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सरदार पटेल जिन्होंने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया

आजादी के बाद 560 से ज्यादा देशी रियासतों के भारत में विलय कराने में सरदार पटेल की भूमिका अहम रही। आज सरदार पटेल की जयंती है जिनका जम्मू-कश्मीर को भारत में विलय कराने में अहम किरदार रहा है और आजाद हिंदुस्तान के 72 साल के इतिहास में आज ऐतिहासिक दिन है। सरदार पटेल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा आजाद भारत के पहले गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका महत्वपूर्ण योगदान था, जिसके कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। देश का स्वर्ग कहे जाने वाले  जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आज ही के दिन नए केंद्र शासित प्रदेश बने हैं। भारत सरकार के द्वारा 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 निष्क्रिय करने के बाद आज यानी 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं। वो दौर कुछ ऐसा था जब आजादी से पहले हमारा देश छोटे-छोटे 562 देशी रियासतों में बंटा था। वे सरदार पटेल ही थे जो इन छोटे रियासतों का विलय करवा भारत को एकता के सुत्र में पिरोया था। इस काम को करना कोई आसान काम नहीं था। सरदार पटेल को इस काम को करने में काफी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। उन्होंने एक के बाद एक रियासत को एक साथ लाने के लिए अपनी सारी बुद्धि और अनुभव का इस्तेमाल किया। भारत को एक राष्ट्र बनाने में वल्लभ भाई पटेल की खास भूमिका है।

काम करने में तो मजा ही तब आता है, जब उसमें मुसीबत होती है, मुसीबत में काम करना बहादुरों का काम होता है, मर्दों का काम होता है, कायर तो मुसीबतों से डरते हैं, लेकिन हम कायर नहीं हैं, हमें मुसीबतों से डरना नहीं चाहिये।’- सरदार पटेल

प्रतिभा के धनी सरदार पटेल के विचार आज भी लाखों युवाओं को प्रेरणा देते हैं।  ऐसी ही प्रेरणा थी कि वो कहते थे  मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए। लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा। कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा।अगर हम आज ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ के भेदभावों को समाप्त कर दे तो मानवता पर विश्वास बना रहेंगा। सरदार पटेल ने देश की 564 रियासतों को एकता के सूत्र में बांध कर अखंड भारत की रचना की थी। उन्होंने 1917 से 1924 तक अहमदनगर के पहले भारतीय निगम आयुक्त के रूप में भी सेवा दी। 1924 से 1928 तक वह इसके निर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सर्विस की नींव भी रखी। उन्हें 1991 में भरत रत्न से सम्मानित किया गया। फिर 15 दिसंबर, 1950 का वो दिन, जब 75 साल की उम्र में पटेल दुनिया को अलविदा कह गए।

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