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Uttarakhand

हवा में उड़ने की हवा-हवाई बातें

वर्ष 1992 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में सामरिक कारणों से एक हवाई पट्टी का निर्माण नैनीसैंणी में किया गया था। आज तीस बरस बाद भी यहां से नियमित हवाई उड़ान शुरू नहीं की जा सकी है। इन तीस सालों में कई करोड़ खर्च कर इस हवाई पट्टी को घरेलू उड़ानों के लिए दुरुस्त किया जा चुका है। राज्य गठन के बाद सत्ता में आई हर सरकार ने यहां से नियमित उड़ान का वादा तो किया लेकिन उसे साकार कर पाने में असफल रही हैं। अब यह मुद्दा जनता में बड़े आक्रोश का रूप लेकर इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है

 

एक जनवरी 2022 को जब पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा था तब उत्तराखण्ड का छोटा कश्मीर कहे जाने वाला पिथौरागढ़ शहर के बाशिंदे भाजपा सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने को मजबूर थे। मुद्दा था नैनीसैंणी हवाई पट्टी से नियमित उड़ान शुरू ना होने का। सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण सीमांत पिथौरागढ़ जिले की नैनीसैणी हवाई पट्टी से 30 साल बाद भी नियमित उड़ान शुरू नहीं हो सकी है। यह स्थिति तब है जब देश के तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह चार साल पहले इस हवाई पट्टी को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ कर चुके हैं। राजनाथ सिंह ने तब जोश-खरोश के साथ घोषणा की थी कि अब पिथौरागढ़ से दिल्ली और देहरादून दूर नहीं होगा। उन्होंने यह भी वादा किया था कि सीमांत जनपद के लोगों की सुविधा के लिए देहरादून और पंतनगर के लिए 24 अक्टूबर 2018 से नियमित उड़ान शुरू हो जाएगी। इस घोषणा के बाजवूद अभी तक पिथौरागढ़ के वायु मार्ग का संचालन शुरू नहीं हो सका है।

यह पहली घोषणा नहीं है, बल्कि इससे पहले भी प्रदेश में जिस पार्टी की सरकार बनी सभी ने सीमांत में हवाई सफर शुरू कराने की घोषणा की। चाहे वह कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हों या अविभाजित राज्य उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव। नैनीसैंणी हवाई पट्टी से उड़ान शुरू करने की जमकर घोषणाएं हुई। हर चुनाव में राजनेता जनता से इसका वादा करते रहे। सभी पार्टियों ने हवाई पट्टी नैनीसैंणी को चुनावी स्टंट बनाया। लेकिन तमाम वादे और घोषणाएं हवाई साबित हुई। सरकार आती रही जाती रही, लेकिन तीन दशक बाद भी पिथौरागढ़ के लोगांे का आसमानी सैर करने का सपना पूरा न हो सका।

जनपद के धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट और बेरीनाग के लोगों खासकर पिथौरागढ़ शहर के बाशिंदों में इसके चलते जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि नैनीसैंणी पर हवाई उड़ान के मामले के नाम पर पिछले तीन दशक से हमारे साथ धोखा होता आया है। हर चुनाव में नेता हमें नैनीसैंणी से हवाई उड़ान शुरू कराने का सपना दिखाते हैं। चाहे लोकसभा का चुनाव रहा हो, विधानसभा का चुनाव रहा हो या फिर पिछले दिनों हुए निकाय चुनाव रहे हों, हर चुनाव में इस मुद्दे पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर गायब हो जाते हैं।

ऐसा नहीं है कि इस हवाई पट्टी से उड़ान के परीक्षण न हुए हों, बल्कि अब तक एक हजार 114 बार हवाई जहाज लैंड कराकर हवाई पट्टी का सर्वे कराया जा चुका है। हर बार कुछ न कुछ कमी बताकर मामले को लटका दिया जाता है। देखा जाए तो अब तक तीन बार नियमित उड़ान शुरू किए जाने की घोषणा की जा चुकी है। सबसे पहले हवाई पट्टी बनाने की घोषणा समाजवादी पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने की थी। तब समाजवादी पार्टी की सरकार ने दावा किया था कि 1996 में नैनीसैंणी से नियमित उड़ान शुरू हो जाएगी। इसके बाद अलग प्रदेश बन जाने के बाद 2015 में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने भी इस हवाई पट्टी से नियमित उड़ान शुरू करने की घोषणा की। तीसरी बार भाजपा के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में 24 अक्टूबर 2018 को यहां से हवाई जहाज आवागमन का वायदा दोहराया गया।

