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Uttarakhand

थम नहीं रहा दलितों पर अत्याचार

उत्तराखण्ड में केदारनाथ की त्रासदी के ठीक दस वर्ष पूरा होते ही आस्था का यह मंदिर विवादों का केंद्र बन गया है। कारण बना है गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत। सोने की इन परतों पर मंदिर के एक वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। तीर्थ पुरोहित का यह कहना है कि मंदिर के गर्भ गृह की दीवारों में लगा सोना चोरी हो गया है और वहां पर सोने की जगह पीतल लगा हुआ है। इसका वीडियो वायरल होते ही देशभर से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। राजनेताओं के इस मामले पर बयान आने से सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे आस्था संग खिलवाड़ का बेहद संवेदनशील मामला बताकर सियासी रंग दे दिया है

प्रदियों से भारतवर्ष की आस्था का प्रतीक रहे केदारनाथ मंदिर पर एक तरफ जहां तीर्थ यात्रियों का हुजूम दर्शनों के लिए पहुंच रहा है तो वहीं मंदिर की गर्भगृह की दीवारों पर लगे सोने पर संग्राम छिड़ गया है। केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में पिछले साल लगे सोने को लेकर इन दिनों सियासत शुरू हो गई है। केदारनाथ धाम से जुड़े तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने मंदिर प्रांगण में बनाए गए एक वीडियो में आरोप लगाया है कि मंदिर के गर्भगृह में लगा सवा अरब का सोना पीतल में तब्दील हो गया है। वायरल हो चुकी इस वीडियो में पुरोहित ने दावा किया है कि गर्भ गृह में सोने की जगह पीतल लगाया गया। इस वीडियो में मंदिर कमेटी पर सोने की जांच न करने का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग भी की है। संतोष त्रिवेदी का आरोप है कि केदारनाथ धाम में लगाए गए 230 किलो सोने की चोरी की गई है और असली सोने की जगह वहां नकली सोना लगाया गया है। इस वजह से गर्भगृह का सोना अब पीतल की तरह दिखने लगा है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी चार धाम महापंचायत के उपाध्यक्ष भी हैं।

इस विवाद के सामने आने के बाद संतोष त्रिवेदी से जुड़ा एक दावा भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें बताया जा रहा है कि यह खबर फैलाने वाले संतोष त्रिवेदी कांग्रेस पार्टी के चुनाव प्रचार में शामिल रह चुके हैं और राजनीतिक विद्वेष के चलते वह ऐसा भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि केदारनाथ इस बार कपाट खुलने के साथ ही चर्चाओं में आ गया था। यात्रा शुरू होते ही केदारनाथ मंदिर परिसर में एक बार कोड लगाया गया था। जिस पर श्रद्धालुओं से दान की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया था। केदारनाथ के अलावा ऐसा ही एक बार कोड बदरीनाथ के मंदिर में भी लगाया गया था। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो श्री बदरीनाथ- केदारनाथ समिति ने तुरंत बयान जारी करके सफाई दी कि बार कोड उन्होंने नहीं लगाया है। यहां तक कि समिति के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय ने तो इस संबंध में पुलिस को तहरीर भी सौंप दी थी। जिसमें जांच की गई तो यह सामने आया कि बार कोड तो भंग कर दिये गये देवस्थानम् बोर्ड के खाते का है। जिस पर सीधा नियंत्रण श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का ही है। इसके बाद पुलिस को दी गई तहरीर पर क्या हुआ इसका आज तक पता नहीं चला। हालांकि इस प्रकरण के बाद मंदिरों में लगे बार कोड जरूर हटा दिए गए।

इस घटना को अभी तीन माह भी नहीं बीते थे कि अब मंदिर के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित किए जाने के मामले में सियासी हलचल मचा दी है। आरोप है कि गर्भगृह में सोना के नाम पर पीतल लगाया गया है। गर्भगृह में यह सोना अब से करीब दस माह पूर्व मंदिर के कपाट बंद होने से कुछ दिन पहले ही मढ़ा गया था। जानकारी के अनुसार सोना महाराष्ट्र के एक व्यवसायी ने दान किया था। हालांकि व्यवसायी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया था। खबरों में दावा किया गया था कि जो सोना गर्भगृह की दीवारों पर मढ़ा गया है, उसकी कीमत करीब सवा अरब रुपए हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में विवाद तब भी हुआ था, जब दीवारों पर सोना मढ़ा जा रहा था। मंदिर के पुजारियों और भक्तों के एक वर्ग ने गर्भगृह में सोना मढ़ने का विरोध किया था और इसे प्राचीन मंदिर के साथ छेड़छाड़ बताया था। विरोध करने वाले लोगों का कहना था कि सोना मढ़कर केदारनाथ मंदिर के मूल स्वरूप को बदला जा रहा है। विरोध के बावजूद भी पिछले साल गर्भगृह को स्वर्णमंडित कर दिया गया था।

