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Uttarakhand

एक ठहरा हुआ कार्यालय

उत्तराखण्ड का दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस राज्य सरकार की ‘उत्कृष्ट’ कार्यशैली का जीता-जागता उदाहरण है। यहां तैनात चीफ रेजिडेंट कमिश्नर और रेजिडेंट कमिश्नर असल में देहरादून में राज्य सरकार के महत्वपूर्ण पद संभाल रहे हैं। दिल्ली में केंद्र सरकार से आवंटित राज्य पूल के घरों पर कब्जा बनाने के चलते अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश और सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा को इन पदों में अतिरिक्त तैनाती दी गई है। इस कार्यालय की बदहाली का आलम यह कि इसकी वेबसाइट लंबे अर्से से अपडेट नहीं की गई है। इस वेबसाइट की मानें तो राज्य के राज्यपाल अभी भी के.के. पॉल हैं। महेंद्र सिंह माहरा अब भी राज्यसभा सांसद हैं। इतना ही नहीं वेबसाइट के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार अभी भी केंद्र सरकार में अपर सचिव हैं। राज्य के सभी तेरह जिलों के डीएम की जानकारी भी पूरी तरह गलत है
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों संग राज्य सरकार से संबंधित विभिन्न मुद्दों में सही संवाद बनाने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से देश के सभी राज्यों का एक कार्यालय राजधानी दिल्ली में होता है। इस कार्यालय को स्थानिक आयुक्त (रेजिडेंट कमिश्नर) का नाम दिया गया है। जैसा नाम से ही स्पष्ट है इस कार्यालय के मुखिया यानी रेजिडेंट कमिश्नर की तैनाती दिल्ली में होती है ताकि वह अपने राज्य के हितों की पैरवी केंद्र सरकार से कर सके। उत्तराखण्ड का भी दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर तैनात है। फर्क सिर्फ इतना भर है कि यहां तैनात अफसर दिल्ली में न रहकर देहरादून में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर का पद उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में घर हासिल करने की मंशा के चलते अपने राजनीतिक आकाओं को साध जबरन कब्जाया हुआ है। जाहिर है जब ये अधिकारी दिल्ली के बजाय देहरादून में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय का कार्य प्रभावित होने लगा है।
उत्तराखण्ड सरकार के दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस में वर्तमान में चीफ रेजिडेंट कमिश्नर पद पर ओमप्रकाश तैनात हैं। ओमप्रकाश अपर मुख्य सचिव हैं जो वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव होने के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा, लोक निर्माण, राज्य संपत्ति समेत कई विभागों के प्रमुख हैं। जाहिर है उनकी मुख्य स्थानिक आयुक्त पद पर तैनाती का कोई औचित्य नहीं बनता। केवल दिल्ली में केंद्र सरकार से राज्य को आवंटित मकान हासिल करने के चलते वे इस पद को भी कब्जाए हुए हैं। ओमप्रकाश को वर्तमान मुख्यमंत्री का अत्यंत करीबी बताया जाता है। उनके बाद राधिका झा इस कार्यालय में रेजिडेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। वे भी वर्तमान मुख्यमंत्री की करीबी अधिकारियों में शामिल बताई जाती हैं। उनके पास सचिव मुख्यमंत्री के साथ- साथ ऊर्जा जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय भी है। राधिका झा को भी दिल्ली में सरकारी आवास आवंटित है। पहले यह आवास केंद्र की प्रतिनियुक्ति में तैनात उनके पति नीतेश झा को आवंटित था। नीतेश झा के राज्य वापस लौटने के बाद स्थानिक आयुक्त होने के चलते राधिका झा को यह घर आवंटित कर दिया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार से वर्तमान में मात्र तीन ही आवास उत्तराखण्ड को आवंटित हैं। इनमें से एक में मुख्यमंत्री का कैंप र्कायालय है। बाकी दो ओमप्रकाश और राधिका झा के नाम आवंटित हैं। राज्य गठन के बाद सबसे पहले रेजिडेंट कमिश्नर ज्योति पाण्डे राव बनाई गई थीं। उनकी तैनाती दिल्ली में ही थी। राव के बाद केआर भाटी, विनीता पवार, सुनील कुमार भट्ट और आलोक जैन इस पद पर रहे। सभी दिल्ली में ही तैनात थे। ओमप्रकाश को हरीश रावत सरकार में मुख्य स्थानिक आयुक्त बनाया गया। लेकिन वे देहरादून में ही महत्वपूर्ण पदों पर बने रहे।
राधिका झा की रेजिडेंट कमिश्नर पद पर तैनाती से पहले एसडी शर्मा इस पद पर लंबा अर्सा रहे। शर्मा बेहद अनुभवी और वरिष्ठ नौकरशाह थे। वर्तमान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय की जमीन भारत सरकार से आवंटिन कराने का श्रेय उन्हें ही जाता है। शर्मा के कार्यकाल को समय पूर्व ही समाप्त कर राधिका झा को भी दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर बनाने के पीछे का मकसद नीतेश झा को आवंटित घर बनाए रखने का रहा है। त्रिवेंद्र सिंह सरकार ने इस दौरान विवादित छवि के मृत्युंजय झा को एडिशनल रेजिडेंट कमिश्नर बना डाला। सूत्रों की मानें तो एडिशनल रेजिडेंट कमिश्नर पद भारत सरकार के संयुक्त सचिव अथवा निदेशक स्तर का होता है। झा इससे कहीं निचले स्तर के अधिकारी थे। ये वही मृत्युंजय झा हैं जिनका नाम ‘समाचार प्लस’ चैनल के मालिक उमेश कुमार प्रकरण में सामने आया है। झा को कुछ समय बाद यकायक ही इस पद से हटा एक एडीएम स्तर की महिला अफसर को तैनात कर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो पूर्व में इस पद पर तैनात रहे एसडी शर्मा का पे ग्रेड 65,000-75,000 था जो भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव का होता है। वहीं अब तैनात इला गिरि का वेतनमान इससे कहीं कम एडीएम स्तर का है। इस जूनियर अधिकारी की तैनाती के पीछे इनके पति का प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात होना बताया जा रहा है।
जाहिर है जब दो शीर्ष पदों पर तैनात अफसर दिल्ली के बजाय देहरादून रहते हों और एक बेहद जूनियर अधिकारी की तैनाती एडिशनल रेजिडेंट कमिश्नर पद पर कर दी गई हो तो रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस का कामकाज प्रभावित होना स्वाभाविक है। ‘दि संडे पोस्ट’ ने जब इस कार्यालय की वेबसाइट ूूण्तबण्नाण्हवअण्पद का जायजा लिया तो जो सामने आया वह चौंकाने वाला था। यह वेबसाइट रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस की बदहाली का जीता-जागता सबूत है। वेबसाइट को लंबे अर्से से अपडेट नहीं किया गया है। उदाहरण के लिए इस वेबसाइट में राज्यपाल डॉ कøष्णकांत पॉल को ही दर्शाया जा रहा है जबकि 26 अगस्त 2018 से राज्य की महामहिम बेबी रानी मौर्य बन चुकी हैं। वेबसाइट में राज्य के तेरह जिलों के डीएम की बाबत गलत जानकारी दी गई है :-
क्र. जिला वर्तमान डीएम वेबसाइट के अनुसार डीएम

