन्हें उम्मीदवार न बना दे। इससे कांग्रेस को पूरे प्रदेश में एक बड़ा चुनावी मुद्दा मिल जाएगा। चर्चा यह भी है कि रेखा ने इस बीच कांग्रेस से भी टिकट की संभावनाएं तलाशी, लेकिन उनके पति का आपराधिक रिकॉर्ड देखते हुए कांग्रेस ने दो टूक कह दिया कि वे भाजपा में ही ठीक हैं
उत्तराखण्ड में लोकसभा चुनाव लड़ने को इच्छुक तमाम पार्टियों ने नेता पिछले कई दिनों से टिकट की जुगाड़ में व्यस्त हैं। देहरादून से लेकर दिल्ली तक अपने-अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करते आ रहे हैं। चुनाव की घोषणा के बाद तो उनके सामने ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति आ गई है। हालत यह है कि अपनी पार्टी में टिकट की संभावनाएं न बनती देख वे दूसरी पार्टियों के दरवाजे जाकर संभावनाएं टटोल रहे हैं। इस संबंध में राज्य की त्रिवेंद्र रावत सरकार की एक महिला मंत्री रेखा आर्य का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रेखा आर्य अल्मोड़ा लोकसभा सीट से भाजपा टिकट की दावेदारी कर रही हैं। देहरादून से लेकर दिल्ली तक वे पार्टी नेताओं को लगातार इस बात के लिए राजी करने में जुटी हैं कि मौजूदा सांसद केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा का टिकट काटकर उन्हें चुनाव में उतारा जाए। लेकिन अपनी इस कोशिश में रेखा को कामयाबी मिलनी असंभव है। इसके पीछे एक ठोस वजह यह है कि उत्तराखण्ड की राजनीति में रेखा पर सत्ता की आड़ में आपराधिक छवि के अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू को बचाने के आरोप लगते रहे हैं। मंत्री के पति जमीनों की खरीद- फरोख्त में धोखाधड़ी से लेकर किडनी चोरी करने जैसे गंभीर अपराधों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता कभी नहीं चाहेंगे कि रेखा को लोकसभा का टिकट मिले क्योंकि पार्टी प्रत्याशी को चुनाव जितवाने का जिम्मा जमीन पर उन्हीं का होता है।
पार्टी के प्रति निष्ठावान और स्वच्छ छवि के प्रत्याशी को ही आम कार्यकर्ता पसंद करता है। जबकि रेखा की राजनीतिक निष्ठा पार्टियां बदलने के चलते शुरू से ही संदेह में रही है। उनके बारे में कहा जा रहा है कि ‘‘वे कभी भी किसी पार्टी में जा सकती हैं। ‘निष्ठा’ और ‘विचार’ जैसे शब्द उनके लिए कोई मायने नहीं रखते। राज्य में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद वे इस जुगाड़ में हैं कि यदि भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे कांग्र्रेस से भी लड़ जाएंगी। इसके लिए वे बकायदा देहरादून से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं से भी संपर्क साधे हुए हैं। हालांकि कांग्रेस आलाकमान उन्हें इसलिए घास डालने के मूड में नहीं है कि उनके पति गिरधारी लाल साहू का आपराधिक अतीत पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव-प्रचार में असहज कर सकता है।’’
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने पार्टी आलाकमान को दो टूक कह दिया है कि यदि रेखा आर्य को फिर से पार्टी में लाकर टिकट दिया गया तो वे चुनाव में बिल्कुल भी काम नहीं करेंगे।  पार्टी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत सहित कई अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सम्मुख जोर देकर यह बात उठाई है कि रेखा आर्य और उनके पति से वे भली-भांति अवगत हैं। लिहाजा कार्यकर्ताओं की भावनाओं  को ठेस न पहुंचाई जाए। बताया जाता है कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने भी रेखा को दो टूक कह दिया है कि वे अभी जिस पार्टी में हैं वहीं से टिकट की दावेदारी करें। कांग्रेस कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती।
