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राज्यसभा सीटों पर जीत के लिए भाजपा ने साधे सारे जातीय समीकरण

 भाजपा आलाकमान ने  राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की जो सूची जारी कि है उससे साफ़ – साफ संदेश दे दिया है। संदेश हैं – संगठन सर्वोपरि, पार्टी के प्रति समर्पण।  जातीय समीकरण भी सफलता के लिए जरूरी है। उत्तर प्रदेश में जिन लोगों को प्रत्यासी बनाया गया है ,उनमें से पांच पार्टी व संगठन के पुराने निष्ठावान हैं।

इसके साथ ही पार्टी ने जातीय संतुलन साधने के साथ बृजलाल, गीता शाक्य व बीएल वर्मा जैसे नए  चेहरों को भी मौका दिया है। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री  और  केंद्रीय कार्यालय प्रभारी अरुण सिंह के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को फिर से राज्यसभा में भेजने का फैसला लिया है।सेवानिवृत डीजीपी बृजलाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबी समाज कल्याण निर्माण निगम के अध्यक्ष बीएल वर्मा भी उम्मीदवार बनाए गए हैं। पूर्व मंत्री हरिद्वार दुबे व पूर्व विधायक सीमा द्विवेदी को राज्यसभा भेजा जा रहा है। औरैया की जुझारू नेता गीता शाक्य के जरिए नेतृत्व ने महिला व पिछड़ा कोटा पूरा करने के साथ बुंदेलखंड को भी प्रतिनिधित्व प्रदान किया है। भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारकर मतदान की जंग में सीधे नहीं उतरने का इरादा जाहिर कर दिया है। सभी प्रत्याशी आज 27 अक्टूबर को  अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

भाजपा ने  आठ उम्मीदवारों में दो ब्राह्मण  दो ओबीसी  और दो  क्षत्रिय  को उम्मीदवार बनाकर संदेश दे दिया है कि चुनावों में जीत के लिए जातीय समीकरण जरूरी है।  सीमा द्विवेदी और हरिद्वार दुबे लंबे समय से पार्टी व संगठन से जुड़े रहे। वहीं हरिद्वार दुबे भी पूर्व मंत्री व पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। ब्राह्मणों के नामों का चयन कर पार्टी ने लागातार हमलावर रहे विपक्ष को जवाब देने की कोशिश की है। वहीं हाल के दिनों में कुछ घटनाओं के कारण सुर्खियों में आए बलिया के दो बाशिंदों का चयन कर पूर्वांचल को भी संदेश देने की कोशिश की है। हरिद्वार दुबे मूलत: बलिया के निवासी हैं। वहीं क्षत्रिय नीरज शेखर के साथ हरिद्वार दुबे को उम्मीदवार बना कर पूरे पूर्वांचल में ब्राह्मण-क्षत्रिय राजनीति को साधने की कोशिश की है।

बसपा सरकार में डीजीपी रहे बृजलाल उम्मीदवारों में सबसे चौंकाने वाला नाम रहा। पार्टी के बड़े पदाधिकारी ने कहा कि उनकी सेवाकाल में कानून के प्रति निष्ठा, ईमानदारी और सेवा से निवृत्त होने के बाद पार्टी से जुड़ाव को महत्व दिया गया। पार्टी ने उन्हें वर्ष 2015 से जो भी काम दिया, उन्होंने बखूबी अंजाम दिया। विभिन्न प्रकरणों में उन्हें जांच के लिए भेजा गया। समय-समय पर दलितों को लेकर पार्टी पर हुए हमले पर वे पार्टी के लिए कवच के रूप में खड़े हुए। वे 30 नवंबर 2014 को रिटायर हुए थे और एक महीने बाद 21 जनवरी 2015 को उन्होंने भाजपा की सदस्याता  ली थी।

पार्टी ने ओबीसी समीकरण को भी साधने की पूरी कोशिश की है। बीएल वर्मा जो यूपी सिडको के अध्यक्ष थे और लोध जाति से हैं, उन्हें लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहने का लाभ दिया गया है। वहीं औरैया की गीता शाक्य को भी ओबीसी समीकरण में उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने दोनों को टिकट देकर साफ कर दिया है कि ओबीसी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण थे और रहेंगे।वहीं भाजपा ने उत्तराखंड की राज्यसभा सीट पर होने वाले चुनाव में नरेश बंसल को उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस के राजबब्बर का कार्यकाल पूरा होने पर हो रहे चुनाव में बंसल का निर्वाचन तय है।

भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा 13 अक्टूबर को की थी। इन दस सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना 20 अक्टूबर को जारी हो गई थी । प्रदेश के दस राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार नामांकन आज 27 अक्टूबर तक भरे जाएंगे। 28 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच  होगी। दो नवंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। नौ नवंबर को  मतदान होगा। उसी दिन शाम को  मतगणना होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

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