पिछले वर्ष जब यह कार्य किया जा रहा था तब भी मीडिया द्वारा इस खबर को बढ़ा- चढ़ा कर पेश किया गया था। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में कुल 230 किलो सोना चढ़ाया जा रहा है जबकि वास्तविकता यह थी कि वहां जो पहले चांदी की प्लेट लगाई गयी थी वह 230 किलो की थी। जब इसके बदले सोना लगाया गया तो प्लेटों के सहारे सोने की परत बनाकर चढ़ाया गया ना कि सोने की कॉरप्लेट लगाई गई थी। उत्तराखण्ड के मामलों में ज्यादातर मौन रहने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने करोड़ों फॉलोअवर वाले ट्वीटर पर स्थान देकर इस मामले को तूल दे दिया। अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए कहा कि केदारनाथ मंदिर में सोने की परतों की जगह पीतल की परतों को लगाने का आरोप आपराधिक के साथ-साथ आस्था से खिलवाड़ का भी बेहद संवेदनशील मामला है। इस साजिश की उच्च स्तरीय जांच कर झूठ की परतें उतारी जाएं। इसी के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि यह तो हद हो गई। क्या केदारनाथ मंदिर में भोले बाबा के साथ भी धोखा किया गया है? रात के अंधेरे में सोने की पॉलिश करने की क्या आवश्यकता थी?
इस मामले पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से भी सफाई दी गई है। मंदिर समिति के कार्याधिकारी आरसी तिवारी ­­­की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार गर्भगृह में जो सोना मढ़ा गया है, उसकी कीमत 1 अरब 15 करोड़ रुपए नहीं है। दानदाता ने 23,777.800 ग्राम सोना दिया था, जिसकी कीमत 14 .38 करोड़ रुपए है। इसके अलावा सोना लगाने के लिए 29 लाख रुपए मूल्य की कॉपर प्लेटों का भी इस्तेमाल हुआ था।

दानदाता ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्णजड़ित करने की इच्छा प्रकट की थी। उसकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में गर्भगृह को स्वर्णमंडित करने की अनुमति दी गयी थी। इसके लिए शासन से भी अनुमति ली गई थी। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के विशेषज्ञों की देख-रेख में स्वर्ण मंडित करने का कार्य किया गया। बीकेटीसी ने स्पष्ट किया कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम 1939 में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही दानदाता से दान स्वीकारा गया है। केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने के लिए सरकार और शासन से अनुमति ली गई।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने की अनुमति दानदाता की पावन भावना के अनुरूप दी थी। बीकेटीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने का कार्य स्वयं दानदाता ने अपने स्तर से किया है। फर्म द्वारा बीकेटीसी के समक्ष किसी प्रकार की शर्त नहीं रखी गई, न ही दानदाता ने बीकेटीसी से आयकर अधिनियम की धारा 80 का प्रमाण पत्र मांगा। समिति की तरफ से यह भी बताया गया कि इसी दानदाता की ओर से वर्ष 2005 में बदरीनाथ मन्दिर गर्भगृह को भी स्वर्ण जड़ित किया गया था। मगर वर्तमान समय में एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत विद्वेषपूर्ण आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे तत्व यात्रा को प्रभावित करने और केदारनाथ धाम की छवि को धूमिल करने के लिए भ्रम फैला रहे हैं। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की तरफ से भ्रामक जानकारी फैलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।

