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Uttarakhand

आप ने बढ़ाई कांग्रेस की चुनौतियां, मजबूत विरोध का कराया अहसास

देहरादून। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) के उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में उतरने की खबर से प्रदेश की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है। सबसे पहला दमदार प्रभाव आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का देखने में आया है। भाजपा विधायक महेश नेगी पर यौन उत्पीड़न ओैर बलात्कार का आरोप लगाने वाली महिला को न्याय दिलाने के लिए आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर प्रदर्शन किया, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बड़े से लेकर छोटे नेता इस मामले को लेकर उदासीन बने हुए थे। हेरानी की बात यह है कि कांग्रेस के बड़े नेता इस मामले में न्यूज चैनलों की चर्चाओं में तो खासे मुखर रहे, लेकिन कांग्रेस ने इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी विरोध-प्रदर्शन के लिए कोई कदम तक नहीं उठाया। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस मामले पर जोरदार प्रदर्शन कर पार्टी की उपस्थिति की पहली सीढ़ी तय कर ली है। इसके बाद कांग्रेस में भी हलचल तेज हुई हैं। इसका बड़ा असर सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर भी देखने को मिला है और जो भाजपा इस मामले में तटस्थ दिखने का प्रयास कर रही थी वही अब इसे गंभीरता से लेने की बात कर रही है। विधायक महेश नेगी पर लगे आरोपों को गंभीर मानते हुए इस मामले में संगठन कार्यवाही करने का मन बना चुका है। इसके लिए भाजपा बैठक करेगी कि इस मामले में किस तरह से पार्टी और सरकार की छवि को सुरक्षित रखा जा सके।

 

द्वाराहाट के भाजपा विधायक महेश नेगी पर एक महिला ने उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था, साथ ही उससे पैदा हुई पुत्री के पिता होने का आरोप लगा डीएनए जांच करवाने की मांग करते हुए पुलिस में तहरीर दी थी। जबकि पूर्व में ही विधायक महेश नेगी की पत्नी ने उक्त महिला के खिलाफ ब्लैकमेलिंग कर 5 करोड़ रुपए मांगने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था।

प्रदेश में एक बार फिर सेक्स स्कैंडल का मामला सामने आते ही राजनीति गरमाने लगी है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि कांग्रेस पार्टी इस मामले में न तो कोई खास विरोध जता पाई और न ही अपना रुख स्पष्ट कर पाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह जरूर इस मामले में निष्पक्ष जांच और विधायक के डीएनए जांच होने की बात करते रहे। लेकिन जिस तरह से एक मुख्य विपक्षी पार्टी को इस मामले में अपना स्पष्ट रुख रखना चाहिए था, वह कांग्रेस में देखने को नहीं मिला।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इस मामले में सीधे तोर पर बात करने से बचते नजर आए। मामले को उक्त महिला, विधायक ओैर पुलिस के बीच होने की बात कहकर बचते नजर आए।

भारतीय जनता पार्टी के नेता और संगठन भी मामले में एक तरह से तटस्थता की ही भूमिका में रहे। अपने विधायक का न तो भाजपा ने समर्थन किया और न ही उनका विरोध किया। एक तरह से भाजपा भी इस गंभीर मामले में चुप्पी साधे रही। प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने मामले की जांच होने के बाद दोषी पाए जाने पर कार्यवाही करने की बात कही। लेकिन भाजपा संगठन और कार्यकर्ता इस मामले में हैरतनाक ढंग से चप्ुपी साधे रहे। यहां तक कि भाजपा की साशल मीडिया टीम भी सोशल मीडिया में अपने विधायक पर उठ रहे सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रहे, जबकि पूर्व में यह देखा गया है कि भाजपा के विधायकों और नेताओं पर सोशल मीडिया में जब-जब आरोप और सवाल खड़े हुए हैं भाजपा की टीम ने उनका जमकर विरोध किया है और जवाब भी खुलकर दिया है।

माना जाता है कि विधायक महेश नेगी के भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टी नेताओं के साथ बेहद नजदीकी रिश्ते बने हुए हैं। भाजपा में शामिल होने से पूर्व महेश नेगी कांग्रेस के नेता के तोर पर जाने जाते थे और दो बार महेश नेगी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसी के चलते आज भी कांग्रेस से उनके संबंध मधुर बने हुए हैं जिसके चलते कांगेस पार्टी इस मामले में उनके खिलाफ मुखर होने के बजाय देखो और इंतजार करो की आसान नीति पर ही चल रही है। मीडिया और मीडिया की डिवेट्स में कांग्रेसी नेता और पुलिस पर भी आरोप लगाकर मामले में सत्ता का दुरुपयोग करने की बात कहती रही। मामले की निष्पक्षता से जांच होने की मांग करते रहे।

वामपंथी दलां ओैर बसपा के अलावा उक्रांद भी इस मामले में कोई खास पहल नहीं कर पाया। सोशल मीडिया में जरूर कुछ उक्रांद नेता अपने विरोध को धार देते दिखाई दिए। लेकिन प्रदेश हित की बात करने वाला उक्रांद औेर उसके बड़े नेता इस मामले में कोई विरोध-प्रदर्शन तक नहीं कर पाए।

अरविंद केजरीवाल ने 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात साफ कर दी है। इससे प्रदेश भर के आप कार्यकर्ताओं में जोश भर गया और देहरादून में आम आदमी पार्टी ने पीड़ित महिला के पक्ष में जमकर प्रर्दशन कर अपना विरोध जताया है। आप कार्यकर्ताओं ने इस मामले में मुख्यमंत्री आवास कूच किया जिसे पुलिस ने भले ही रोक दिया हो, लेकिन इस मामले में पहली बार किसी राजनीतिक दल द्वारा विरोध-प्रदर्शन किया गया। आप के प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस भी सड़क पर उतरी है। इससे पहले द्वाराहाट में ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन किया था।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा से ही मुकाबला होना है तो आम आदमी पार्टी ने इस मामले में त्वरित प्रतिक्रिया दिखाते हुए भाजपा के विधायक के खिलाफ लगे यौन शोषण के आरोपों पर अपना राजनीतिक विरोध दर्ज करवाने में एक बड़ी हद तक सफलता तो प्राप्त कर ही ली है। भले ही यह प्रदर्शन सीमित रहा हो, लेकिन जिस तरह से प्रदेश की राजनीति में नए चुनावी समीकरण बन रहे हैं उससे तो लगता है कि विपक्ष के विरोध की कमान कहीं कांग्रेस के हाथां से सरकने का अंदेशा भी जताया जाने लगा है। अब कांग्रेस को सत्ता और भाजपा के खिलाफ मतदाताओं में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए आम आदमी पार्टी से बीस होना पड़ेगा। अब यह माना जा रहा है कि कांग्रेस का सत्ताधारी भाजपा के अलावा आम आदमी पार्टी से भी बड़ी चुनौती मिल सकती है। भले ही उसके नेता इस बात को ज्यादा तवज्जो न दे रहे हों।

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