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Uttarakhand

सीबीआई की आहट से सकते में धामी सरकार

उत्तराखण्ड के खनन निदेशक एसएल पैट्रिक ने अपने अपहरण, 50 लाख की रंगदारी और जान से मारने की धमकी मिलने का मुकदमा दर्ज कराया, शासन ने उनको ही लेन-देन एवं प्रलोभन के वशीभूत होकर दुरभि संधि कर सरकारी कार्यों की गोपनीयता को भंग करने और पद का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोपों की बात कह निलंबित कर दिया है। पैट्रिक पर भ्रष्टाचार का काला साया है जिसे ‘दि संडे पोस्ट’ के पास मौजूद उन वाट्सऐप चैटिंग से समझा जा सकता है जिनमें लाखों रुपए के लेनदेन की वार्तालाप हुई है। पैट्रिक की यह चैटिंग उसी व्यक्ति ओमप्रकाश तिवारी से हुई जिस पर उन्होंने अपने अपहरण, रंगदारी और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए थे। ओमप्रकाश तिवारी को मीडिया ट्रायल में जहां खलनायक बनाया गया वहीं उनकी याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार खनन निदेशक पर कार्रवाई करने को मजबूर हुई है। प्रदेश की नौकरशाही कितनी बेलगाम और बेखौफ हो भ्रष्टाचार की दलदल में गहरे धंस चुकी है इसे खनन के खेल से समझा जा सकता है। ऐसे में धामी सरकार के अगले कदम पर लोगों की निगाहें हैं कि क्या आरोपी अधिकारी के खिलाफ जांच कर खनन में चल रहे धन-बल और प्रपंच पर प्रतिबंध लगाया जाएगा या फिर यह सब  हाईकोर्ट  द्वारा इस प्रकरण की सीबीआई जांच से बचने के लिए लीपापोती का प्रयास है

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ा फैसला लेते हुए भूतत्व एवं खनिकर्म के निदेशक एसएल पैट्रिक को निलंबित कर दिया है। पैट्रिक आने वाले जून माह में अपने पद से सेवानिवृत्त होने वाले थे। पैट्रिक पर रिटायर होने से ठीक पहले ही गंभीर आरोप लगे हैं। जिसे शासन की निलंबन कार्यवाही के दौरान उनके खिलाफ जारी हुई एक लम्बी-चौड़ी चार्जशीट से समझा जा सकता है। उत्तराखण्ड शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश में आरोप लगाया गया है कि  निदेशक पैट्रिक द्वारा राजकीय कार्यों की गोपनीयता भंग की जा रही थी। साथ ही सरकारी संविदा कमिर्यों को प्रताड़ित करते हुए लगातार उनका इस्तेमाल अपने पारिवारिक व निजी कार्यों में कर रहे थे। यही नहीं बल्कि उन पर सरकारी वाहनों के दुरुपयोग के भी आरोप लगे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस ओम प्रकाश तिवारी पर पैट्रिक ने अपने अपहरण करने, जान से मारने की धमकी देने तथा 50 लाख की फिरौती मांगने के आरोप लगाते हुए एक सप्ताह पूर्व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी उसी ओमप्रकाश तिवारी से लेन-देन, प्रलोभन के वशीभूत होकर सरकारी कार्यों व गोपनीयता को भंग करने तथा पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप भी पैट्रिक पर इस चार्जशीट में लगा है। मामले का सबसे हैरतनाक पहलू रिश्वत कनेक्शन का भी सामने आया है। ‘दि संडे पोस्ट’ के पास मौजूद निदेशक पैट्रिक और ओमप्रकाश तिवारी की व्हाट्सएप चैटिंग इस बात की गवाही देती प्रतीत हो रही है कि खनन में धन का बड़ा ‘खेल’ हो रहा था।

गत् 16 अप्रैल को उत्तराखण्ड में उस समय सनसनी फैल गई जब देहरादून के कैंट थाना में खनन निदेशक एसएल पैट्रिक ने मुकदमा दर्ज कराया। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा बंधक बनाने और 50 लाख रुपए की रंगदारी मांगी गई। रंगदारी न देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। 9 अप्रैल की इस घटना में जिस ओमप्रकाश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया उस पर खनन निदेशक ने आरोप लगाते हुए कहा कि वह उनसे खनन पट्टों और स्टोन क्रशर में साझेदारी करने का दबाव बना रहा था। जब उन्होंने दबाव नहीं माना तो उनका अपहरण कर लिया गया।