जब मंदिर समिति ने कराई रिपोर्ट दर्ज
17 मई 2022 को केदारनाथ धाम में एक मामले ने उस समय विवाद का रूप धारण कर लिया था जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में नोएडा के एक यात्री के साथ उसका विदेशी नस्ल का पालतू कुत्ता नजर आ रहा था। वीडियों में यात्री अपने कुत्ते के दोनों पैरों से नंदी की प्रतिमा को स्पर्श करता हुआ दिखाई दे रहा था और वहां मौजूद पुजारी कुत्ते का तिलक करते नजर आए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। जिस व्यक्ति का वह कुत्ता था वह एक यूट्यूबर बताया गया।

इस मामले पर विवाद इतना बढ़ा था कि श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति को पुलिस में रिपोर्ट तक दर्ज करानी पड़ी थी। मंदिर समिति का इस पर कहना था कि यात्री के इस कृत्य से श्रद्धालुओं की भावनाओं को काफी ठेस पहुंची है।
केदारनाथ चौकी में दी गई रिपोर्ट में मंदिर समिति के कार्याधिकारी आरसी तिवारी ने कहा कि 17 मई को एक यात्री अपने कुत्ते के साथ मंदिर आया था। इस दौरान उसने मंदिर परिसर में स्थापित नंदी की मूर्ति को कुत्ते के पैरों से स्पर्श कराया और फिर पूजा की, जो की आपत्तिजनक है। इस कृत्य से भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस तरह की घटनाएं मंदिर परिसर में दुबारा न हो, इसलिए संबंधित यात्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।

उत्तराखण्ड का समाज दलितों के बगैर हो ही नहीं सकता। हमारे, घर, खेत-खलिहान इनके बगैर बन ही नहीं सकते, आज दलित वर्ग के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं ये बहुत ही चिंताजनक बात है, मुझे जानकर बहुत दुख हुआ कि 3 साल में 360 मुकदमे दलितों के खिलाफ अपराधों मे हुए हैं, मैं सरकार से इस मामले में बात करूंगा और मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि राज्य में इन अपराधों को सख्ती से कुचला जाय और दलितों की हर प्रकार से सरंक्षण किया जाए, जिन्होंने दलितों का उत्पीड़न और अपराध किया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है तो उनको न्यायलय से कड़ी सजा मिले इस पर भी मजबूत काम होना चाहिए।
किशोर उपाध्याय, विधायक टिहरी

यह बहुत ही चिंता का विषय है कि तीन वर्ष में इतने बड़े पैमाने पर दलितों के खिलाफ मामले हुए हैं। हम सरकार में हैं तो हमारी जिम्मेदारी ज्यादा है। यह नहीं होना चाहिए था। जब तक समाज में समरसता नहीं होगी तब तक ऐसी घटनाएं नहीं रूकेंगी। समाज को समरसता दिखानी ही होगी। बलात्कार हो गया, हत्या हो गई या अन्य कोई अपराध हुआ है पुलिस ने कार्रवाई की और अपराधी को जेल भेज दिया। यह तो एक प्रक्रिया हुई है लेकिन भविष्य में फिर से ऐसा न हो इस पर ज्यादा विचार करने की सबसे ज्यादा जरूरत है। भाजपा और हमारा मूल संगठन आरएसएस सामाजिक समरसता पर काम करता रहा है और इससे हम सामाजिक भेदभाव, छुआछूत को कम करने में कामयाब भी हुए हैं। लेकिन मैं समझता हूं कि यह भेदभाव स्वयं हमने ही बनाए हैं, ईश्वर ने नहीं बनाए हैं। इसे हम सभी को ही दूर करना पड़ेगा। मैं स्वयं दलित वर्ग से हूं और प्रदेश में दलितों के 70 जातियां हैं जिनमें आपस में ही न तो तालमेल है और न सामाजिक समरसता। इनमें भी बड़ा भेदभाव बना रहता है। जब हम ही भेदभाव को अपने से दूर नहीं कर पा रहे हैं तो अपर कास्ट को हम कैसे कह सकते हैं कि वे भेदभाव को खत्म करें। बदलाव होगा लेकिन एकदम से नहीं होगा। इसी कारण आज इस तरह के मामले समाने आ रहे हैं। मैं सरकार का प्रवक्ता हूं और यह विश्वास दिलाता हूं कि प्रदेश में इस तरह के मामले में सख्ती से निपटा जाएगा।
खजानदास, प्रवक्ता भाजपा एवं पूर्व कैबनेट मंत्री

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