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उत्तराखण्ड सरकार देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित कर राज्य में चालीस हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावनाएं देख रही है। इसके लिए माहौल बनाया जा रहा है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री ‘डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड इन्वेस्टर्स समिट 2018’ का उद्घाटन करेंगे। कृषि, पशुपालन, उद्योग, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य, बायो टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल्स आदि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हजारों करोड़ रुपए का निवेश राज्य के आर्थिक विकास के रास्ते खोलेगा और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी मजबूती प्रदान करेगा। लेकिन विकास की आशाओं के बीच आशंकाएं भी जन्म लेने लगी हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकार ने निवेश के लिए जो सेक्टर तय किए हैं उनके लिए हजारों एकड़ भूमि कहां से लाएगी? जब राज्य में पहले से स्थापित उद्योग ही पलायन कर रहे हैं तो नए कितने दिन तक टिके रहेंगे? जब राज्य में स्लॉटर हाउस बंद हैं, तो मांस प्रसंस्करण में कौन निवेश करेगा? सरकार के लिए निवेशकों को आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती होगी

 

राज्य में करीब चालीस हजार करोड़ के निवेश और देश-विदेश के निवेशकों को निवेश का बेहतर अवसर देने के लिए सरकार अक्टूबर माह में इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट का उद्घाटन करेंगे। जिसके कारण इसके सफल होने की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। सरकार और खास तौर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत इसके लिए हर संभव जतन कर रहे हैं। सरकार, शासन और प्रशासन के अलावा तकरीबन सभी विभागों में सक्रियता दिखाई देने लगी है। जिस तरह से सरकार इस आयेजन को सफल बनाने में जुट गई है उससे लगता है कि जल्द ही राज्य में निवेशकों के लिए माहौल बन पायेगा।

‘डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड इन्वेस्टर्स समिट 2018’ की थीम पर सरकार निवेशकों के लिए एक बड़ा प्लेटफार्म तैयार कर रही है। इसके लिए वह रोड़ शो और मिनी कॉन्क्लेव का आयोजन कर चुकी है। स्वयं मुख्यमंत्री दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई, हैदराबाद तथा बैंगलुरू में रोड़ शो कर चुके हैं। इसके साथ ही फूड प्रोसेसिंग और आटोमोबाइल क्षेत्र के लिए रुद्रपुर, पर्यटन और फिल्म आदि क्षेत्र के लिए भीमताल में इन क्षेत्रों के औद्योगिक घरानों और जानकारों के साथ मिनी कॉन्क्लेव का आयोजन भी कर चुके हैं। संभवतः इस रोड़ शो और मिनी कॉन्क्लेव के दौरान निवेशकां की ओर से सरकार को कई ऐसे सुझाव मिले हैं जिसके चलते सरकार जल्द ही राज्य में ऐसे ओैद्यौगिक सेक्टरों जिनकी आज तक नीतियां तक नहीं बनाई जा सकी हैं, पर पूरा फोकस कर आगे बढ़ रही है। जिसमें आयुष के अलावा पर्यटन और अन्य सेक्टर हैं, जिनमें औद्योगिक निवेश बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