उत्तरकाशी डॉ आशीष चौहान दीपेंद्र चौधरी

चमोली स्वाति भदौरिया विनोद कुमार सुमन

रुद्रप्रयाग मंगेश घिल्डियाल डॉ राघव लंगर

टिहरी सोनिका इन्दुधर बौड़ाई

देहरादून एसए मुरुगेशन रमन कविनाथ

हरिद्वार दीपक रावत हरवंश चुंग

पौड़ी सुशील कुमार चंद्रशेखर भट्ट

पिथौरागढ़ सी रविशंकर रंजीत कुमार सिन्हा

चंपावत सुरेंद्र नारायण पाण्डे डॉ इकबाल अहमद

बागेश्वर रंजना राजगुरु मंगेश घिल्डियाल

अल्मोड़ा नीतिन भदौरिया सबिन बंसल

नैनीताल विनोद कुमार सुमन जसवंत राठौड़

ऊधमसिंह नगर नीरज खैरवाल चंद्रेश यादव

जाहिर है वेबसाइट को बरसों से अपडेट नहीं किया गया है। ऊधमसिंह नगर का डीएम जिन चंद्रेश यादव को दर्शाया गया है वह दो बरस पहले जनपद के डीएम थे। वर्तमान में एनएच 74 घोटाले में निलंबित चल रहे हैं। इसी प्रकार पौड़ी के डीएम चंद्रशेखर भट्ट कई बरस पहले डीएम थे। वर्तमान में राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। हैरानी की बात है कि तेरह में से एक भी डीएम  का नाम सही नहीं दिया गया है।
वेबसाइट में राज्य से राज्यसभा सांसदों की भी गलत जानकारी दी गई है। इस वेबसाइट पर भरोसा करें तो महेंद्र सिंह माहरा अभी भी उत्तराखण्ड से राज्यसभा सांसद हैं, हकीकत में इनका कार्यकाल पूरा हुए अर्सा बीत चुका है। इस वेबसाइट में उत्तराखण्ड कैडर के उन आईएएस अधिकारियों की भी सूची है जो वर्तमान में भारत सरकार में सेवारत हैं। यह सूची भी इसी तरह से गलत है। राज्य के वर्तमान मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह इस वेबसाइट के अनुसार अभी भी केंद्र सरकार में अपर सचिव कøषि हैं। नीतेश झा को केंद्रीय गृह मंत्री का निजी सचिव दर्शाया गया है जबकि वे अर्सा पहले ही उत्तराखण्ड आ चुके हैं। राधिका झा जो वर्तमान में मुख्यमंत्री की सचिव हैं, इस वेबसाइट के अनुसार पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, नई दिल्ली में डायरेक्टर पद पर तैनात हैं। इतना ही नहीं कई आईएएस अधिकारी जिन्हें सेवानिवृत्त हुए अर्सा बीत चुका है, इस वेबसाइट के अनुसार अभी तक कार्यरत हैं। कुल मिलाकर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि उत्तराखण्ड सरकार का स्थानिक आयुक्त कार्यालय पूरी तरह से अव्यवस्था का शिकार है। यहां तैनात मुख्य स्थानिक आयुक्त और स्थानिक आयुक्त असल में देहरादून में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं जिन्हें दिल्ली में पद केवल सरकारी घरों पर उनका कब्जा बनाए रखने की नीयत से दिए गए हैं। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थानिक आयुक्त कार्यालय का कामकाज कैसे चल रहा होगा।

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