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जाकिर हुसैन के तबले की धुन पर दुनिया कहती है ‘वाह उस्ताद’

तबले की धुन पर सबको नाचने पर मजबूर कर वाले जाकिर हुसैन का आज जन्मदिवस है। जाकिर हुसैन ने संगीत के क्षेत्र में जो योगदान दिया है उसके लिए उन्हें आने वाली सदियों तक याद रखा जाएगा। 69 साल के हो चुके जाकिर हुसैन आज भी संगीत जगत में सक्रिय हैं। जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च, 1951 में हुआ था।  जाकिर हुसैन तबला वादक उस्ताद अल्ला रखा के बेटे हैं। अल्ला रखा भी तबला बजाने में बहुत माहिर थे। जाकिर हुसैन का बचपन मुंबई में ही बीता।

12 साल की उम्र से ही जाकिर हुसैन ने संगीत की दुनिया में अपने तबले की आवाज को बिखेरना शुरू कर दिया था। जाकिर हुसैन भारत में तो बहुत ही प्रसिद्ध हैं ही साथ ही विश्व के विभिन्न हिस्सों में भी समान रुप से लोकप्रिय हैं। 1970 में अमेरिका में उन्होंने एक साल के भीतर लगभग डेढ़ सौ शोज कर तहलका मचा दिया था। अपने इस हुनर के लिए जाकिर हुसैन को कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले है। 1988 में जब उन्हें पद्मश्री का पुरस्कार मिला था। तब वह 37 वर्ष के थे। इस उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति भी जाकिर हुसैन ही थे।

इसके बाद 2002 में संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उनको पद्म भूषण का पुरस्कार भी मिला था। जाकिर हुसैन को 1992 और 2009 में संगीत का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रेमी अवार्ड भी मिला है। संगीत एक कला ही नहीं बल्कि एक साधना भी है। उनके कार्यक्रमों के कई ऐल्बम और साउंड ट्रैक तैयार किए गए।

अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में उन्हें चौतरफा मान्यता मिली। उन्होंने कई ऐतिहासिक अवसरों पर संगीत रचना भी की। जाकिर ने 1996 के अटलांटा ओलिम्पिक खेलों के उद्घाटन के मौके पर बजाए गए संगीत की रचना भी की। 1998 में सैन फ्रांसिस्को में हुए प्रतिष्ठित ‘जाज फेस्टिवल’ के उद्घाटन समारोह का संगीत भी उस्ताद जाकिर ने तैयार किया था। जाकिर को संगीतनाटक अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। अमेरिकी सरकार ने भी कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें 1990 में ‘इंडो-अमेरिकी सम्मान’ से नवाजा।

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