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The Sunday Post Special

लॉक डाउन के बीच इन युवाओं ने पेश की मिसाल

 

आपने एक न्यूज़ चैनल पर दिल्ली में 22 वर्षीय महक और उसकी नवजात बच्ची की ख़बर को जरूर देखा होगा। लॉक डाउन में टिन के नीचे खुले में ही महक को शिशु को जन्म देना पड़ा। अभावों की वजह से वह अस्पताल भी नहीं जा सकी। मजदूरी करके किसी तरह अपना जीवन यापन करने वाला यह परिवार इन दिनों न तो दूध और न ही पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पा रहा है।
ऐसे में ख़बर देख कर कुछ नौजवानों ने तत्काल उनकी मदद के लिए गाड़ी से सिर्फ दूध ही नहीं बल्कि उनके लिए घी की भी व्यवस्था की।
ये वो नौजवान हैं जो सिर्फ महक की नहीं बल्कि महक जैसे न जाने कितने जरूरत मंद लोगों के लिए प्रतिदिन दूध मुहैया करा रहे हैं।
दिल्ली एनसीआर में ही नहीं बल्कि इसके आसपास के इलाकों में भी इनकी टीम पूरी तन्मयता से यह कार्य कर रही है।

महान विचारक विनोबा भावे ने कहा था कि सेवा के लिए पैसे की जरूरत नहीं होती, जरूरत है अपना संकुचित जीवन छोड़ने की, गरीबों से एकरूप होने की।

इसी संदर्भ में ‘दि संडे पोस्ट’ ने इस टीम के सदस्य ‘विकास बाबा’ से बात की और जानने की कोशिश की कि कैसे वह इतनी संख्या में लोगों की मदद कर रहे हैं और सबसे जरूरी आहार उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रस्तुत है बातचीत का कुछ अंश:

विकास आप अपना पूरा परिचय बताइए?
विकास : मेरा नाम विकास है, कुछ साथी लोग प्रेम में बाबा बुलाकर संबोधन करते हैं। शामली के पास का रहने वाला हूँ। फिलहाल देश के विभिन्न भाग में भ्रमण कर सेवा कार्य करने का प्रयास कर रहा हूँ। हरियाणा में लम्बे समय तक रहा हूँ। बस फिलहाल दिल्ली में रहकर सेवा का यह कार्य चल रहा है।

विकास, आप जीवन यापन के लिए इसके अलावा क्या करते हैं?
विकास : क्या कहूँ, बस इतना कहूंगा कि विकास की खोज कर रहा हूँ और सेवा ही एकमात्र कार्य है फिलहाल।

हम आपसे जानना चाहते हैं कि महक की मदद के लिए आप कैसे पहुंचे वहां?
विकास: मैं, न्यूज़ चैनल कम ही देखता हूँ। पर उस दिन अचानक मेरे सोशल मीडिया पर शायद व्हाट्सएप पर यह ख़बर आयी। मैंने लोकेशन देखा तो आनन्द बिहार बस स्टेशन के पास ही ये परिवार हैं तो हमने अपने साथी को फोन किया। वे वहां एक गाड़ी की मदद से उसमें उपलब्ध कई लीटर दूध और घी लेकर उन तक मदद के लिए पहुंचे।

यह दूध जो आप लोग इतनी बड़ी मात्रा में लोगों तक पहुंचाते हैं यह कहा ने उपलब्ध होता है?

विकास : यह वे ग्वाले हैं जो राजस्थान, गुजरात, हरियाणा के लोग हैं और अपने

साथ गायों को लेकर विचरण करते हैं। इनमें किसी के पास 50 गाय, या इससे अधिक भी गाय होते हैं।  इनकी मान्यता है कि हमारी यह परंपरा भगवान कृष्ण की परंपरा से चली आ रही हैं। जहां पशुओं की सेवा की जाती है। और ऐसा माना भी जाता है कि ये पशु जहां जाते हैं उसे पवित्र कर देते हैं।