चीन एवं नेपाल की सीमाओं से लगे पिथौरागढ़ जिले के नैनीसैंणी में हवाई पट्टी वर्ष 1992 में तैयार हो चुकी थी। यहां नियमित व्यावसायिक उड़ान के लिए जब पहली बार ट्रायल किया गया तो हवाई पट्टी छोटी पड़ गई। हवाई पट्टी के छोटा पड़ जाने के चलते तत्कालीन विधायक मयूख महर की पहल पर 65 करेड़ रुपए की लागत से इसका विस्तार किया गया। विस्तार से पहले हवाई पट्टी जहां 14 सौ मीटर लंबी और 40 मीटर चैड़ी थी, बाद में वह 1600 मीटर लंबी और 60 मीटर चैड़ी हो गई। हवाई पट्टी के विस्तार के बाद तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने नवंबर 2015 में इस हवाई पट्टी पर 9 सीटर विमान की ट्रायल लैंडिंग कर खूब वाहवाही बटोरी।

यही नहीं बल्कि कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि 26 जनवरी 2016 से नियमित उड़ानें शुरू की जाएंगी। लेकिन यह वादा हवा हवाई होकर रह गया। हालांकि इसके पीछे कई कारण रहे। जिन्हें पिथौरागढ़ के पूर्व विधायक मयूख महर ने ‘दि संडे पोस्ट’ के समक्ष रखते हुए कहा कि भाजपा के तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा सहित पार्टी के कई नेताओं ने हवाई पट्टी की शिकायत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेज दी थी। कई आपत्तियां दर्ज कराई गई। जिसके चलते कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नियमित उड़ान नहीं हो सकी। साथ ही मयूख महर यह भी बताते हैं कि हमारी सरकार के दौरान भाजपा नेताओं ने जो आपत्तियां दर्ज कराई थी वही आज उनके लिए गले की फांस बन गई हैं।

भाजपा सरकार ने साल 2018 में नैनीसैंणी हवाई पट्टी से उड़ान शुरू कराने की सभी तैयारियां कर ली थी। नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल, फायर बिग्रेड, सुरक्षा व्यवस्था एवं टर्मिनल भवन में टिकट बुकिंग काउंटर भी स्थापित कर दिया गया था। आठ अक्टूबर 2018 को ट्रायल लैंडिंग सफल हो जाने के अगले दिन ही केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे से पिथौरागढ़ के लिए हैरिटेज एविएशन के 9 सीटर विमान को इरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। इसी के साथ पिथौरागढ़ से केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, खटीमा के तत्कालीन विधायक पुष्कर धामी सहित हैरीटेज एविएशन के सीईओ रोहित माथुर, नैनीसैंणी हवाई पट्टी पर पहली बार देहरादून से हवाई जहाज के जरिए पहुंचे।

इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हुआ कि नैनी-सैंणी हवाई अड्डे के संचालन और रखरखाव का जिम्मा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (भाविप्रा) अपने हाथ में ले सकता है। केंद्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को भेजे एक पत्र में बकायदा इसकी जानकारी दी। महाराज ने कुछ समय पहले सिंधिया के समक्ष यह विषय उठाया था। 15 दिसंबर 2019 को कैबिनेट मंत्री महाराज ने सात दिसंबर के केंद्रीय मंत्री सिंधिया के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि 19 सीट वाले विमानों के संचालन के लिए नैनीसैंणी हवाई अड्डा उपयुक्त है। क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) की उड़ानों के संचालन के लिए इसे आरसीएस हवाई अड््डे के रूप में पहचाना गया। महाराज के अनुसार केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने अपने पत्र में कहा है कि इस हवाई अड्डे से कोड-3सी (एटीआर-72 विमान संचालन) या इससे ऊपर के उन्नयन के लिए लंबे रनवे, रनवे पट्टी की चैड़ाई, बड़े एप्रन-टर्मिनल भवन को अतिरिक्त भूमि की जरूरत होगी।

