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सावरकर के पुण्यतिथि पर शिवसेना को परखेगी भाजपा

सावरकर के पुण्यतिथि पर शिवसेना को परखेगी भाजपा

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की आज पुण्यतिथि है। वीर सावरकर न सिर्फ एक क्रांतिकारी थे बल्कि एक कवि, अप्रतिम क्रांतिकारी, दृढ राजनेता, समाज सुधारक, इतिहासकार और ओजस्वी वक्ता भी थे। उन्हें हिन्दू शब्द से बेहद लगाव था। वह कहते थे कि उन्हें स्वातन्त्रय वीर की जगह हिन्दू संगठक कहा जाए। उन्होंने जीवनभर हिन्दू हिन्दी हिन्दुस्तान के लिए कार्य किया। वह अखिल भारत हिन्दू महासभा के 6 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए।

इन्होंने भारतीय स्वातंत्र्य युद्ध, मेरा आजीवन कारावास, अण्डमान की प्रतिध्वनियां, हिंदुत्व, द इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस-1857 जैसी रचनाएं भी की है। कभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की कट्टर समर्थक रही शिवसेना कांग्रेस-राकांपा के साथ सरकार बनाने के बाद से सावरकर को लेकर मुश्किल में है। भाजपा अब सावरकर की पुण्यतिथि के मौके पर शिवसेना का सावकर प्रेम की परीक्षा लेना चाहती है। बुधवार को भाजपा जोर-शोर से सावरकर की पुण्यतिथि मनाएगी। इस दौरान उसकी नजर अपने पूर्व मित्र दल शिवसेना पर रहेगी। शिवसेना हमेशा से सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर पेश करती रही है।

पिछले दिनों में लोकसभा में शिवसेना ने केंद्र सरकार के सामने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग भी रखी थी। यह कोई पहला मौका नहीं होगा, जब सावरकर को लेकर कांग्रेस की ओर से हमला बोला गया हो। इससे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस के सेवादल की ओर से सावरकर पर लिखित आपत्तिजनक सामग्री बांटी गई थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था। भाजपा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से वीर सावरकर की पुण्यतिथि जोर-शोर से मनाने को कहा है। भाजपा की तरफ से दादर स्थित स्वामी नारायण मंदिर में वीर सावरकर की पुण्यतिथि मनाई जाएगी।

इस कार्यक्रम में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस, प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि हम पूरे प्रदेश में वीर सावरकर की पुण्यतिथि मनाएगे, लेकिन, शिवसेना के सावरकर प्रेम को भी परखेगे। हम चाहते हैं कि शिवसेना की ओर से विधानसभा में वीर सावरकर गौरव प्रस्ताव आए। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा की सरकार रहते हुए सावरकर गौरव प्रस्ताव क्यों नहीं लाया गया तो पाटिल ने कहा कि उस समय किसी में सावरकर का अपमान करने की हिम्मत नहीं थी। इसलिए इसकी जरूरत नहीं पड़ी, शिवसेना का सावरकर के प्रति कितना सम्मान है या फिर सम्मान के नाम पर ढोंग करती है। यह जनता के सामने आएगा।

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