दरअसल, कांग्रेस इस अवसर की ताक में बताई जाती है कि रेखा को टिकट देने के बजाए उनके पति के आपराधिक रिकॉर्ड को आगे कर प्रदेश में भाजपा को घेरा जाए। पहले भी कांग्रेसी ऐसा कर चुके हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले वर्ष यह कहकर त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार की घेराबंदी की थी कि भाजपा सरकार में भूमाफियाओं का बोलबाला है।
भूमाफिया तीन मंत्रियों के रिश्तेदार हैं जो सरकार की छवि पर दाग लगा रहे हैं। हालांकि रावत ने तब तीन मंत्रियों में से दो के नाम तो नहीं बताएं थे। लेकिन तीसरी मंत्री रेखा आर्य का नाम उन्होंने खुलकर लिया था। रेखा आर्य के पति पर खुलेआम उन्होंने सरकार पर अनैतिक दबाव बनाने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मंत्री रेखा आर्य अपने पति पर लगे आरोपों की जांच निष्पक्ष नहीं होने दे रही हैं। रेखा आर्य ने विधानसभा का पहला चुनाव वर्ष 2012 में लड़ा था। तब उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू के विरुद्ध सरकार ने कार्यवाही की थी। बकायदा अल्मोड़ा प्रशासन ने साहू को चुनाव के दौरान जिले से बाहर रहने के आदेश दिए थे। इसके बाद 2014 में सोमेश्वर सीट के तत्कालीन विधायक अजय टम्टा के सांसद बन जाने पर यह सीट खाली हो गई तो तब रेखा आर्य यहां से चुनाव लड़ी थीं। उपचुनाव में कांग्रेस ने रेखा आर्य को अपना प्रत्याशी बनाया था। तब वह भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष को हराकर विधानसभा पहुंची थीं। मार्च 2016 को उस समय रेखा आर्य ने कांग्रेस को गच्चा दे दिया जब पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। हरीश रावत सरकार से कांग्रेस के 9 विधायकों ने बगावत कर समर्थन वापस ले लिया था। ऐसे में हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई थी। तब हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार को फ्लोर टेस्ट करने की परीक्षा से गुजरना पड़ा था। रेखा आर्य तब कई दिन तक लापता रही थीं। अचानक वह फ्लोर टेस्ट वाले दिन 16 मई 2016 को विधानसभा के गेट पर प्रकट तो हुईं, लेकिन कांग्रेस के बजाए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ। रेखा के इस तरह पाला बदलने से लोग हैरान हो गए थे। हालांकि हरीश रावत ने सरकार बचा ली थी, लेकिन रेखा आर्य पार्टी को इस भंवर में छोड़कर जाएंगी, ऐसी उम्मीद किसी को नहीं थी।
2017 में जब विधानसभा के चुनाव हुए तो रेखा एक बार फिर से उम्मीदवार बनीं। तब भाजपा ने उन्हें सोमेश्वर से अपना प्रत्याशी बनाया। प्रदेश में भाजपा की जबर्दस्त लहर चली। लेकिन रेखा के पति का आपराधिक रिकॉर्ड इस कदर भाजपा के आड़े आया कि रेखा आर्य महज 652 वोटों के छोटे अंतराल से ही जीत पाईं। भाजपा ने रेखा आर्य को प्रदेश में महिला एवं बाल विकास की राज्यमंत्री बनाया। जुलाई 2016 में रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू पर ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा थाने में एक के बाद एक आधा दर्जन मामले दर्ज किए गए थे। रेखा आर्य के पति पर जमीन