समिट के आयोजन के लिए सरकार ने दो सेक्टरों पर फोकस किया है। इनमें निवेश प्रोजेक्ट यानी इन्वेस्टिवल प्रोजेक्ट में कुल 9 सेक्टर रखे गये हैं। इनमें पहला सेक्टर टूरिज्म, हॉस्पिटेलिटी एण्ड फिल्म शूटिंग है। इसमें 9 प्रोजेक्ट हैं। इनमें सिटी का विकास और फिल्मों की शूटिंग के लिए नैनीताल, साहसिक खेलों के लिए टिहरी, उड्डयन क्षेत्र के लिए हैली सफारी, डेस्टिनेशन डेवलपमेंट में कार्बेट रिसोर्ट कोटद्वार, वेलनेस सिटी के लिए ऋषिकेश एवं ऑली, वेलनेस रिसोर्ट के लिए मर्चूला, उधमसिंह नगर, विलेज टूरिज्म के लिए तिमली, गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगम की परिसंपतियों, वीआईपी गेस्टहाउस एवं पांच सितारा रिसोर्ट के लिए ऋषिकेश और रोपवे के लिए गंगोत्री, यमुनोत्री, मसूरी, नैनीताल और केदारनाथ के प्रोजेक्ट रखे गए हैं। टिहरी झील के विकास और गांजणा, गौंरान एवं कोटी क्षेत्र में टेंट सिटी के प्रोजेक्ट तय किए गए हैं। इसी तरह से एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट एण्ड स्पोर्ट सेक्टर में 7 प्रोजेक्ट रखे गये हैं। इसमें 4 आवासीय स्कूल, एनआईएफटी, आईटीआई आईटीआई अपग्रेड, उच्च शिखरीय यानी हाई ऐल्ट्टियूट स्पोर्ट के लिए रांसी, पिथौरागढ़, शूटिग रेंज और तीरअंदाजी खेल के लिए देहरादून के प्रोजेक्ट रखे गए हैं। यह सभी प्रोजेक्ट पीपीपी मोड में चलाए जाएंगे।

नवीन ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने अपना फोकस पहली बार किया है। इसमें चीड़ की पत्तियों (पिरूल) से विद्युत उत्पादन, पवन ऊर्जा, भूमिगत ऊर्जा यानी गर्मजल सोतां से ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्रों का चयन किया गया है। रेशम एवं प्राकøतिक रेशों के सेक्टर में दो प्रोजेक्ट हैं। इसमें संभवतः भांग के रेशे को भी शामिल किया गया है। सरकार ने हाल ही में भांग की खेती के लिए नीति लागू की है। अब राज्य में रेशम के अलावा भांग पर भी जोर दिया जा सकेगा। इसी तरह से मैन्युफैक्चरिंग एंड हैवी एनर्जी के सेक्टर में दो प्रोजेक्ट हैं। जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन, कृषि यंत्र और अर्थ मूवर उत्पादन के प्रोजेक्ट हैं। सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र में सरकार ने काशीपुर में इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चरिंग के विकास के लिए इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर, स्टार्टअप एवं सिंटिग अप और रूरल विजनेस के लिए डेस्टिनेशन रूरल विजनेस प्रोजेक्ट, आउट सोर्सिगं यूनिट के प्रोजेक्ट निर्धारित किए हैं।

प्रदेश सरकार ने समिट के आयोजन के लिए सबसे ज्यादा फोकस हेल्थकेयर और आयुष के क्षेत्र में किया है। इसमें कुल 10 प्रोजेक्ट हैं। जिनमें मेडिसिटी, डाईग्नोसिस्ट, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, फूड एंड ड्रग्स टेस्टिंग, वेलनेस एण्ड आयुष सेंटर, मल्टी स्पेशिलिटी हर्वल, आयुष वेलनेस सेंटर, योग और ध्यान केंद्र, आयुष पंचकर्म होम स्टे, आयुष अस्पताल, अंतरराष्ट्रीय वेलनेस सिटी तथा पीपीपी मोड हेल्थकेयर क्लस्टर के प्रस्ताव हैं।

कृषि के क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण तथा बागवानी एवं कृषि के लिए कुल 4 प्रोजेक्ट हैं। बायो टेक्नोलॉजी एंव फार्मास्युटिकल के तीन प्रोजेक्ट और संगध पादप एवं ऐरोमा क्षेत्र के लिए लेमन ग्रास, जापानी मिंट व ऐरोमा टूरिज्म के कुल तीन प्रोजेक्ट हैं। इसी तरह से पशुपालन क्षेत्र में सरकार ने निवेशकों के लिए लाईव स्टॉक, लाईव फीड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, स्लॉटर हाउस और मांस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मीट प्रोसेंसिंग प्लांट तथा पीपीपी मोड में ब्रीडिंग फार्म के प्रोजेक्ट तय किए हैं। इन सभी सेक्टरों में सरकार को तकरीबन 20 से 40 हजार करोड़ का निवेश राज्य को मिलने की संभावनाएं हैं। यह सभी क्षेत्र राज्य में पूर्व से ही काम कर रहे हैं या इनके लिए सरकार तैयारी कर चुकी है।

