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हुमायूं की जान बचाने के बदले निजाम भिस्ती को बनाया था एक दिन का बादशाह

हुमायूं की जान बचाने के बदले निजाम भिस्ती को बनाया था एक दिन का बादशाह

हुमायूं इतिहास के पन्नों में बहुत ही प्रसिद्ध मुग़ल शासक था। जो सबसे पहले मुगल सम्राट बाबर के बेटे थे,आज उनकी जयंती है। हुमायूं का पूरा नाम नासिर-उद-दीन हुमायूं था। हुमायूं का जन्म 6 मार्च 1508 ई में हुआ। हुमायूं 23 साल की उम्र में ही मुगल बादशाह बना था। हुमायूं का मुगल साम्राज्य की नींव में काफी योगदान है। बाबर के 4 बेटे थे जिसमें हुमायूं सबसे बड़ा था| बाबर ने उसे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।

चौसा का युद्ध भारतीय इतिहास में लड़े गये महत्त्वपूर्ण युद्धों में से एक है, जो 26 जून, 1539 ई. को हुमायूं और शेरशाह के बीच ‘चौसा’ जगह पर लड़ा गया था। शेरशाह गोरिल्ला युद्ध में काफी पारंगत था जिसके चलते वह लड़ाई के वक्त हुमायूं पर भारी पड़ा था। ऐसे में अपनी जान बचाने के लिए हुमायूं को उफनती गंगा में कूदना पड़ गया था। जब युद्ध में थकने के बाद गंगा में हुमायूं डूबने लगा था तभी चौस के निजात भिस्ती की नजर हुमायू पर पड़ गई थी।

अपनी जान को हथेली पर रखकर भिस्ती ने मसक के सहारे हुमायूं को डूबने से बचा लिया। तब उसे क्या पता था कि जान बचाने के बदले उसे दिल्ली का तख्तोताज मिल जाएगा। इस युद्ध में परास्त हुमायूं जब दोबारा दिल्ली की गद्दी पर बैठा तो उसकी जान बचाने वाले चौसा के निजाम भिस्ती की याद आई और उसने निजाम भिस्ती को चौसा से बुलाकर एक दिन के लिए दिल्ली सल्तनत का बादशाह बना दिया।


हुमायूं ने लड़े थे ये चार बड़े युद्ध:
(1) देवरा का युद्ध-1531 ई में लड़ा गया।
(2) चौसा का युद्ध-1539 ई में लड़ा गया।
(3) बिलग्राम-1540 और सरहिंद का युद्ध 1555 ई में लड़ा गया था।

हुमायूं की जीवनी का नाम ‘हुमायूंनामा’ है जो उनकी बहन गुलबदन बेगम ने लिखी थी। इसमें हुमायूं को काफी विनम्र स्वभाव का बताया गया है और इस जीवनी के तरीके से उन्होंने हुमायूं को क्रोधित और उकसाने की कोशिश भी की है। 1533 ई में हुमायूं ने दीनपनाह नाम के एक नए नगर की स्थापना की थी। 27 जनवरी 1556 को दीन पनाह भवन में सीढ़ियों से गिरने से हुमायूं की मौत हो गई।

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