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अध्यात्म के रास्ते जनसेवा

नरेंद्र चंद एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। सेवा अवकाश के बाद निरंतर सामाजिक कार्यों में संलग्न हैं। अध्यात्म को आम जीवन का हिस्सा बनाने को लेकर सक्रिय हैं। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए वह उन्हें अध्यात्म की तरफ जोड़ने की नई पहल में जुटे हैं। एक लेखक के तौर पर भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। ‘अध्यात्म’ व ‘अध्यात्म में चलें, सुख से जियें’ नामक दो पुस्तकों को लिख चुके हैं। अनुशासन, कर्तव्य निष्ठा, कर्तव्य परायणता एवं निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने का जो पाठ उन्होंने सेना में रहने के दौरान सीखा वह सामाजिक जीवन में भी उसे उतारने का प्रयास कर रहे हैं। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वह समाज को कुछ लौटाना चाहते थे, इसी चिंतन में उन्हें बोध हुआ कि शब्द, समय व साहित्य सेवा के जरिए वह सामाजिक सरोकारों एवं सामाजिक सेवाभाव के साथ जुड़ सकते हैं। निरंतर समर्पण का ही प्रभाव रहा है कि वह आज दस सामाजिक संगठनों के साथ जुड़ समाज सेवा के कार्यों में सलंग्न हैं। उनके इसी योगदान को देखते हुए भारत सरकार के नीति आयोग से पंजीकृत आध्यात्मिक पद्धति आश्रम द्वारा उन्हें प्राचीन भारतीय शिक्षा संस्कृति के लिए ‘विद्या भास्कर सम्मान’ से अलंकृत किया गया है।

पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के मामले के साथ ही सेना की पंेशन, द्वितीय विश्व युद्व पेंशन, पेन्यूरी ग्रांट के साथ ही समाज कल्याण द्वारा प्रदान की जाने वाली पेंशन से वंचित रह जाने वाले कई लोगों को वह पेंशन दिलाने में मदद कर चुके हैं। शहीद परिवारों की समस्याओं को उठाने के साथ ही जनपद में भर्ती रैली आयोजित करने को लेकर भी वह मुखर रहे हैं। इसके अलावा सैनिक कल्याण कार्यालयों सहित सैनिक विश्राम गृहों की बदतर स्थितियों को सुधारने का मुद्दा हो या फिर सेना में भर्ती की शैक्षिक योग्यता आठवीं पास करने, सैनिक कल्याण मंत्रालय स्थापित करने, गैस बुकिंग के लिए टोल फ्री नम्बर जारी करने, जनपद को रेल सेवा से जोड़ने, गोरखा समुदाय के लोगों को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण संबंधी प्रमाण पत्र जारी करने की मांग सहित तमाम मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

अभी उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित बीसाबजेड़ इंटर कॉलेज में अपने पिता महाजन चंद की स्मृति में एक पुस्तकालय खोला है। जिसके लिए उन्होंने 30 हजार की धनराशि विद्यालय प्रशासन को सौंपी है। जनपद में शायद ही कोई विषय ऐसा नहीं जिसे वह न उठाते हों। इसके अलावा दर्जनों कार्यक्रमों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी बनी रहती है। वह चंद परिवार फाउंडेशन के पूर्व में जिला अध्यक्ष के साथ ही वर्तमान में सदस्य भी हैं। इसके अलावा महिला एच्छिक ब्यूरो (पुलिस), भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी, सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी, जिला सैनिक कल्याण परिषद, पूर्व सैनिक ऑफिसर्स क्लब के सदस्य भी हैं। वह मानवाधिकार संरक्षण समिति के जिलाध्यक्ष, पूर्व सैनिक लीग के प्रवक्ता, कुमाऊं मंडल कांग्रेस सैन्य प्रकोष्ठ के पूर्व प्रवक्ता के तौर पर भी अपनी बेहतरीन सेवाएं प्रदान कर चुके हैं।

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