याद रहे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ मार्च 2019 को गाजियाबाद में उड़ान योजना शुरू करते हुए हिंडन एयरपोर्ट में सिविल टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया था। उड़ान योजना के तहत अक्टूबर 2019 में सीमांत जिले की नैनीसैंणी हवाई पट्टी से गाजियाबाद और देहरादून के लिए सस्ती विमान सेवा बड़े जोर शोर से शुरू की गई थी। तब विमान सेवा के संचालन के लिए हैरिटेज एविएशन कंपनी को चुना गया था। ‘हैरिटेज एवियेशन’ के प्रबंधक एमएस धामी ने पिथौरागढ़ में घोषणा करते हुए कहा था कि एक घंटे की यह उड़ान हिंडन से प्रतिदिन दोपहर एक बजे चलेगी और पिथौरागढ़ के नैनीसैंणी हवाई अड्डे पर दो बजे पहुंचेगी। जबकि पिथौरागढ़ से यह प्रतिदिन पूर्वाहन 11ः 30 बजे उड़ान भरेगी और साढे़ 12 बजे हिंडन पहुंचेगी। धामी ने तब यह भी बताया कि पिथौरागढ़ से हिंडन का प्रति व्यक्ति किराया 2470 रुपए है। जबकि वापसी का किराया 2270 रुपये रखा गया है। उड़ान सेवा की शुरुआत के मौके पर गाजियाबाद के सांसद वीके सिंह, नैनीताल के सांसद और उत्तराखण्ड भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अजय भट्ट, अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा भी मौजूद थे।

कुछ दिनों तक यह सेवाएं शुरू हुई। इस कंपनी की सेवाएं बेहद लचर रहीं। चार माह तक किसी तरह से संचालित होने के बाद कंपनी के विमान में खराबी आ गई और जिले से संचालित नौ सीटर विमान सेवा बंद हो गई। जनवरी 2020 से बंद हुई यह सेवा अब तक दोबारा शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि हवाई सेवा शुरू न होने के पीछे एक कारण यह भी बताया गया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से हवाई सेवा शुरू करने वाली कंपनी हैरीटेज एविएशन को लाइसेंस नहीं मिला। इसके बाद राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी से मुलाकात कर राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर चर्चा की। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि आगामी एक सितंबर 2020 से पिथौरागढ़ हवाई पट्टी पर नियमित उड़ान संचालित की जाएगी। जिसमें एक 20 सीटर विमान की नियमित सेवा शुरू होगी। सीमांत की इस बहुप्रतीक्षित हवाई सेवा के शुरू न होने के पीछे कारण कई हैं, लेकिन फिलहाल सरकार की इस मामले पर चुप्पी तमाम सवाल खड़े करती है।

इस दौरान दावा किया गया कि 24 अक्टूबर 2018 से नैनीसैंणी हवाई पट्टी से देहरादून और पंतनगर के लिए नियमित उड़ान शुरू हो जाएगी। यही नहीं, बल्कि पिथौरागढ़ से देहरादून तक एक तरफ का किराया 1570 रुपया भी तय कर दिया गया। लेकिन घोषणा के ढाई बरस बाद भी नियमित उड़ान शुरू न होने से भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठ रहे हैं। लोग अब इसे महज चुनावी स्टंट मान रहे हैं। पिथौरागढ़ के व्यापार मंडल अध्यक्ष शमशेर महर की मानें तो पहले लोकसभा इसके बाद विधानसभा फिर नगर पालिका चुनाव को देखते हुए सरकार ने लोगों को हवाई सेवा के नाम पर छला है। वह कहते हैं कि अभी भी सरकार इसका इस्तेमाल विधानसभा चुनावों के लिए करने की योजना बना रही है और तरह-तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं। लेकिन जनता अब इनके बहकावे में नहीं आएगी। जनता अब सरकार की नीयत बखूबी जान चुकी है।

गौरतलब कि पिथौरागढ़ की नैनीसैंणी हवाई पट्टी से हवाई सेवा शुरू करने के सरकार के दावे की उस समय हवा निकलती दिखाई दी जब हवाई पट्टी से सुरक्षा में तैनात जवानों को हटा लिया गया। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने हवाई पट्टी की सुरक्षा में लगे जवानों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। पुलिस निदेशालय के फैसले के बाद हवाई सेवा की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। पिछले दो सालों से पिथौरागढ़ के लोग नैनीसैंणी से पंतनगर और देहरादून के लिए हवाई सेवा शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन कभी डीजीसीए से अनुमति नहीं मिलने से तो कभी बाधक बने तीन मकानों का बहाना बनाकर बार-बार हवाई सेवा शुरू करने की तिथि को आगे बढ़ाया गया। इससे लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश है। यह आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

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