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‘अपनी नीति का पालन कर रही है सरकार’

राज्य में भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति की हकीकत सामने आ चुकी है। मुख्यमंत्री की नीति को किस तरह से विभागीय स्तर पर पलीता लगाया जा रहा है और भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के बजाए उन्हें किस तरह से बचाते हुए प्रमोशन दिए जा रहे हैं, इस पर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान से ‘दि संडे पोस्ट’ ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश :

 

चौहान जी आप प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता हैं, लेकिन सवाल सरकार की नीति को लेकर हैं। क्या आप सवालां के जवाब दे सकते हैं। आपसे इसलिए सवाल किए जा रहे हैं कि सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक जी से जवाब नहीं मिल पा रहा है?
राज्य में भाजपा की सरकार है और अपनी सरकार की नीतियों पर बात करने, जबाब देने से पार्टी प्रवक्ता को कोई रोक नहीं है। सरकार भी पार्टी की ही नीति का एक पार्ट होती है। आप के सवालों का मैं पूरा जबाब दूंगा।

सरकार बनने के समय भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर था। लेकिन बाद में इसको लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। जांच, निलंबन और बहाली के नाम पर ही जीरो टॉलरेंस की नीति चल रही है। ऐसा क्यों हो रहा है, क्या सरकार की नीति स्वयं सरकार ही फेल कर रही है?
सरकार पूरी तरह से अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन कर रही है और इसके लिए कई तरह की कार्रवाई भी कर रही है। आपको पता ही होगा कि कई लोगां को जेल में डाला गया। कई को निलंबित भी किया गया। आज तक इतनी बड़ी कार्रवाई पहले नहीं हुई है।

जो लोग आरोपी थे वे पहले सस्पेंड किए गए, लेकिन बाद में उनको बहाल कर दिया गया। यही नहीं अच्छे पदां पर तैनाती भी दी गई है। इसमें नैतिकता का सवाल तो खड़ा हो रहा है?
पहली बात तो यह है कि किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को लंबे समय के लिए निलंबित नहीं किया जा सकता। तय समय पर उसे बहाल करना पड़़ता है। यह सेवा नियमावली कहती है। जो पहले निलंबित हुए थे उनको जेल भी जाना पड़ा था, लेकिन उनको न्यायालय ने जमानत दे दी है तो उनको बहाल करना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि वे आरोपों से बरी हो गए। उनका मामला न्यायालय में चल रहा है। न्यायालय उनको क्या सजा देता है, यह न्यायालय ही जान सकता है। अगर वे दोषी करार दिए गए तो उनकी सेवाएं समप्त हो जाएंगी। अगर उनके रिटायर्ड होने के बाद भी सजा होती है, तो रिटायर्ड होने के बाद मिलने वाले बेनिफिट को रोक दिया जाता है। इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि अरोपियों को सरकार ने बहाल कर दिया है। यह सरकारी कर्मचारी की सर्विस रूल का मामला है। दूसरी बात बेहतर पदां पर तैनात करने की तो पहले यह बात दूं कि सरकार का कोई पद अच्छा या खराब नहीं होता। वैसे जो पहले सस्पेंड थे उनको कोई अच्छे पद पर बहाली नहीं दी गई है।

सरकारी विभागों में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसमें विभागीय जांच में आरोपी पाए गए लोगों को प्रमोशन दिया जा रहा है। रोडवेज में दागी और अक्षम कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर लगाम कसने की बात कही जा रही थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है?
देखिए, सरकार सभी का हित देखती है। राज्य में बहुत से निगम घाटे में चल रहे हैं। पहले तो सरकार उनको घाटे से उबारने का काम करती है। अगर फिर भी कोई कमी रह जाती है तो बीआरएस योजना लागू करती है। लेकिन सरकार का काम यह भी होता है कि कर्मचारियों के परिवार को संरक्षण किस तरह दिया जाए। जो रोजगार से जुड़े हैं, वे बेरोजगार हो जाते हैं। रोडवेज में भी यही देखा गया होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनको संरक्षण दिया जाए अगर उनके उपर आरोप हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाही होगी, यह तय है।

कई ऐसे आरोपी कर्मचारी हैं, जिन पर आज भी मामले चल रहे हैं। लेकिन वे रिटायर होने के बाद कर्मचारी संगठन के पदों पर बने हुए हैं, जबकि नियमावली में यह साफ है कि कोई रिटायर्ड कर्मचारी कर्मचारी संघ में किसी पद पर नहीं रह सकता। इससे भी तो भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है?
कर्मचारी संघ कोई सरकारी ऑफिस तो है नहीं जो रिटयार होने के बाद पद पर नहीं रह सकता। सरकारी संघ दो तरह के होते हैं एक शासन से मान्यता प्राप्त और दूसरे गैर मान्यता प्राप्त। मान्यता प्राप्त संघों में इतना फायदा होता है कि उनको स्थानांतरण से छूट मिलती है, बाकी कोई छूट नहीं मिल सकती। अगर किसी पर आरोप है तो उसके दोषी होने के बाद उस पर नियमानुसार कर्रवाई होनी तय है। तो यह प्रश्न वाजिब नहीं है कि कर्मचारी संघ में होने से उसको संरक्षण मिल जाता है।

सरकार नीति तो बना लेती है, लेकिन उसको लागू करने में पीछे हो जाती है। 30 ऐसे बड़े मामले सामने आए हैं जिन पर आरोपियों के खिलाफ जांच और कार्यवाही करने की अनुमति विजलेंस को नहीं दी जा रही है। ऐसे में केसे जीरो टॉलरेंस की नीति चलेगी। सवाल सरकार की नीति पर नहीं है, नीति के क्रियान्वयन पर भी है?
आप जो कहना चाह रहे हैं मैं उसे समझ रहा हूं। आप बहुत बड़े घोटाले की बात को लेकर कह रहे हैं। मैं आपको यह बता दूं कि कई ऐसे मामले होते हैं जिन पर कई तरह के दबाब होते हैं। राजनीतिक दबाब भी कई तरह से सामने आते हैं। लेकिन उन दबाव को समय के अनुसार कम करना और कार्रवाई करना ही तो काम है। आप देखिए, अब उस मामले में जो आरोपी रहे हैं उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई की अनुमति दे दी गई है। आपको यह तो पता होगा ही कि अगर सरकार कोई काम जल्दबाजी में करती है तो मामला अलग हो जाता है। इसलिए सभी पहलुओं को देखकर ही सरकार काम करती है और ठोस काम करती है। देर भले ही हो जाए, लेकिन आज देखो जो आरोपी हैं वे गिरफ्तारी से बचने के लिए कहां- कहां दौड़ रहे हैं। कई जेल में चले गए हैं।

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