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The Sunday Post Special

‘अभिनय मेरी रोजी-रोटी और राजनीति सेवा’

पूर्वी यूरोप के दूसरे बड़े देश यूक्रेन में एक हास्य अभिनेता जेलेंस्की लोगों को हंसाते-हंसाते राष्ट्रपति पद पर पहुंच गए। दुनिया के लोग आश्चर्यचकित हैं कि आखिर कैसे एक हास्य कलाकार ने दिग्गजों को मात दे डाली है। अपने देश की राजनीति में भी एक हास्य अभिनेता राज्यपाल यादव राजनीति में बड़ी लकीर खींचने का सपना संजोए हुए हैं। हिन्दी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता राजपाल छोटे पर्दे पर भी अपनी छाप छोड़कर काफी लोकप्रियता बटोर चुके हैं। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी ‘सर्व सम्भाव पार्टी’ भी लॉन्च की। ‘दि संडे पोस्ट’ और आईएमआईएस के खास कार्यक्रम ‘टॉक ऑन टेबल’ में पहुंचे राजपाल यादव ने अपने अभिनय के अनुभव साझा किए। अपनी भावी राजनीति पर भी बेबाकी से बात की

आकाश नागर : एक गांव से निकलकर माया नगरी तक का राजपाल यादव का सफर कितने संघर्ष भरा रहा। आपको किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
मैं बचपन से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ गया था। कक्षा 9-10 से लेकर 12वीं तक शाहजहांपुर के एक आर्ट थिएटर में जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम किया। फिर ग्रेजुएशन किया। लगातार थिएटर करता रहा। शाहजहांपुर में ग्रेजुएशन करने के बाद लखनऊ पहुंचा। भारतेंदु नाटक अकादमी में दो साल का डिप्लोमा किया। फिर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली पहुंचा। वहां पर त्रिवर्षीय डिप्लोमा किया। लगातार 10 साल थिएटर करने के बाद 1997 में मुंबई पहुंचा और वहां लगभग एक-डेढ़ साल तक सीरियल्स किए। जिसमें पहला सीरियल स्वराज था। 4-5 एपिसोड का रोल था फिर नया दौर, श्याम बेनेगल जी की कहानियां, पंकज कपूर जी की कहानियां और हिमांशु धूलिया जी व प्रकाश झा साहब के साथ काम किया। इस तरह के 10-12 सीरियल किए। मुंगेरी के भाई नौरंगी लाल शुरू हुआ तो उसमें मुख्य भूमिका करने का सौभाग्य मिला। दो साल के बाद सीरियल से अलविदा कहने का समय आ गया था। फिल्मों में व्यस्त होने लगा। पहली फिल्म ‘जंगल’ रिलीज हुई। जंगल से खलनायक के अर्वाड भी मिले।

दाताराम चमोली : आपने तो बायो से पढ़ाई की है?
हाईस्कूल की पढ़ाई हमने बायो से की। घरवाले हमें डॉक्टर बनाना चाहते थे।

दाताराम चमोली : तो क्या आप डॉक्टर नहीं बनना चाहते थे?
हां, कक्षा 11 में जब बायो लिया तो शाहजहांपुर में एक साल उसमें पढ़ाई की। दरअसल, उसमें प्रक्टिकल होता है। प्रैक्टिल के लिए जब हमने एक मेढ़क पकड़ कर जार में डाला, उसे क्लोरोफार्म सुंघाया तो थोड़ी देर में ही वह बेहोश हो गया। फिर उसका जब ऑपरेशन करने का टाईम आया तो शायद वह पहला और आखिरी दिन था, जब मुझे लगा कि राजपाल यादव जैसा कोमल हृदय यह काम नहीं कर सकता। उसी समय बड़ी कमाल की बात हुई कि मैं पॉलिटिक्स में भी ट्राई कर रहा था। स्कूल के बाद जैसी उत्सुकता बच्चों में होती है, नौकरी भी जाना है। कहां मिलेगी, किसमें मिलेगी। वैसे ही मोहल्ले में चुनाव होते थे तो मैं उनमें शिरकत करता था।

दाताराम चमोली : लोकप्रियता का मौका तो आपको छोटे पर्दे से ही मिला?
बिल्कुल, आज जिसे छोटा पर्दा बोला जाता है वह छोटा पर्दा नहीं, बल्कि एक छोटा सा गांव है। जिसका नाम न्यूज टेलीविजन है। 70 एमएम देखने के लिए आपको हाल में जाना पड़ता है। जो लोग छोटे पर्दे में विजी हैं उन्हें बड़े पर्दे में काम करने का टाइम नहीं मिलता। सबके कमिटमेंट होते हैं। हमारे लिए कोई छोटा पर्दा नहीं, सब बड़े पर्दे हैं।