अपहरण की कहानी, पैट्रिक की जुबानी

एसएल पैट्रिक

 

घटना नौ अप्रैल की बताई जा रही है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन निदेशक एसएल पैट्रिक ने इस मामले में एसएसपी को शिकायत की थी। बकौल पैट्रिक ‘वह विभागीय कार्यों के लिए सचिवालय में आते-जाते रहते हैं। कुछ दिन पहले सचिवालय में मेरी मुलाकात आदर्श विहार, कारगी रोड देहरादून निवासी ओमप्रकाश तिवारी से हुई थी। तिवारी ने खुद को एक अपर सचिव स्तर के अधिकारी का खास बताया था। वह खनन पट्टों और स्टोन क्रशर से संबंधित कार्यों करना चाहता था। इसके लिए जब मुझसे बात की तो मैंने ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने की सलाह दी। लेकिन इसके लिए तिवारी मुझसे मिलने का समय मांगने लगा। अप्रैल के पहले सप्ताह में मैंने उनसे कहा कि वह शासकीय कामों में व्यस्त रहते हैं तो रविवार का दिन चुन सकते हैं।

लेकिन ज्यादा व्यस्त रहने के कारण मैं मिलने का समय नहीं दे सका। इसके बाद तिवारी का फोन आया और मुझसे नौ अप्रैल को मिलने का समय मांगा। मैं नौ अप्रैल को करीब सात बजे अपने घर पहुंच गया। करीब आठ बजे तिवारी ने उन्हें फोन किया और कहा कि वह घर के बाहर खड़ा है। मैंने अंदर आने के लिए कहा तो उसने परिवार के सामने बात करने से इनकार कर दिया और किसी रेस्टोरेंट में चलने के लिए कहा। तिवारी ने मुझे अपनी कार में बैठा लिया। इस पर मैंने अपने ड्राइवर को पीछे से आने के लिए कहा। तिवारी उन्हें रेस्टोरेंट में ले जाने के बजाय बल्लूपुर के पास शारदा गेस्ट हाउस में ले गया। यहां उसने प्रथम तल के कमरे में मुझे बैठा दिया। गेस्ट हाउस में उसके कुछ साथी भी मौजूद थे। तिवारी ने मुझे शराब पीने को कहा। लेकिन अस्वस्थ होने के कारण मैंने मना कर दिया।
इस पर तिवारी गुस्सा हो गया और उसने खींचकर मुझे बेड पर डाल दिया। इसके बाद दरवाजा बंद कर तिवारी बाहर चला गया। उसने धमकाते हुए मुझसे 50 लाख रुपए मांगे और न देने पर जान से मारने की धमकी दी। जबरदस्ती मुझसे किसी पंजीकृत स्टोन क्रशर और खनन पट्टे में हिस्सेदारी कराने को कहा। तिवारी ने मेरे परिवार को जानकारी देते हुए उन्हें भी हानि पहुंचाने की धमकी दी।
करीब दो घंटे तक मुझे वहीं बंधक बनाए रखा गया। लगभग 10 बजे मैंने अपने ड्राइवर को फोन किया और उसे अंदर बुलाया। इस पर तिवारी ने कहा कि उसके 30 गुर्गे बाहर खड़े हुए हैं कोई अंदर नहीं आ सकता है। तिवारी ने कहा कि उसने परिवार की पूरी रेकी की है। मेरे ड्राइवर ने हिम्मत दिखाते हुए दरवाजा खोला और जैसे-तैसे मुझे बाहर निकाला। इस घटना के बाद मैं बीमार हो गया और शिकायत करने का भी समय नहीं मिला। स्वस्थ होने के बाद मैंने शिकायत की है। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर कैंट थाने में आरोपी ओमप्रकाश तिवारी व उसके साथियों के खिलाफ गत् 16 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद आरोपी ओमप्रकाश तिवारी ने अपनी गिरफ्तारी पर स्टे के लिए हाईकोर्ट में अपील की। तिवारी के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष अपने मुवक्किल ओमप्रकाश तिवारी के पक्ष में जो कुछ सबूत पेश किए उससे मामले का एक दूसरा ही रूप सामने आया। मामला रंगदारी, अपहरण और जान से मारने की धमकी का नहीं है, बल्कि इसके पीछे खनन विभाग की भ्रष्टाचार को शह देने की कहानी भी है।

