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The Sunday Post Special

‘जनरल खण्डूड़ी के विजन को आगे बढ़ा रहा हूं’

पौड़ी लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मनीष खण्डूड़ी पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खण्डूड़ी के पुत्र हैं। आईटी और पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। विदेशी चैनल सीएनएन और फेसबुक में काम कर चुके हैं। फेसबुक में न्यूज पार्टनर का जॉब छोड़कर राजनीति में अपना भाग्य आजमाने वाले मनीष खण्डूड़ी उत्तराखण्ड में जन्मे हैं। अमेरिका से एमबीए करने के बाद तकरीबन 10 वर्षों तक आर्थिक पत्रकारिता से जुड़े रहे। अपने पिता बीसी खण्डूड़ी की तरह बेबाक भी हैं। कई चुनावों का पर्दे के पीछे से संचालन कर चुके हैं। वर्तमान में पौड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वे बीसी खण्डूड़ी की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा जताकर जनता और मतदाताओं के बीच जा रहे हैं। चुनाव प्रचार के बीच मनीष खण्डूड़ी से ‘दि संडे पोस्ट’ के विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार की बातचीत :
राजनीति में आपका अचानक आगमन कैसे हुआ?
अचानक आगमन नहीं हुआ। लोग भूल जाते हैं कि मैं अपने पिताश्री बीसी खण्डूड़ी जी के साथ रहा हूं। मैंने उनके हर चुनाव में पूरा काम किया है। यह बात अलग है कि मैं कभी चुनाव में सामने नहीं आया, लेकिन रणनीति क्या है, और कैसे संचालित होती है, मैं इसका लम्बा अनुभव रखता हूं। 2008 से मैं उनके साथ हर चुनाव में सक्रिय रहा हूं। आप यह मान सकते हैं कि मैं पहला चुनाव लड़ रहा हूं, लेकिन यह मेरा पहला चुनाव नहीं है। सीधे-सीधे कहूं तो हर चुनाव बूथ लेवल पर आते हैं। तो आप समझ सकते हैं कि मैं क्या कह रहा हूं।
आपके पिता बीसी खण्डूड़ी भाजपा के अग्रणी नेता रहे हैं। वे भाजपा की विचारधारा से बहुत मजबूती से जुड़े हैं। आप कांग्रेस से कैसे जुड़े?
मैं भाजपा में कभी भी नहीं रहा हूं और न कभी भाजपा की विचारधारा से जुड़ा रहा। मैं किसी भी राजनीतिक दल से किसी प्रकार जुड़ा नहीं रहा। कांग्रेस में मैं इसलिए जुड़ा कि अपने को कांग्रेस की विचारधारा के नजदीक पाता हूं। मुझे लगता है कि कांग्रेस की ही विचारधारा पूरे देश को एकजुट रख सकती है। कांग्रेस जोड़ती है, तोड़ती नहीं है। इसीलिए मैं शुरू से कांग्रेस से प्रभावित रहा हूं।
आप अपने पिता की उपलब्धियों और राजनीतिक विरासत को संभालने का दावा कर रहे हैं। खण्डूड़ी जी की एक सोच थी। आपकी क्या सोच है, क्या रोड मैप है, खासतौर पर उत्तराखण्ड के परिपेक्ष्य में?
मेरा ये मानना है कि मेरा जो निजी क्षेत्र का बड़ा अनुभव है, उसका फायदा मैं उत्तराखण्ड को देना चाहता हूं। मैं समाज सेवा से जुड़ा हूं और अनेक लोगों को इसका फायदा भी मिला है। मेरी सोच थोड़ा अलग है। मैं आपको उदाहरण देता हूं। लोग कहते हैं कि पलायन हो रहा है। लोग पहाड़ छोड़ रहे हैं। मैं समझता हूं कि पलायन संस्थानों का हो रहा है। आज अस्पताल नहीं हैं।  शिक्षा नहीं है। अधिकारी नहीं हैं। जब तक इनका पलायन नहीं रुकेगा तब तक हम मनुष्यों को नहीं रोक सकते। यह मूल कारण है। अगर आप मूल कारणों को खोज पाएं तभी आप कुछ कर पाएंगे।
रोजगार एक बड़ा मुद्दा है। इसको लेकर सबसे ज्यादा पलायन हुआ है। इसके लिए आपका रोडमैप क्या कहता है?
