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Uttarakhand

ऐक्टू द्वारा “मजदूर अधिकार अभियान” की शुरूआत

विरोध स्वरूप मोदी सरकार द्वारा लाये गए मजदूर विरोधी चार श्रम कोड की प्रतियां जलायी

 

ऑल इंडिया सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) द्वारा देशव्यापी अभियान के तहत गुलामी के चार लेबर कोड, बढ़ती बेरोजगारी, निजीकरण व देश के संसाधनों को बेचने तथा लोकतंत्र को कुचलने के खिलाफ 16 सितंबर 2020 से शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस 28 सितम्बर तक “मजदूर अधिकार अभियान” चलाया जाएगा। इसके तहत आज हल्द्वानी में बुद्धपार्क में ऐक्टू कार्यकर्ताओं ने एकत्र हो अभियान की शुरूआत करते हुए शारीरिक दूरी के मानकों का पालन करते हुए कार्यक्रम किया गया व प्रतिवाद स्वरूप मोदी सरकार द्वारा लाये गए मजदूरों की गुलामी की प्रतीक चार श्रम कोड की प्रतियां जलायी गयी और मोदी सरकार से तत्काल मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने वाले इन चारों श्रम कोड को वापस लेने की मांग की गई।

 

‘ऐक्टू’ के प्रदेश महामंत्री के के बोरा ने इस अवसर पर कहा कि “केंद्र सरकार ने श्रम सुधार के नाम पर लेबर ला को ख़त्म कर लेबर कोड प्रस्तुत कर रही है जिसके चलते कामगारों की नौकरी व जीवन सुरक्षा की गारंटी नष्ट हो जाएगी भारत के लेबर ला कामगारों को आधुनिक मानकों पर प्रोटेक्शन देते हैं लेकिन मोदी सरकार द्वारा लाया जा रहे लेबर कोड मालिकों को मनमर्जी की असीमित छूट देते हैं ।केंद्र सरकार के इस कदम से कामगारों के बेहतर जीवन की जगह अनिश्चितता भय व शोषण बढ़ जायेगा। इसलिए इन 4 लेबर कोड की खात्मे की मांग मजदूर वर्ग में जोर पकड़ चुकी है । मजदूरों की इसी मांग को उठाने के लिए ऐक्टू ने सरकार के खिलाफ मजदूर अधिकार अभियान चलाने का फैसला किया है।”

 

उन्होंने बताया कि, “इस देशव्यापी अभियान की मुख्य मांगे हैं, सभी असंगठित मजूदरों को, खेत एवं ग्रामीण और प्रवासी समेत, पूरा लॉकडाउन वेतन और कम से कम अगले छः महीने तक 10,000 रु. प्रतिमाह निर्वाह-भत्ता और मुफ्त राशन सुनिश्चित करो, छंटनी, वेतन कटौती, डीए पर रोक और सामाजिक सुरक्षा में कटौती बंद करो, गुलामी के सभी चार कोड वापस लो, भाजपा शासित व अन्य राज्यों में श्रम कानूनों के निलंबन को वापस लो,12 घंटे का कार्य दिवस नहीं चलेगा,मजदूर अधिकार छीनना बंद करो, सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेलों में डालना बंद करो, निजीकरण, निगमीकरण और विनिवेशीकरण बंद करो,देश की संपत्ति बेचना बंद करो, किसान-विरोधी, काॅरपोरेट व बाजार-परस्त तीनों कृषि संबंधी अध्यादेश वापस लो, बेरोजगारी पर रोक लगाओ. नरेगा को मजबूत बनाओ – इसके तहत हर मजदूर को सालाना न्यूनतम 200 दिनों का काम और रू. 500 दैनिक मजदूरी सुनिश्चिित करो. इस कानून को शहरी गरीबों के लिये लागू करो, सरकार कर्जदारों के कर्ज तत्काल माफ करे और उन्हें राहत पहुंचाए, माइक्रोफाइनेन्स कंपनियों पर कड़ा नियंत्रण सुनिश्चित करो.”

 

ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के महामंत्री डॉ कैलाश पाण्डेय ने मांग की कि, “आशा समेत सभी असंगठित क्षेत्र के कामगारों को न्यूनतम वेतन, स्थायीकरण और अगले छह माह तक दस हजार रुपये लॉकडाउन निर्वाह भत्ता दिया जाय।”

 

इस अवसर पर के के बोरा, डॉ कैलाश पाण्डेय, सनसेरा यूनियन के दीपक कांडपाल, जोगेंद्र लाल, रोशन निनावे, हीरा सिंह नेगी, गोकुल, चंद्रा सिंह, सुनील, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की रिंकी जोशी,कमलेश बोरा, पुष्पा बर्गली, बबिता आर्य, सरिता साहू, अंजना आदि मौजूद रहे।

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