चैटिंग में आया सच सामने

वाट्सएप पर हुई बातचीत के अंश

 

इस कहानी में आरोपी ओमप्रकाश तिवारी और पूर्व खनन निदेशक एसएल पैट्रिक पहले से ही न केवल परिचित थे, बल्कि एक-दूसरे से संबंध भी थे। जिसे वाट्सऐप पर दोनों के बीच हुई चैटिंग सिद्ध करती है। ऐसे में सवाल यह था कि पैट्रिक और तिवारी के बीच ऐसी क्या बातें हुई जिनसे दोनों के बीच पहले से आपसी संबंधों को माना गया। वाट्सऐप की चैटिंग अनुसार ओमप्रकाश तिवारी ने खनन निदेशक एसएल पैट्रिक से अपने वह दो लाख रुपए मांगे जिन्हेें कथित रिश्वत दिया गया। 16 फरवरी 2024 की जो चैटिंग की गई है उससे पहले ओमप्रकाश तिवारी की तरफ से व्हाट्सएप कॉलिंग दिखाई दे रही है जिसका कोई जवाब एसएल पैट्रिक की तरफ से नहीं दिया गया। इसके करीब एक घंटे बाद पैट्रिक का एक मैसेज आया जिसमें वह किसी अनुज आईटी सेल का नंबर देते हुए कह रहे हैं कि इनसे बात कीजिए, ये आपको गाइड करेंगे। इस पर ओमप्रकाश तिवारी ने रिप्लाई करते हुए लिखा है- ‘इसकी कोई आवश्यकता नहीं है मुझे। डायरेक्टर होंगे आप अपने लिए। मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता और मेरे भी एक काम के लिए 2 लाख लिए हुए हैं आपने। 2 साल से काम नहीं हुआ है। इसका ध्यान रखूंगा, ध्यान रहे।

 

वाट्सएप पर हुई बातचीत के अंश

 

क्या है क्रशर इंटरप्राइजेज के नाम का सच?

इस वाट्सऐप चैटिंग में इसके अलावा अन्य कई स्क्रीन शॉट है जो इस बात की गवाही देते नजर आ रहे हैं कि पूर्व खनन निदेशक एसएल पैट्रिक और ओमप्रकाश तिवारी के बीच कई बार लेन-देन को लेकर बातें हुई हैं। वाट्सअप स्क्रीन शॉट में दिखाया गया है कि पैट्रिक की तरफ से एक दस्तावेज की दो लाइनों को भेजा गया है। जिसमें किसी क्रशर इंटरप्राइजेज का जिक्र करते हुए खसरा नम्बर 178, 179 खल्सर तहसील, भगवानपुर, जिला हरिद्वार लिखा हुआ है। इसके नीचे ओमप्रकाश तिवारी ने इसका जवाब देते हुए लिखा है कि ‘इसमें और भी कई छुपे हुए साथी हैं डायरेक्टर साहब।

इस पर जवाब देते हुए पूर्व खनन  निदेशक एसएल पैट्रिक ने लिखा है- ‘मुझे कल रात से बुखार है इसलिए आज मैं बाहर नहीं जा सकता, इसलिए मैंने तुम्हें फोन नहीं किया। ऐसा लगता है कि आप आहत और क्रोधित हैं। हालांकि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। और मैंने आपको उस समय की स्थिति के बारे में बताया था। अगर आपको ठेस पहुंची है तो मुझे इस बात का खेद है। आापकी शिकायतों और गलतफहमियों को दूर करने के लिए मैं कल सुबह करीब 10 बजे आपके घर पर आपसे मिलूंगा।’

 

पैट्रिक से पहले हुई है तिवारी की शिकायत

एसएसपी देहरादून को प्रेषित शिकायती पत्र

 

