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जयंती विशेष: ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति थे मोरारजी देसाई

जयंती विशेष: 'निशान-ए-पाकिस्तान' से सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति थे मोरारजी देसाई

महान स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार का नेतृत्व किया था। देश के छठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के कांग्रेस में रहते समय श्रीमती इंदिरा गांधी से उनके हमेशा वैचारिक मतभेद रहे। श्रीमती इंदिरा गांधी को मोरारजी देसाई ‘गूंगी गुड़िया’ कहा करते थे। मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी, 1896 को गुजरात के भदेली में हुआ था। भारत सरकार में उन्होंने गृह, वित्त जैसे अहम मंत्रालय भी संभाले। साथ ही वे देश के उप-प्रधानमंत्री भी रहे।

वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हे भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से और पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान-ए-पकिस्तान’ से सम्मानित किया गया था। मोरारजी देसाई ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। वे गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव निर्वाचित हुए। अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की शाखा स्थापित कर सरदार पटेल के निर्देश पर वे उसके अध्यक्ष बन गए। मोरारजी को 1932 में 2 वर्ष की जेल भी भुगतनी पड़ी। इन्हें बंबई (अब मुंबई) का मुख्यमंत्री भी बनाया गया।

इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर मोरारजी को 1967 में उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बनाया गया। उन्होंने अपने कॉलेज जीवन में ही महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक और अन्य कांग्रेसी नेताओं के भाषणों को सुना था जिसका उनके जीवन पर काफी प्रभाव रहा। मोरारजी देसाई एक गांधीवादी विचारधारा के राजनेता थे। वे इंदिरा गांधी की सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। सरकारी नौकरी को छोड़ कर भारत की स्वतंत्रता लड़ाई में हिस्सा लिया और सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लिया। 1930 में, देसाई जी, स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान तीन बार जेल गए।

इसके बाद उन्होंने गुजरात में भारतीय युवा कांग्रेस का गठन किया। देसाई जी को सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इस युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। देसाई जी कट्टर गांधीवादी नेता और उच्चचरित्र का पालन करने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने उस वक्त फिल्मों में होने वाले अभद्र चित्रण का भी विरोध किया।  कहा जाता है कि मोरारजी देसाई ने लंबे वक्त तक स्वमूत्रपान किया था। साथ ही वे इसके फायदों की वकालत भी करते थे। ऐसा वे रोगों से बचाव के लिए करते थे।

वे यह भी कहा करते थे कि लाखों भारतीयों के लिये यह एकदम सही दवा का मिश्रण है। खासकर ऐसे लोगों के लिए जो अपने इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। हालांकि, मोरारजी देसाई की बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं थे। लेकिन मोरारजी देसाई की लंबी उम्र को देखकर लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि मोरारजी देसाई की लंबी उम्र का राज उनका यही नुस्खा था। 10 अप्रैल, 1995 को मोरारजी देसाई का निधन मुंबई में हुआ था।

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