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जयंती विशेष:आधुनिक हिंदी निर्माताओं में से एक थे प्रताप नारायण मिश्र 

आधुनिक हिंदी निर्माताओं में से एक प्रताप नारायण मिश्र की आज जयंती है।  प्रताप नारायण मिश्र को आधुनिक हिन्दी निर्माताओं में से एक माना जाता है। वे हिन्दी खड़ी बोली और भारतेन्दु युग के उन्नायक कहे जाते हैं। प्रताप नारायण मिश्र ने एक लेखक, कवि और पत्रकार के रूप में विशेष प्रसिद्धि पाई थी। मिश्र जी की भारतेन्दु हरिश्चन्द्र में अनन्य श्रद्धा थी। वह स्वयं को उनका शिष्य कहते थे तथा देवता के समान उनका स्मरण करते थे। भारतेन्दु जैसी रचना शैली, विषयवस्तु और भाषागत विशेषताओं के कारण ही प्रताप नारायण मिश्र को ‘प्रतिभारतेन्दु’ या ‘द्वितीयचन्द्र’ आदि कहा जाने लगा था।

देश-प्रेम, समाज-सुधार एवं साधारण मनोरंजन आदि उनके निबंधों के मुख्य विषय थे। उन्होंने ‘ब्राह्मण’ नामक मासिक पत्र में हर प्रकार के विषयों पर निबंध लिखे थे। इनके पिता संकटाप्रसाद एक जयोतिषी थे और इसी विद्या के माध्‍यम से वे कानपुर में आकर बसे थे। पिता ने प्रताप नारायण को भी ज्‍योतिष की शिक्षा देनी चाही, पर इनका मन उसमें नहीं रम सका। अंग्रेजी शिक्षा के लिए इन्‍होंने स्‍कूल में प्रवेश लिया, किन्‍तु उनका मन अध्‍ययन में भी नहीं लगा। यद्यपि इन्‍होंने मन लगाकर किसी भी भाषा का अध्‍ययन नहीं किया, तथापि इन्हें हिन्‍दी , उर्दू, फारसी, संस्‍कृत और बँगला का अच्‍छा ज्ञान हो गया था। एक बार ईश्‍वरचन्‍द्र विद्यासागर इनसे मिलनेे आये तो इन्‍होंने उनके साथ पूरी बातचीत बँगला भाषा में ही की।

मिश्र जी ने व्यंग्यात्मक शैली में अपने हास्य और व्यंग्यपूर्ण निबंध लिखे हैं। यह शैली मिश्र जी की प्रतिनिधि शैली है, जो सर्वथा उनके अनुकूल है। वे हास्य और मनोरंजन प्रिय व्यक्ति थे। अतः प्रत्येक विषय का प्रतिपादन हास्य और मनोरंजन से करते थे। हास्य और विनोद के साथ-साथ इस शैली में व्यंग्य के दर्शन होते हैं। विषय के अनुसार व्यंग्य कहीं-कहीं बड़ा तीखा और मार्मिक हो गया है। इस शैली में भाषा सरल, सरस और प्रवाहमयी है। उसमें उर्दू, फ़ारसी, अंग्रेज़ी और ग्रामीण शब्दों का प्रयोग हुआ है। लोकोक्तियाँ और मुहावरों के कारण यह शैली अधिक प्रभावपूर्ण हो गई है।1892 के अंत में वह गंभीर रूप से बीमार पड़े और लगातार डेढ़ वर्षों तक बीमार ही रहे। अंत में 38 वर्ष की अवस्था में 6 जुलाई, 1894 को इनकी मृत्यु हो गई।

निबन्‍ध – संग्रह- प्रताप पीयूष, निबन्‍ध नवनीत, प्रताप समीक्षा,

नाटक- कलि प्रभाव, हठी हम्‍मीर, गौ-संकट

रूपक- कलि-कोैतुक , भारत-दुर्दशा
प्रहसन- ज्‍वारी-खुआरी, समझदार की मौत
काव्‍य- मन की लहर, श्रृंगार-विलास, लोकोक्ति-शतक, प्रेम-पुष्‍पावली, दंगल खण्‍ड, तृप्‍यन्‍ताम्, ब्राडला-स्‍वागत, मानस विनोद, शैव-सर्वस्‍व, प्रताप-लहरी
संग्रह- प्रताप-संग्रह, रसखान-शतक
सम्‍पादन- ब्राह्मण एवं हिन्‍दुस्‍तान

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