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Uttarakhand

आयुष चिकित्सको से साथ दोयम दर्जे का व्यवहार

देहरादून। प्रदेश में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिये चल रही लडाई में राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिये मजबूत स्तंभ के तौर पर काम कर रहे आयुष चिकित्सकों के साथ उनका ही अपना स्वास्थ्य विभाग भेदभाव कर रहा है। आयुर्वेदिक और होम्योपैथी के चिकित्सको से विभाग पूरा काम तो ले रहा है लकिन जो सुविधाये ऐलोपैथिक चिकित्सो को दी जा रही है वे आयुष चिकित्सकों और कर्मचारियों को देने से परहेज किया गया रहा है। इसके चलते राज्य के तमाम आयुष चिकित्सको में भारी नारजगी बनी हुई है। सबसे गम्भीर बात यह है कि आयुष चिकित्सकों के लिये आईसीएमआर की गाईड लाईनों का भी पालन नही किया जा रहा है जिस से इन चिकित्सकों का जीवन भी खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।

कोरोना जंग में फ्रंट लाईन काम कर रहे इन आयुष चिकित्सको को स्वास्थ्य विभाग ऐलोपैथिक चिकित्सकों से कमतर मान कर उनके साथ भेदभाव करने में लगा हुआ हैं  सबसे गंभीर बात यह हे कि यह केवल आयुष चिकित्सकों के साथ ही नही किया जा रहा है बल्कि आयुष चिकित्कीय कर्मचारियों तक के साथ भी सौतेला व्यवहार किया जा रहा है जबकि ऐलोपैथिक चिकित्सको के साथ ऐसा नही है।

स्वास्थ्य विभाग के दोहरो मापदंण्ड की बात करें तो एैलोपैथिक चिकित्सकों के लिये आईसीएमआर की गईडलाईन का पूरा पालन किया जा रहा है जिसमें प्रत्येक चिकित्सक को 14 दिन की ड्युटी के बाद कोविड 19 जांच किये जाने और उसके बाद 14 दिन के लिये होम क्वांरटीन में भेजने को नियम बनाया गया है। इस से चिकित्सकों को काम के बोझ से बड़ी राहत मिलती है साथ ही उनको आराम भी मिल जाता है। लेकिन आयुष चिकित्सकों के लिये विभाग इस नियम का पालन नही कर रहा है।

सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह हेै कि आयुष चिकित्सक लगतार क्वांरटीन सैन्टरो में काम कर रहे है यहां तक कि अधिकांश चिकित्सक दो दो माह तक लगातार अपने क्वांरटीन केन्द्रो में काम कर हे है लेकिन उनको किसी भी प्रकार का अवकाश तक नही दिया जा रहा है। इससे भी बुरी हालत तब है कि ड्युटी का रोस्टर का पालन तक नही किया जा रहा है।

जबकि नियमानुसार एक सप्ताह के बाद ड्युटी के रोटसर में बदलाव होना बेहद जरूरी है। इससे जिस आयुष चिकित्सक की क्वांरटीन सेंटर में रात की ड्युटी लगाई गई है वह डेढ से दो माह तक रात की ही ड्युटी में काम कर रहा है। देहरादून के ग्राफिक ऐरा कवांरटीन सेंटर में तैनात डाक्टर पंकज बछास को 17 मार्च को तैेनाती दी गई थी। लेकिन वे लगातार 60 दिनो से एक ही क्वांरटीन सेंटर में काम कर रहे है। जबकि डाक्अर पंकज को ण्क सप्ताह के बाद रोस्टर के अनुसार शिफ्ट में बदलाव किया जाना जरूरी था लेकिन उनको लगातार 60 दिनो से रात की ही शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है।

यही नही डाक्टर पंकज को आईसीएमआर की गईडलाईन के अनुसार 14 दिनो की ड्युटी के बाद उनकी कोविड जांच होना के बाद उनको दो सप्ताह के लिये होम क्वारंटीन में भेजा जाना अति आवश्यक है लेकिन ऐसा नही किया जा रहा हैं।

डाक्टर पंकज का मामला तो केवल एक बानगी भर है जबकि प्रदेश के लगभग सभी क्वांरटीन केन्द्रो में तैनात आयुष चिकित्सको और कर्मचारियों के साथ इसी तरह का दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। इसे सबसे बुरी हालत कोरोना संक्रमण के हाॅट स्पाट ऐरिया तथा फैसेलीटी क्वांरटीन सेंटरो में काम कर रहे आयुष चिकित्सकों की हो रही है। लगातार कोरोना संधिग्ध मरीजो के  काम कर रहे इन कोरोना योद्धाओं के लिये स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जरूरी सुरक्षा उपकरण  तक मुहैया नही करवाये गये है।