मैंने कहा न कि संस्थानों का पलायन रोकना है। व्यापार तक का पलायन हो रहा है। मेरा अनुभव प्राइवेट सेक्टर और आईटी का है। प्राइवेट सेक्टर में ही रोजगार है। सरकारी सेक्टरों में नौकरियां सीमित हैं। मेरा अनुभव आर्थिक पत्रकारिता और उद्योग जगत से रहा है। मैं इतना जानता हूं कि कम से कम प्रजेंटेशन तो होना ही चाहिए। आज देखता हूं कि राजनीति या प्रशासनिक सभी उद्योग, व्यापार के लिए प्रजेंटेशन तक नहीं दे पा रहे हैं। मैं यह तो नहीं कहता कि मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा, लेकिन अपने अनुभव से एक माहौल तो बना ही सकता हूं। किस तरह काम करना है, किस तरह उनको यहां लाना है, यह मैं जानता हूं।
कांग्रेस के घोषण पत्र में बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, ऐसे वादे किए हैं जिनका पूरा होना ही एक संशय है, आप आर्थिक जानकार हैं। क्या ये वादे और दावे पूरे हो सकते हैं?
मैंने अभी-अभी कांग्रेस ज्वाइन की है। मेरा मानना है कि घोषणा पत्र एक विजन, एक सपना होता है। हिन्दुस्तान भी एक विजन है, एक सपना है। यह आपको एक डायरेक्शन देता है। मैं कहूं कि मैं पांच साल के सब कुछ कर दूंगा तो यह तो सरासर झूठ है। कांग्रेस का घोषणा पत्र मैं सही मानता हूं।
आपके पिता जी कहा करते हैं कि जनता को कामचोर बनाया जा रहा है। छूट देकर हम लोगों को निकम्मा बना रहे हैं। कांग्रेस तो यही कर रही है। घोषणा पत्र में छूट, आय और कई तरह की बातें की गई हैं। आपके लिए यह विरोधाभाष नहीं हैं?
कांग्रेस की डिक्लियरेशन को आप पढ़ेंगे तो देखेंगे कि समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने की बात है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप हर तरह की छूट दें। उत्तराखण्ड के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र बहुत अच्छा है। हमारे प्रदेश के गरीब पिछड़ों के पास पैसा नहीं है। 6 हजार रुपया देना मैं समझता हूं कि बहुत ही सोच-समझकर बैलेंसिंग घोषणा की गई। कोई आपको कह दे कि 15 लाख आपके एकांट में डाल देंगे तो यह एक ख्याली पुलाव ही है।
कांग्रेस पार्टी धारा 129ए, राष्ट्रद्रोह और आफ्सपा कानून को समाप्त करने की घोषणा कर रही है। जबकि उत्तराखण्ड सैन्य बाहुल्य है। अब आप इसको कैसे डिफेंस करेंगे?
आप अगर असली मुद्दों पर लड़ें तो देखेंगे कि कांग्रेस पार्टी ही सही काम कर रही है। वन रैंक वन पेंशन पर कांग्रेस बात कर रही है। पैरा मिलिट्री फोर्स के लिए हमारी मांग है। उत्तराखण्ड में पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानें की हालत और भी खराब है। उनको रिटायरमेंट के बाद कोई सुविधा नहीं है। मुझे दुख होता है कि जिस जवान ने देश की सीमाओं की रक्षा की हो वह रिटायरमेंट के बाद पांच दस हजार की नौकरी उपनल में कर रहा है। सुरक्षा गार्ड बना हुआ है। हम उनकी बात कर रहे हैं। यही असली मुद्दा है। जबकि यह सरकार सेना के साथ खड़े होने की बात कर रही है और सेना के खिलाफ कोर्ट में खड़ी है।
जनरल बीसी खण्डूड़ी स्वयं कहते हैं कि भाजपा ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। उम्मीद से अधिक सम्मान, पद आदि मिला है। फिर आप कैसे कह रहे हैं कि भाजपा ने खण्डूड़ी जी का अपमान किया है?
मैं भाजपा के लिए कुछ नहीं कहूंगा। मेरे लिए यह उचित भी नहीं होगा। मैं इतना कहूंगा कि जनरल साहब ने अपने राजनीतिक जीवन में काफी योगदान दिया है। जनरल साहब ने बहुत काम किये हैं। अपना नाम बढ़ाया है और जिस पार्टी के साथ वे जुड़े रहे उस पार्टी का भी नाम जनरल साहब ने बढ़ाया है। यह एक- तरफा नहीं रहा है। एक समय पर तो जनरल साहब के नाम पर भाजपा ने चुनाव तक लड़ा है। ‘खण्डूड़ी हैं जरूरी’ भाजपा ने ही कहा था। रक्षा समिति से जनरल साहब को हटाया गया। दुख इस बात का है कि जो मुद्दे जनरल साहब ने रक्षा समिति में उठाये थे, उसको लेकर उनको हटाया गया।
कांग्रेस सर्जिकल, एयर स्ट्राइक पर सवाल खड़े कर रही और भाजपा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को घेर रही है। आप इसे कैसे परिभाषित या डिफेंड करेंगे?