इन्वेस्टर्स समिट में सरकार को उम्मीद है कि इन क्षेत्रों के प्रोजेक्टों पर राज्य को निवेश मिलेगा। इसके साथ ही आने वाले समय में उत्तराखण्ड में निवेश के लिए सरकार ने विशेष फोकस सेक्टर भी रखे हैं। जिन पर सरकार का पूरा ध्यान रहेगा और इन क्षेत्रों में निवेश के लिए माहौल तेयार किया जा सकेगा। इनमें टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी, ऑटोमोबाइल सेक्टर, नेचुरल फाइबर, फार्मास्यिटिकल्स, सूचना तकनीक, खाद्य प्रसंकरण, संगध पादप और ऐरोमा, बागवानी, फिल्म शूटिंग, फिल्म सिटी, नवीन एवं अक्षय ऊर्जा, वेलनेस आयुष और बायो टेक्नोलाजी के क्षेत्र तय किए गए हैं।

सरकार के इस आयोजन से जहां जहां एक ओर राज्य में निवेश की संभावनाएए जताई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के सामने कई बड़ी-बड़ी चुनौतियां भी हैं जिनसे पार पाना सबसे बड़ी समस्या है। सरकार द्वारा प्रचारित किया गया है कि तकरीबन 20 हजार करोड़ का निवेश राज्य को एक ही वर्ष में मिल सकता है, जबकि सरकार के तय सेक्टरां के प्रोजेक्टों में भूमि की उपलब्धता ही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आज राज्य के पास कृषि भूमि के अलावा नाम मात्र की भी भूमि शेष नहीं बची है, तो 20 हजार करोड़ के निवेश का माहौल सरकार कैसे खड़ा कर पायेगी? स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत निवेश के लिए खेती की जमीन देने से इंकार कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री राज्य में निवेश के लिए देश-विदेश में ताबड़तोड़ दौरे किये। सिंगापुर दौरे के बाद सरकार द्वारा प्रचारित किया गया कि उत्तराखण्ड में सिंगापुर बांस पर आधारित सेक्टर में निवेश करना चाहता है। पूर्व में सिंगापुर का प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकार को उच्च गुणवत्ता वाले बांस के उत्पादन लिए प्रस्ताव भी दे चुका है। जिसमें 50 हजार एकड़ भूमि का प्रस्ताव भी शामिल है। माना जा रहा है कि केवल सिंगापुर से ही प्रदेश को बांस उद्योग से तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश मिलने की संभावनाएं हैं। लेकिन इसमें सबसे बड़ा पेंच भूमि की उपलब्धता का फंसा हुआ है। भले ही सरकार ने इसके लिए वन, कृषि और बांस बोर्ड़ को प्रस्ताव के अनुरूप तैयारी करने के आदेश दिए हैं। लेकिन इतना तय है कि राज्य में हजारां एकड़ भूमि किसी भी सूरत में नहीं मिल सकती। भले ही केन्द्र सरकार द्वारा बांस उद्योग को वन उपज से हटाकर कृषि उपज में शामिल कर दिया गया हो।

जानकारां की मानें तो केंद्र सरकार के बांस उद्योग को लेकर किए गए बदलाव के बाद राज्य में बांस की खेती को कानूनी जामा पहनाया जा सकेगा। लेकिन इसके दुष्परिणाम जल्द ही सामने आ सकते हैं कि राज्य में जहां पहले ही महज 30 फीसदी कृषि भूमि है, वह तेजी से बांस की ख्ेती के नाम पर बलिदान हो सकती है। इसके अलावा मेडिसिटी, डाईग्नोसिस्ट, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, फूड एण्ड ड्रग्स टेस्टिंग, वेलनेस एण्ड आयुष सेंटर, मल्टी स्पेशिलिटी हर्बल आयुष वेलनेस सेंटर, योग और ध्यान केंद्र, आयुष पंचकर्म होम स्टे, आयुष अस्पताल, अंतरराष्ट्रीय वेलनेस सिटी जैसे सेक्टरों के प्रोजेक्टों में सबसे ज्यादा भूमि की उपलब्धता का पेंच फंसना तय है।