बेचने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने के मामले दर्ज किए गए। लोगों से पैसे ले लिए गए, जबकि मौके पर उनको जमीन नहीं दी गई। जब किच्छा थाने में केस दर्ज किए गए तो मामले में समझौते किए जाने लगे। इसमें रेखा आर्य की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगे। अपने आरोपी पति के बचाव में उतरी रेखा आर्य को उस समय मुंह की खानी पड़ी जब वह अलमोड़ा के तत्कालीन जिला अधिकारी सबिन बंसल को भी प्रभाव में लेकर मामलों की फाइलें दिखाने की कोशिश में थीं।  उस समय बंसल ने रेखा को जो दो टूक बातें कहीं, वह चर्चा में रहीं। इससे रेखा आर्य की काफी किरकिरी हुई।
रेखा के पति साहू के जमीनों से संबंधित विवादित मामलें की जांच चल ही रही थी कि इसी दौरान ‘किडनी चोरी कांड’ ने उत्तराखण्ड की राजनीति में भूचाल खड़ा कर दिया। दरअसल, बरेली निवासी नरेश गंगवार रेखा के पति गिरधारी लाल साहू के यहां नौकरी करता था। गंगवार का आरोप है कि मंत्री रेखा का पति साहू उसे श्रीलंका में ले गया और वहां धोखे से उसकी किडनी निकलवा ली गई। गंगवार के मुताबिक साहू ने उसकी किडनी चोरी कर अपनी पहली पत्नी वैजयंती माला को ट्रांसप्लांट करवाई, जबकि उसे इस बारे में बताना तक उचित नहीं समझा। जब नरेश गंगवार ने इसका विरोध किया तो उसे पैसे और उसकी बिटिया की शादी करने का आश्वासन देकर चुप करा दिया गया। बाद में जब साहू अपने वादे से मुकर गया तो गंगवार ने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के सामने अपनी पीड़ा बयां की और मामला दर्ज करा दिया। इस मामले में रानीखेत के विधायक करण माहरा ने सरकार की खूब घेराबंदी की। यहां तक कि गैरसैंण सत्र में इस मामले को विधानसभा में भी उठाया। तब रेखा आर्य ने निष्पक्ष जांच कराने की बात कही। लेकिन जांच आज तक भी सामने नहीं आई है।
पूर्व में कई आरोपों में फंस चुके साहू के कारनामे दिनोंदिन सामने आते रहे। जिसमें रेखा आर्य अपने पति की ढाल बनती दिखाई दीं। बेनामी संपत्ति के एक मामले में तो रेखा आर्य खुद ही फंस गईं। इस मामले का ऑडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ। प्रदेश के अधिकतर लोगों तक गिरीश जोशी नामक उस व्यक्ति की आवाज पहुंची जो मंत्री रेखा आर्य के घर में नौकर था। सीडी में गिरीश जोशी यह कहते हुए स्पष्ट सुना गया कि जो संपत्ति उसके नाम पर खरीदी गई है, वह उसकी नहीं। उसका तो सिर्फ नाम इस्तेमाल किया गया है। यह मामला उस समय सामने आया था जब गिरीश जोशी नामक मामूली नौकर ने करोड़ों का आयकर रिटर्न भरा। जोशी को 2014 में आयकर विभाग का नोटिस आया था। जिसमें 85 लाख का टैक्स भी भरा था। गिरीश ने किच्छा के सिरोली खुर्द में एकता रानी पुत्री मदन मोहन मदान से 3 ़70 एकड़ जमीन एक करोड़ 35 लाख में खरीदी थी। जोशी का कोई आय का साधन नहीं, बाजवूद इसके उसने वह महंगी जमीन कैसे खरीद ली। जो जमीन गिरीश के नाम से खरीदी गई आयकर विभाग की जांच के दौरान ही वह गिरीश जोशी ने रेखा आर्य के नाम कर दी। रेखा आर्य ने वह जमीन गिरीश जोशी से 12 लाख में खरीदी। लेकिन खरीद कैसे हुई और किस बैंक के जरिए गिरीश जोशी के खाते में पैसे पहुंचे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा राजनीतिक रूप से एक बार बकरी स्वयंवर के नाम पर रेखा आर्य और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की जंग सार्वजनिक हो चुकी है।

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