इसे डिफेंड करने की जरूरत ही नहीं हैं। फौज ने जो कार्य किए हैं, वह एक दो दिन में नहीं किए हैं। इसके लिए लंबी तैयारी होती है। हमने तो पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। यह कहना कि हम राष्ट्रवादी नहीं हैं और देश के खिलाफ हैं, सरासर झूठा आरोप है। दूसरी बात यह है कि सेना का इस्तेमाल आप ब्लैंड इंस्ट्रूमेंट की तरह नहीं कर सकते। आज कश्मीर के जो हालात हैं, वह इतिहास में इतने बुरे कमीर नहीं हुए। सैनिकों की मृत्यु आज तक कभी इतनी बड़ी संख्या में पहले नहीं हुई है जितनी आज हो रही है। सेना को राजनीति में लाना ठीक नहीं होगा।
आप आर्थिक जानकार हैं, उत्तराखण्ड के आर्थिक हालात को आप कैसे देखते हैं?
मैं उत्तराखण्ड के आर्थिक आकड़ों पर चर्चा कर रहा था। जो 2000 से लेकर पिछली सरकार तक इस प्रदेश में नहीं हुआ था, वह मौजूदा भाजपा सरकार ने दो साल में ही कर दिया। बहुत बुरी स्थिति बन चुकी है। सरकार के पास वेतन देने के लिए पैसे तक नहीं हैं। मुझे लगता है कि वित्तीय अराजकता तक की स्थिति आ रही है। डबल इंजन की सरकार बताते हैं। केंद्र में भाजपा राज्य में भी भाजपा सरकार फिर भी ऐसे हालत हो रहे हैं तो आप पूरे फेलियर हैं।
आपके विचार से प्रदेश की पांच बड़ी समस्याएं या मुद्दे कौन से हैं?
चिकित्सा, पानी, शिक्षा, पलायन और बेरोजगारी। मैं समझता हूं कि ये पांच समस्याएं ऐसी हैं जो एक-दूसरे से जुड़. हैं। इनका समाधान हो गया तो बहुत बड़ा बदलाव आ जाएगा।
इनका हल कैसा किया जा सकता है?
मैं मानता हूं कि एक-दो या पांच साल में तो पूरा बदलाव  नहीं हो सकता और एक व्यक्ति इसे पूरा भी नहीं कर सकता। सभी को ईमानदारी से काम करना होगा। मेरा अपना अलग विजन है। मैं निजी सेक्टर को प्रदेश में लाने के लिए प्रयास करूंगा। मुझे इसका अनुभव है और मैंने काम किया हुआ है। हमें कई बदलाव भी करने हैं। चाहे वह खेती पर हो या व्यापार पर। बड़े बदलाव की बहुत जरूरत है। अब परंपरागत तरीके पर नहीं चल सकते।
आपकी कोई अपील?
मैं अपने क्षेत्र के मतदाताओं से कहना चाहता हूं कि मैं नए मार्ग पर चलना चाहता हूं। मैं अपने अनुभव से इस प्रदेश को कुछ देना चाहता हूं। जनरल खण्डूड़ी जी के विजन को मैं आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा हूं। जिस तरह से उन्होंने ईमानदारी से प्रदेश की सेवा की है, मैं भी उसी तरह करने का प्रयास करूंगा। मुझे एक बार अवसर प्रदान करें।
आखिरी सवाल, क्या खण्डूड़ी परिवार वंशवाद को आगे नहीं बढ़ा रहा है। पिता भाजपा में, बेटी भाजपा में और बेटा कांग्रेस में। यह वंशवाद नहीं है?
अगर मैं भाजपा में आता तो हो सकता है कि वंशवाद कह सकते थे। मेरे पिता 1991 में सांसद बने। 2007 में मुख्यमंत्री बने तब तो मैं राजनीति में नहीं आया। यह विचारधारा का प्रश्न है। मेरी अलग विचारधारा है उनकी अलग विचारधारा है। उद्देश्य तीनों का ईमानदारी से प्रदेश की सेवा करना है।

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