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Uttarakhand

शराब पर घिरी सरकार

देवप्रयाग में हिलटॉप शराब की फैक्ट्री को लेकर त्रिवेंद्र रावत सरकार की बहुत किरकिरी हो रही है। कटाक्ष किए जा रहे हैं कि हिन्दुत्व की विचारधारा से उपजी पार्टी की सरकार पौराणिक काल के तीर्थ स्थलों में शराब की फैक्ट्रियां खोलने को आतुर है। अलकनंदा और भागीरथी के पावन संगम पर अब शराब की नदियां बहेंगी। राज्य सरकार को घिरता देख अब भाजपा खेमे की ओर से संदेश दिया जा रहा है कि शराब फैक्ट्री की नींव पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के समय में पड़ी थी। इस पर रावत ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है कि वे इस मसले पर जनता के साथ हैं। ऐसे में शराब पर सियासी जंग भी छिड़ चुकी है

उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद से लेकर आज तक कोई भी सरकार शराब के राजस्व का मोह नहीं छोड़ पाई है। यह बात और है कि किसी भी सरकार ने आबकारी का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य पूरा नहीं किया है। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार पर शराब कारोबारियों के प्रति ज्यादा मोह के आरोप लगे थे, लेकिन मौजूदा भाजपा की त्रिवेंद्र रावत सरकार ने तो राज्य में जमकर शराब के नए-नए ठेके खुलवा दिए हैं। आबकारी राजस्व के मोह में राष्ट्रीय राजमार्गों को राज्य राजमार्ग तक बना डाला। आज हालत यहां तक हो चली है कि पौराणिक नगरों में भी शराब कारोबार के लिए रेड कारपेट बिछा रही है। हैरानी तब होती है जब गंगा और राम के नाम पर सियासत करने वाली भाजपा ही गंगा और भगवान राम के पौराणिक मंदिर वाले प्राचीन शहर देवप्रयाग में शराब का कराखाना खोले जाने की इजाजत देती है। हालांकि सरकार के इस कदम का भारी विरोध हो रहा है, लेकिन कांग्रेस अभी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुई है।


दरअसल, टिहरी जिले के देवप्रयाग शहर के नजदीक डडवा गांव में सरकार द्वारा दिल्ली की एक शराब कंपनी विंदेश्वरी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड को शराब उत्पादन और बॉटलिंग का लाइसेंस जारी करके शराब कारखाना खोले जाने की इजाजत दे दी गई है। इसके लिए सरकार ने बाकायदा आबकारी नीति में भी बदलाव किए हैं। कंपनी द्वारा गांव डडवा भंडाली में लगभग 600 नाली भूमि पर बड़ा कारखाना बनाई जा रही है। जिसमें चार प्लांट निर्मित होने हैं। एक प्लांट में शराब, दूसरे में बॉटलिंग, तीसरे में बियर तथा चौथे प्लांट में सोडा का निर्माण किया जाना है। इसमें शराब निर्माण का प्लांट पूरा हो गया है। बॉटलिंग का प्लांट भी पूरा हो चुका है। लेकिन अभी आरंभ नहीं हुआ है। शेष दोनों प्लांटों में निर्माण कार्य चल रहा है। माना जाता है कि इस वर्ष के अंत तक कंपनी अपने सभी प्लांटों का निर्माण पूरा कर लेगी और इस कंपनी का हिलटॉप ब्रांड के नाम से शराब, व्हिस्की और सोडा का निर्माण किया जाएगा।

सरकार के इस कदम का भारी विरोध होने लगा तो सरकार ने अपने बचाव के लिए बयान जारी करके कहा कि उक्त शराब के कारखाने की अनुमति पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के समय जारी की गई थी। सरकार ने तो उस अनुमति को ही आगे बढ़ाया है, जबकि यह साफ है कि पूर्व हरीश रावत सरकार द्वारा फ्रूट वाईन और फ्रूट बियर जिसमें नाम मात्र का प्राकøतिक एल्कोहल होता है, जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता, उसकी अनुमति दी थी। लेकिन मौजूदा सरकार ने व्हिस्की, शराब तथा बियर के निर्माण और बॉटलिंग की अनुमति दे दी है। गहराई से देखेने पर यह पूरा विवाद केवल देवप्रयाग शहर के नाम का उल्लेख होने के चलते सामने आया है। कंपनी के अपने ब्रांड हिलटॉप में देवप्रयाग शब्द का उल्लेख किया है जिसके चलते इसे आस्था से जोड़ा गया है, जबकि यह पूरा विवाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारां की देन है। कांग्रेस ने नीति बनाई और नीतियों में समय-समय पर परिवर्तन किया। भाजपा सरकार ने लाइसेंस का नवीनीकरण किया और उसके दम पर कारखाना स्थापित किया गया।