सरकार ने भविष्य में जिन क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं जताई हैं उनमें टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी, आटोमोबाइल सेक्टर, नेचुरल फाइबर, फार्मास्यिटिकल्स, सूचना तकनीक, खाद्य प्रसंकरण, संगध पादप और ऐरोमा, बागवानी, फिल्म शूटिंग एवं फिल्म सिटी, नवीन अक्षय ऊर्जा, वेलनेस आयुष और बायो टेक्नोलाजी के क्षेत्र हैं। इनके निवेश में भी भूमि ही सबसे बड़ा पेंच रहेगा। अब प्रदेश में भूमि की उपलब्धता की बात करें तो स्वयं सरकार के आंकड़े बताते हैं कि सरकार के पास सिड़कुल के माध्यम से महज 900 एकड़ ही भूमि शेष बची है। सरकार के पास जितने भी प्रस्ताव आए हैं उनको देखते हुए नहीं लगता कि सरकार उन सभी क्षेत्रां के प्रोजेक्टों को भूमि उपलब्ध करवा पाएगी। यहां तक कि पूर्व घोषित औद्योगिक कॉरिडोर पर सरकार कोई काम तक नहीं कर पाई है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय छुटमलपुर और देहरादून के बीच औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास किया जा चुका है। लेकिन अभी तक सरकार इसके लिए जमीन तक नहीं खोज पाई है। साफ है कि इस क्षेत्र में केवल खेती की ही भूमि है जिस पर तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारें औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करेंगी।

इसके अलावा स्वयं सरकार की राजनीतिक नीति के चलते कई गंभीर सवाल निवेशकां के सामने खड़े हो सकते हैं। इससे निवेश प्रभावित हो सकता है। निवेशकां को लुभाने के लिए सरकार ने पशुपालन सेक्टर खोला है। प्रदेश में मांस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट तय किए गए हैं। इस सेक्टर के प्रोजेक्ट में स्लॉटर हाउस, मांस प्रसंस्करण के प्रोजेक्ट रखे गए हैं, जबकि सरकार द्वारा हाल ही में हरिद्वार जनपद में स्लॉस्टर हाउस के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। सरकार ने यह तय किया है कि देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखण्ड राज्य में स्लॉटर हाउस का निर्माण नहीं किया जाएगा। अब सवाल यह है कि किस आधार पर सरकार राज्य में मांस उद्योग के प्रोजेक्ट तय कर रही है? कैसे इस सेक्टर के निवेशकों को आकर्षित करेगी?

कुछ ऐसे भी सवाल हैं जिनसे राज्य में निवेश की संभावनाओं पर कुहासा छा सकता है। मसलन पूर्व में स्थापित उद्योगों का राज्य से बड़ी तेजी से पलायन हुआ। इसका कारण राज्य में अफसरशाही और लालफीताशाही को माना जा रहा है। एक अनुमान के मुताविक तकरीबन 800 उद्योग राज्य से या तो पलायन कर चुके हैं या बंद हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की नीतियां और पर्यावरण के कारण बताये जा रहे हैं। अभी हाल ही में राज्य प्रदूषण बोर्ड द्वारा सैकड़ों कारखानों को नेटिस जारी किया गया है। इनमें कइयां पर कार्यवाही होना तय माना जा रहा है। इसके चलते राज्य में होने वाले निवेश पर संकट के बादल छाने की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।

राज्य सरकार और खास तौर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत 7 ओैर 8 अक्टूबर को देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट कालेज में आयोजित ऐतिहासिक ‘डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड इन्वेस्टर समिट’ को लेकर खासे उत्साहित हैं। तय माना जा रहा है कि अगर 20 से 40 हजार करोड़ के संभावित निवेश में से राज्य को 25 फीसदी भी मिल पाया तो उत्तराखण्ड के लिए बहुत बड़ा अवसर होगा। साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के लिए भी यह अवसर राजनीतिक कामयाबी लेकर आएगा। इससे मुख्यमंत्री की ताकत में इजाफा तो होगा। साथ ही उत्तर प्रदेश के साथ निवेश की तुलना में उत्तराखण्ड अपने नम्बर बढ़ा सकेगा। इसके आसार दिखाई देने लगे हैं। सरकार की बेबसाइट में अभी तक 300 निवेशकों द्वारा पंजीकरण करवाया जा चुका है। अब सरकार पर निर्भर है कि निवेशकों को कैसे सुविधाएं देकर आकर्षित करेगी।