विकास आगे कहते हैं कि,
देखिए, मान्यतायें अपनी जगह हैं पर आप इसका वैज्ञानिक कारण भी देखिये , इनके गोबरों से भूमि और भी उर्वरक होती है।

लेकिन इन विचरण कर रहे चरवाहों के समुदाय के सामने एक बड़ी समस्या भी है। अब लॉक डाउन के चलते इनकी गायों का दूध कोई खरीद नहीं रहा। पहले 35-40 रुपये प्रति किलो इनके दूध बड़ी बड़ी दूध विक्रेता कम्पनियों, मीठा बनाने वाली दुकानों पर बिक जाता था। पर अब कोई 20 रुपये किलो भी लेने को तैयार नहीं है।

लॉक डाउन के पहले शहर के पास यह ठहरते थे पर इनके दूध तो बिक जाते थे लेकिन घास के मैदान और चारा न होने की वजह से इनकी पशुओं को भूखा रहना पड़ता है। इसलिए अब यह शहर की तरफ भी रुख नहीं कर पाते।

हमने कोशिश की अपने मित्रों की सहायता से कि इनके द्वारा उपलब्ध दूध को लेकर जरूरत मंद लोगों को दिया जाए।

आप लोग निश्चित तौर पर बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। आप और आपकी टीम बधाई के पात्र है।

विकास : यदि सरकारें इनका ख़्याल रखें तो प्रकृति की यह प्रक्रिया कभी समाप्त न हो।और स्वतः ही गाय का वैभव, किसान की समृद्धि और सभी के लिए पौष्टिक आहार अपने आप पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाएगा और पर्यावरण संकट भी समाप्त हो जाएगा।

विकास बाबा, कहते हैं कि इस सेवा कार्य में वे अकेले नहीं है बल्कि वे तो कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथी राजन मदान,विजय, कृष्णा, मृणाल, सुप्रिया और भी साथी है जो पूरी सेवा भाव से अपने इस कर्तव्य को निभा रहे हैं।

विकास ने हमसे एक जानकारी भी साझा की है।जो निम्नलिखित उपलब्ध है:

मजबूर/मजदूर/सफाईकर्मी/ चिकित्साकर्मी/ पुलिसकर्मियों विशेषकर बच्चों के लिए शुद्ध दूध/ लस्सी आपके द्वार ;
करोना लाक्डाउन में ग़ाज़ियाबाद दिल्ली के आस पास आम जनमानस विशेषत: गरीब वर्ग व सड़कों पर फंसे लाखों प्रवासी लोगों को देशी गायों का शुद्ध दूध 22 मार्च से निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह दूध बड़ी कम्पनियों का नहीं बल्कि हज़ारों वर्षों से प्रकृति पूरक मानवीय परम्परा को जीवंत रखते हुए भारतीय गौवंश का संरक्षण करने वाले ग्वालों और उनके सहयोगियों द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस कार्य से ना केवल ज़रूरतमंद लोगों को शुद्ध दूध मिल रहा है बल्कि इस समय जब प्रशासन ने एक दम रोक लगा दी है, इन ग्वालों का भी परिवार संकट में है और चारे की कमी से हमारा भारतीय गौवंश भी बदहाल है ।

जो भी साथी इस पावन पुनीत कार्य में जैसा भी योगदान करना चाहें उनका आभार के साथ स्वागत है।

सम्पर्क सूत्र: विकास: 9999998647, राजन मदान: 9501230012, विनीत: 7838750930, सौरभ पाण्डेय: 8736983335, हीरामणि: 9012556254

फिलहाल कोरोना के इस भयानक संकट के बीच अपना योगदान निभाते हुए विकास की इस टीम ने हम सबके लिए मानवता की मिसाल पेश की है।

पूरा विश्व इस वक्त कोरोना वायरस से होने वाली महामारी के संकट से जूझ रहा है। तमाम साधनों के साथ-साथ कुछ और है जो इस संकट से हमें जल्द बाहर निकाल सकता है। वह है हमारी एकजुटता और सेवा ।

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