वर्ष 2012 में तत्कालीन कांग्रेस की बहुगुणा सरकार के समय में प्रदेश में बाइनरी उद्योग लगाए जाने का प्रस्ताव किया गया और इसके लिए 24 दिसंबर 2012 को शासनादेश जारी किया गया। जिसमें राज्य में बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने का शासदनादेश जारी किया था। जिसके तहत 2016 में इसी कंपनी विंदेश्वरी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड को लाइसेंस जारी किया गया था। शासनादेश के अनुसार राज्य में वही कंपनी बॉटलिंग का कार्य कर सकती थी जो शर्तों और मानकों को पूरा करने में सक्षम हो। मानकां के अनुसार कम से कम तीन राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में अपने ब्रांड की बिक्री, पिछले तीन वर्ष में प्रति वर्ष दो लाख पेटी का उत्पादन रखा गया। साथ ही कंपनी उसी ब्रांड का उत्पादन करेगी जो कंपनी का अपना होगा। यानी किसी अन्य कंपनी के ब्रांड का उत्पादन पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया था।

कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के चलते हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री बने और उनकी सरकार शराब के करोबार से होने वाले राजस्व का लोभ नहीं छोड़ना चाहती थी। जिसके चलते तत्कालीन सरकार ने अपनी एफएल टू नीति में बड़ा बदलाव किया और बाइनरी उद्योग को भी कई छूट दी गई। 17 अक्टूबर 2016 को पर्वतीय क्षेत्रों में बॉटलिंग प्लांट लगाए जाने के लिए 24 दिसंबर 2012 के शासनादेश में उपरोक्त नियम हटा दिए गए।

सीधे तौर पर हरीश रावत सरकार द्वारा अपनी आबकारी नीति में बदलाव किया गया जिसका जबर्दस्त फायदा शराब कारखाना स्थापित करने वाले उद्योगपतियों को होना तय था। 30 दिसंबर 2016 को विंदेश्वरी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड को देवप्रयाग तहसील के गांव डडवा भंडाली में शराब का कारखाना खोले जाने का लाइसेंस जारी कर दिया गया। अब मौजूदा सरकार की बात करें तो भले ही वर्तमान सरकार मासूमियत से हरीश रावत सरकार के दौरान आबकारी नीति के तहत शराब के कारखाने की इजाजत देने की बात कर रही हो, लेकिन इसी मौजूदा सरकार द्वारा विंदेश्वरी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस का दो बार नवीनीकरण किया गया, जबकि सरकार को पूरी जरह से ज्ञात था कि विंदेश्वरी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड अपना ब्रांड हिलटॉप पूर्व में हिमाचल में उतार चुकी है और वह फ्रूट वाइन की जगह व्हिस्की ब्रांड है। यहां पर एक बात और बड़ी दिलचस्प है जो कि वर्तमान सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करती है। हरीश रावत सरकार के समय सरकार निर्दलीय विधायकों की बैसाखी पर चल रही थी। देवप्रयाग क्षेत्र में बाइनरी उद्योग को लेकर खासा विरोध हुआ। स्वयं सरकार के मंत्री और देव प्रयाग के विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी ने इसका बड़ा विरोध किया और सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी तक दे डाली। विरोध को देखत हुए सरकार ने अपना निर्णय वापस लिया जिसके चलते कंपनी स्थापित नहीं हो पाई और लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई। 29 दिसंबर 2016 तक ही लाइसेंस की अवधि निश्चित थी।

2017 में भाजपा की त्रिवेंद्र रावत सरकार सत्ता में आई और सरकार ने सबसे पहले विंदेश्वरी एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस का नवीनीकरण करने में देर नहीं लगाई, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस की बहुगुणा सरकार ओैर हरीश रावत सरकार के समय फ्रूट वाइन की इकाई लगाए जाने का निर्णय किया गया था। हांलाकि हरीश रावत सरकार ने भी इस पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया था, लेकिन इतना तय माना जा रहा था कि शराब और व्हिस्की का उत्पादन नहीं होगा, जबकि पूर्व में भाजपा हरीश रावत सरकार का भारी विरोध कर रही थी। हरीश रावत सरकार के समय भाजपा हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने और प्रदेश को नशे में डुबा देने का आरोप सरकार पर लगा रही थी। लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के छह माह के भीतर ही शराब से राजस्व कमाने के लिये हर नियमों को बदल रही है।