 

डबल इंजन ने पकड़ी रफ्तार

डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड इन्वेस्टर समिट 2018 के आयोजन से पूर्व ही सरकार को हजारों करोड़ों के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रस्ताव ऊर्जा के क्षेत्र में मिले हैं। अनुमान के मुताबिक लघु जल विद्युत, सोलर एनर्जी और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तकरीबन 20 हजार करोड़ के निवेश होने के आसार हैं।

विश्व की विख्यात और अमेरिका की बड़ी ऊर्जा कम्पनी एज्यूर पॉवर 21 हजार करोड़ का निवेश करने के लिए तैयार है। जिसमें बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं में 10 हजार करोड़ लघु जल विद्युत परियेजनाओं में 12 सौ करोड़ और 3 हजार करोड़ का निवेश सोलर पावर पैनल बनाने वाले कारखानों के साथ मिल कर जलाशयों और बांधों पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने में करेगी। चीनी मिलों के बगास और पिरूल से बिजली उत्पादन और रूफ टॉप सोलर प्लांट पर कुल 32 सौ करोड़ का निवेश किया जाएगा। इस पर कंपनी सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर चुकी है। इसके अलावा अडानी ग्रुप और अन्य कंपनियों से 15 सौ करोड़ के निवेश पर सहमति और प्रस्ताव सरकार को मिल चुके हैं।

अडानी ग्रुप 1 हजार करोड़ पावर ट्रान्समिशन, नोर्डिक ऐनर्जी 50 करोड़ को सोलर पार्क का निर्माण, गुजरात के अहमदाबाद की कंपनी मोब्या कंसलटेंसी अल्मोड़ा में 350 करोड़ के निवेश से 100 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाए जाने पर अपनी सहमति सरकार को दे चुकी है। गुजरात की एक और कंपनी नेसार प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 150 करोड़ की लागत से ग्रीन हाउस का निर्माण और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया राज्य के जलाशयों और बांधों पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट में 9 सौ करोड़ पूंजी निवेश का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया है। उत्तराखण्ड में पहला सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शीशमबाड़ा देहरादून में कूडे़ से बिजली बनाने के लिए रैमकी कंपनी ने 120 करोड़ के पूंजी निवेश का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।

कøषि और बागवानी के क्षेत्र में भी करोड़ों के प्रस्ताव सरकार को मिल चुके हैं। इनमें फूड प्रोसेसिंग सैक्टर में 900 करोड़ के निवेश पर कंपनियों के साथ सहमति बन चुकी है। गुजरात की बालाजी बेकर्स 500 करोड़ का निवेश के तेयार है। मुंबई की ऋद्धि-सिद्धि कंपनी प्रदेश में मक्का से स्टार्च बनाने की सबसे बड़ी ईकाई लगाने को तैयार है। इसके लिये 150 करोड़ के निवेश का एमओयू पर हस्ताक्षर किया जा चुका है। इस उद्योग में कंपनी प्रति वर्ष 8 लाख टन मक्का किसानों से खरीदेगी। जिसमें 4 लाख टन मक्का उत्तराखण्ड के किसानों से खरीदा जाएगा।

पर्यटन के क्षेत्र में सरकार को कई कंपनियों से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। जिसमें टूरिस्ट डेस्टिनेशन और ईको टूरिज्म के सैक्टर में सबसे ज्यादा निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। रिलांयस समूह उत्तराखण्ड के कुछ क्षेत्रों को स्विटजरलैंड की तरह विकसित करने पर अपनी सहमति सरकार को दे चुका है। साथ प्रदेश में आप्टिकल फाईबर का काम भी रिलांयस कंपनी करेगी। आयेजन से पूर्व ही जिस तरह से सरकार को करोड़ां के प्रस्ताव मिले हैं और कई एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, उससे सरकार खास तौर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खासे उत्साहित हैं।

 

 

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