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कड़ा भू-कानून बनने लगा है चुनावी मुद्दा

  • भारती पाण्डेय

उत्तराखण्ड में स्थानीय लोगों की जमीन को सख्त भू-कानून न होने के चलते गैर उत्तराखण्डियों द्वारा औने-पौने दामों पर खरीदने का विरोध अब जोर पकड़ने लगा है। राज्य विधानसभा चुनाव मात्र कुछ माह दूर हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों ने भी इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उत्तराखण्ड क्रांति दल पूरी ताकत से इसे राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में उठाने लगा है तो कुमाऊं क्षेत्र में उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी भी ऐसा ही करते नजर आ रही है।

16 सितंबर 2021 को चितई (अल्मोड़ा) में ‘भूमि बचाओ संघर्ष समिति’ द्वारा उत्तराखण्ड राज्य की अस्मिता, प्राकृतिक संसाधनों, जल, जंगल एवं जमीनों को भू -माफिया से बचाने के लिए एक रैली का आयोजन किया गया।
गुजरात से आए एक पूंजीपति ने मन्योली (चितई) में 108 नाली जमीन बागवानी के नाम पर खरीदी। आरोप है कि उसके बाद 400 नाली बेनाप भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। अब पूरी जमीन एवं ग्रामीणों के रास्तों पर तार बाड़-करके ग्रामीणों के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रहा है और गांव में सड़क नहीं आने दे रहा है।

रैली में आए उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि ‘पूंजीपति द्वारा कब्जाई गई यह जमीन को जल्द से जल्द सरकार के पक्ष में जब्त हो और राज्य में ठोस भू-कानून लागू कर राज्य की जमीन सुरक्षित की जाए तथा साथ ही त्रिवेंद्र सरकार द्वारा कृषि भूमि की असीमित खरीद-फरोख्त की छूट देने वाला कानून अति शीघ्र निरस्त किया जाए।’ भूमि बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य दीवान सिंह ने कहा कि ये हमारी जमीनों की लड़ाई हमारी अपनी लड़ाई है, इसे हम सभी को एकजुट होकर लड़ने की आवश्यकता है।

उपपा की केंद्रीय सचिव आनंदी वर्मा ने कहा कि जिन लोगों की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है उन लोगों को लड़ाई में आगे आना चाहिए। रैली में आए विभिन्न जन संगठनों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूंजीपति द्वारा कब्जाई गई जमीन को जल्द से जल्द सरकार के पास में जब्त करने की बात कही

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