अब इस मामले में राजनीति होने लगी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस से ज्यादा हरीश रावत इस निर्णय का विरोध करते नजर आ रहे हैं, जबकि कांग्रेस इस पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। माना जा रहा है कि हरीश रावत सरकार के समय में ही आबकारी नीति में बदलाव किए गए जिसके चलते फ्रूट वाइन की जगह शराब का कारखाना खुल पाया है। कांग्रेस के लिए यह मामला अब एक तरह से गरम दूध के समान हो गया है। अगर कांग्रेस विरोध करती है तो उस पर ही सभी आरोप लगते हैं। शायद इसी के चलते कांग्रेस इस पर चुप्पी साधे हुए है। सरकार अपने बचाव में कांग्रेस सरकार की ही नीति का अनुसरण करने की बात कहकर अपने दामन पर पड़ने वाले छींटों से बच रही है। हालांकि उक्रांद ने भी इसका भारी विरोध करना आरंभ कर दिया है, जबकि हरीश रावत सरकार में उक्रांद के कोटे से उनके ही विधायक प्रीतम सिंह पंवार कैबिनेट मंत्री रहे हैं। वे सरकार के हर निर्णय में साथ रहे हैं। साधु समाज ने भी देवप्रयाग शहर का नाम व्हिस्की ब्रांड हिलटॉप से जोड़ने का विरोध किया है।

 

बात अपनी-अपनी

हमारी सरकार के समय फ्रूट वाईन को राज्य में उत्पादित करने का प्लान था। मेदानी क्षेत्र में डिस्टलरियां और फुटहिल्स में फ्रूट वाइन, फ्रूट बियर और पानी की बॉटलिंग के लिए नीति बनाई थी। आपको बता दूं कि अगर हम फ्रूट वाइन के मामले में कहते तो हमें उसे इंडस्ट्रीयल पॉलिसी के तहत लाना पड़ता जिसमें सरकार को बहुत से काम करने पड़ते जिसमें सरकार का खर्चा बहुत होता, जबकि यह हाईली प्रोफिटिबल एरिया है तो इसमें सरकार क्यों पैसा खर्च करे। इसलिए हमने इसे आबकारी पॉलिसी के तहत रखा और स्पष्ट कर दिया कि पहाड़ में केवल फ्रूट वाइनरी बॉटलिंग प्लांट लगाए जाएंगे। तब कंपनी इसके लिए तैयार थी। दिसंबर 2016 को हमने कंपनी को लाइसेंस जारी कर दिया लेकिन उसका विरोध होने लगा। भाजपा ने इस पर बहुत हंगामा किया और सरकार पर तरह तरह के आरोप लगाए। हमारी सरकार के मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी जी ने मुझको कहा कि मेरे क्षेत्र की जनता भारी विरोध कर रही है अगर यह रोका नहीं गया तो मैं जनता के साथ खड़ा होऊंगा और राजनीति ही छोड़ दूंगा। मेंने विरोध को देखते हुए इस पर रोक लगा दी।

सवाल यह नहीं है कि किसने दिया। क्वैश्चन यह है कि अगर हमने गलत किया तो आपने क्यों उसे जारी रखा। हमने तो रोक दिया था। लाइसेंस जारी करने के बाद आचार संहिता लग गई थी। फिर चुनाव में भाजपा की सरकार आ गई तो सरकार को उसे देखना था। पहले तो भाजपा वाले ही इसका भारी विरोध कर रहे थे, लेकिन सरकार में आने के बाद आपने उसके लाइसेंस को रिन्युवल कर दिया, जबकि आप के पास दो मौके थे। एक मौका जब उसका लाइसेंस रिन्युवल किया गया और दूसरा मौका जब कंसट्रक्शन किया गया। कोई भी काम होता है तो लोकल बॉडी से एनओसी ली जाती है। तब आपने क्यों नहीं किया। आपके पास तो मौका था अगर हरीश रावत ने कोई पाप किया है तो आप उस पाप को धोते लेकिन आपने तो वही किया लेकिन आपने तो व्हिस्की पैदा कर दी और दोष मुझ पर लगाया जा रहा है।
हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

कांग्रेस सरकार के समय 2016 में जो जीओे जारी किया गया था उसमें कहीं भी नहीं लिखा है कि फलों से वाइन और बियर बनाई जाएगी। हमारी सरकार ने उसी जीओ के आधार पर ही अनुमति दी है। वैसे भी जिस जगह पर यह कारखाना है वह देवप्रयाग से 30 किमी दूर है। स्थानीय जनता कोई विरोध नहीं कर रही है। आप समझ सकते हैं कि कौन लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
विनोद कंडारी, विधयक देवप्रयाग

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