नाम न बताने की शर्त पर आयुष चिकित्सको का कहना हे कि क्वांरटी सेंटर ही सबसे जयादा और महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सबसे पहले मरीजो का सामना आयुष चिकित्सकों को करना पड़ रहा है। अस्पताल और एलोपैथिक चिकित्सकों को तो कारेाना प्रभावित मरीज से तब समाना करना पड़ता हे जब उसे क्वारंटीन सेंटर से अस्पताल मे भेजा जाता है। इसके बावजूद फ्रंटलाईन में हम काम कर रहे है और हमारे लिये न तो आईसीएमआर की गईडलाईन का पालन किया जा रहा है और न ही हमें जरूरी सुरक्षा उपकरण जैसे पीपीई किट दी जा रही है।

इस मामले में यह बात बड़ी गौर करने वाली है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण में कमी आने के बाद सरकार के द्वारा कई क्वारंटी सेंटरो को बंद किया जा रहा है, और इसके बाद ही आयुष चिकित्सकों को भी सेंटरो से हटाया गया परंतु उनकी कोई कोविड जांच तक नही की जा रही है और उनको 1 सप्ताह के लिये होम क्वांरटीन मे भेजा जा रहा है जबकि आईसीएमआर की गईडलाईन यह कहती है कि किसी भी चिकित्सक जो कोरोना की लड़ाई मे काम कर रहा है उसकी कोविड जांच होना जरूरी है और दो सप्ताह के लिये होम क्वांरटीन में भेजना जरूरी है। जबकि ऐलोपैथिक चिकित्सको और स्वास्थ्य कर्मचारी जैसे पैथेलोजी, नर्सिग स्टाफ आदी को 14 दिनो की ड्युटी के बाद उनकी कोविड जांच कर के उन को दो सप्ताह के लिये होम क्वांरटीन मे भेजा जा रहा है।

अपने साथ हो रहे इस दोयम दर्जे के व्यवहार से आयुष चिकित्सको में भारी नारजगी बनी हुई है। राज्य यके स्वास्थ्य विभाग के तहत राज्य का आयुष विभाग कांधे से कांधा मिला कर कोरोना से युद्ध लड़ रहा है। जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी के तहत आयुष चिकित्सको को कोरोना संकट के दौरान समाहित किया हुआ है। एक तरह से आयुष विभाग के इन आयुष चिकित्सको का प्रमुख जिले का मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ही बनाया गया है लेकिन जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग अपने विभागीय कर्मचारियों और चिकित्सको को सभी कोरोना से लड़ाई के लिये बनाई गई गाईडलाईनो का पालन कर रहा है और सभी आवश्ययक सुरक्षा उपकरएत्रण प्रदान कर रहा है उसी तरह से आयुष चिकित्सकों को को यह सुविधाये नही मिल रही है।

आयुष चिकित्सको का कहना है कि हम फ्रंट लाईन में काम कर रहे है। हम सरकार का साथ पूरी ईमानदारी से दे रहे है। सरकार हमसे जो भी कम लेना चाहती है हम पीछे नही हटने वाले। हम लगातार काम कर रहे है लेकिन हमें अवकाश भी नही मिल रहा है। इससे हमें बहुत परेशानीयां हो रही है। लगातार काम करने से हमारे स्वाथ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है। अगर चिकित्सक ही बीमार हो गया या हमारे सेंटर मे काम करने वाले कर्मचारी बीमार हो गये तो काम कैसे चलेेगा।

डाक्टर डी सी पसबोला मीडिया प्रभारी आयुर्वेद एवं युनानी चिकित्सक सेवा संघ उत्तराखण्डः

‘‘आईसीएमआर की गईडलाईन के अनुसार ही आयुष चिकित्सको के लिये नियम बनु हुये है। लेकिन ऐसा हो नही रहा है। ऐलोपैथिक चिकित्कों ने अपने डाक्टरो को नोडल अधिकारी बना कर आफिसो में बैठाया हुआ है और आयुष चिकित्सको को क्वांरटीन सेंटर में तैनात किया हुआ है। एैलोपैथि डाक्टरो को 14 दिनो के काम के बाद दो सप्ताह के लिये होम क्वारंटी में में भेजा जा रहा है जबकि आयुष चिकित्सकों को लगातार डियुटी में झोंका हुआ है। अगर किसी को होम क्वांरटीन दिया जा रहा हे तो वह केवल 1 सप्ताह का ही दिया जा रहा है। आयुष के सभी कर्मचारी नर्स आदी के साथ भी इसी तरह किया जा रहा है। अब जिस तरह से प्रवासी लेाग उत्तराखण्ड में आ रहे है और अब तो क्वांरटीन सेंटरो की जरूरत ओैर बढ़ गई है इसलिये हम चाहते हैं कि आयुष चिकित्सकों से आईसीएमआर की गईडलाईन के अनुसार ही कम लिया जाय।

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