ओमप्रकाश तिवारी ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष 12 अप्रैल को शिकायती पत्र दिया है। जिसमें उन्होंने पूर्व खनन निदेशक एसएल पैट्रिक पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने मुझे सरकारी खनन पट्टा दिलाने का वादा किया था और इस एवज में सितम्बर 2021 में 2 लाख रुपए, अक्टूबर 2021 में 3 लाख रुपए सहित कुल 5 लाख रुपए लिए थे और कहा कि छह माह तक मैं आपको खनन पट्टा अवश्य दिलवा दूंगा। एसएल पैट्रिक द्वारा छह माह तक मुझे पट्टा नहीं दिलाया और आजकल-आजकल करके टालता रहा। जब मैंने उनसे अपने पैसे मांगे तो वह कोई न कोई बहाना बनाकर मामले को टालता रहा। इसके चलते मैं 9 अप्रैल 2024 को उनके घर गया जहां कुछ लोग उनके साथ थे जो नशे में थे। उन्होंने मेरे साथ गाली-गलौच की और कहा कि हम तुम्हारे पैसे नहीं लौटाएंगे, तुमसे जो हो सकता है कर लो। यदि तुमने हमसे दोबारा पैसे मांगे तो हम तुम्हें व तुम्हारे परिवार को जान से मरवा देंगे। हमारी उच्चाधिकारियों से जान-पहचान है। पुलिस भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इसके बाद तिवारी ने एसएसपी को लिखे पत्र में उक्त लोगों से अपनी जान- माल का खतरा बताते हुए कहा कि ये कभी भी मेरे साथ कोई अनहोनी घटना कर सकते हैं और किसी झूठे मामले में फंसा सकते हैं। तिवारी का यह शिकायती पत्र एसएसपी कार्यालय में 12 अप्रैल को रिसीव किया गया है। जबकि पूर्व खनन निदेशक एसएल पैट्रिक ने इसके चार दिन बाद 16 अप्रैल को कैंट थाने में तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

हाईकोर्ट के सच से घबराई सरकार

उत्तराखण्ड राज्य में खनन को एक ऐसा विभाग बताया जाता है जहां सबसे ज्यादा धन बरसता है। यह विभाग वैध से ज्यादा अवैध कारनामों के लिए अक्सर चर्चाओं में रहता है। यहां तैनात अधिकारियों की पौ बारह रहती है। पैट्रिक को ही ले लें तो ये अधिकारी खनन निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर कई वर्षों से कुंडली मारकर बैठे थे। निदेशक बनने से पहले वे खनन में ही विभिन्न पदों पर वर्षों तक तैनात रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान वर्ष 1999 में पैट्रिक चमोली जिले के जिला खनन अधिकारी थे। तब से लेकर अब तक अगर इनका इतिहास खंगाला जाए तो कई ऐसे रहस्य उजागर हो सकते हैं जिसमें ओमप्रकाश तिवारी की तरह खनन के पट्टों को लेकर बड़े खेल किए गए हो। शायद यही वजह है कि अब सरकार पैट्रिक की जांच के लिए तैयारी कर रही है जिसमें उसकी अकूत सम्पत्तियों का लेखा- जोखा सामने लाया जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार को इसके निर्देश हाईकोर्ट भी एक सुनवाई में दे चुका है।
गौरतलब है कि ओमप्रकाश तिवारी ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने खनन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को समझते हुए इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की संभावना तलाशने का निर्देश हाईकोर्ट में सीबीआई के वकील को दे डाला। राज्य सरकार अदालत के इस अप्रत्याशित कठोर रुख से सकते में आ गई है।

उपसंहार

सरकार से जारी पैट्रिक का निलंबन पत्र

 

कहने को तो प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी की सरकार अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है। अब से पूर्व प्रदेश में तैनात रहे आईएएस अधिकारी रामविलास यादव और आईएएस ऑफिसर कृष्ण चंद्र की सम्पत्तियों की जांच करा कर सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया था कि वह भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं करेगी। लेकिन यह भी सच है कि राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। खनन निदेशक के प्रति हाईकोर्ट के कठोर रुख से घबराई सरकार ने क्या वाकई खनन विभाग में चौतरफा पसरे भ्रष्टाचार को थामने के लिए कठोर कदम उठाने की सदनीयत से पैट्रिक को निलंबित किया है या फिर यह सीबीआई जांच को रोकने के लिए घबराहट में उठाया गया कदम है, यह देखा जाना अभी बाकी है।

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