आकाश नागर : आजकल के युवा फिल्मी चकाचौंध से प्रेरित होकर घर छोड़ देते हैं, वे मुंबई तो पहुंचते हैं, लेकिन न तो छोटे पर्दे पर और न ही बड़े पर्दे पर अभिनय कर पाते हैं। क्या शुरुआत में आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ। खासकर जब आप मायावी दुनिया में कदम रख रहे थे?
बिल्कुल, आपने बहुत अच्छा प्रश्न पूछा और कहना चाहूंगा कि मैं भी उनके ही बीच का हूं। मैं किसी भी लेवल पर कोई स्पेशल नहीं हूं। ये प्रश्न मेरे दिमाग में भी पिछले 10-15 साल से जूझ रहा था कि हजारों लोग हैं जिनको ये प्लेटफार्म चाहिए। आप देख सकते हैं कि एक क्रिकेट फील्ड होता है, स्टेडियम होता है। लेकिन उसमें सिर्फ 11 खिलाड़ी ही खेल पाते हैं। लाखों खिलाड़ी बाहर से सपना देखते हैं कि हमें भी एक दिन इस फील्ड में खेलना है। हम जानते हैं कि चैलेंज बहुत बड़े हैं, लेकिन जीत का जुनून हर योग्यता को हरा देता है। आत्मविश्वास रखें और स्ट्रगल को समझें। जब हम इस क्रिएटिव फील्ड में एंटर हुए थे, तो तीन टेलीविजन थे। जब तक हम स्टेबलिश हो पाए तब 9 चैनल थे। फिर 90 चैनल हुए और आज 900 चैनल हैं। पहले सिर्फ आर्ट फिल्में थी आज कॉमर्शियल से लेकर वेब है। आज रीजनल सिनेमा की फिल्में देखिए। पंजाबी हों, मराठी हों, गुजराती हों या फिर साउथ कि फिल्में हों, सब दुनिया को प्रभावित कर रही हैं। कला जितनी बिखरती है उतनी सुधरती है। जितना इसका आकार इसका बढ़ाने की कोशिश करोगे उतना ही बढ़ेगा। इसलिए अब पहले की अपेक्षा काम करना आसान है। सब लोग आत्मविश्वास रखें, काम करने की कोशिश करें। दरअसल, सिनेमा को लेकर बहुत सारे मिस कम्युनिकेशन हैं। सबको यह लगता है कि कुछ नहीं किया तो सिनेमा कर लो। मतलब एक्टिंग जरूर कर लो। एक्टिंग को कोई जॉब ही नहीं माना जाता है। दोस्त पूछते थे कि क्या कर रहे हो, तो मैं कहता कि थिएटर की पढ़ाई कर रहा हूं। वह कहते कि थिएटर तो कर रहे हो, लेकिन काम क्या कर रहे हो। जब तक अपनी अभिव्यक्ति को, अभिनय को रियल और रील में अलग-अलग नहीं करते हैं, दोनों को अलग करके जब तक आप कार्य को पूजा की तरह नहीं लेंगे तब तक आपको दिक्कत रहेगी। दुनिया में कोई भी ऐसा शॉर्टकट नहीं है जो आपको मंजिल पर पहुंचा दे। आपको अगर वैष्णो देवी माता के दर्शन करने हैं, तो सीढ़ियां नीचे से चढ़के ही ऊपर जाना पड़ेगा। ज्यादातर बच्चों की यह प्रोब्लम है कि कोई भी सीढ़ियां नहीं चढ़ना चाहता है। लोग कहते हैं कि मैं राजपाल यादव को पछाड़ दूंगा, अरे शाहरुख खान क्या चीज है? जो दूसरों को घर बिठाने के चक्कर में अपना कैरियर बनाने की कोशिश करते हैं, वह बच्चे हमेशा फेल हो जाते हैं। मैं चार्ली चैपलिन को दुनिया का सबसे बड़ा एसेट मानता हूं, दुनिया ने उनको माना। लेकिन आज भी उनसे क्रिएटिविटी का एक भी प्रसेंट नहीं मिला। मेरा मानना यह है कि राजपाल को चार्ली चैपलिन से प्रेरणा तो मिल सकती है, लेकिन राजपाल चार्ली चैपलिन कैसे बन सकते हैं। राजपाल को राजपाल बनना पड़ेगा। उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। अपने अब तक के अनुभवों से मैंने जो हासिल किया उसे गांव-गांव तक उभरती प्रतिभाओं में बांटना चाहता हूं। जगह-जगह वर्कशॉप आयोजित कर अभिनय में आने वाले बच्चों की मदद करूंगा। सिनेमा को लेकर उनके जो मिसकम्युनिकेशन हैं, उन्हें दूर करूंगा। कोशिश करूंगा कि लाखों युवक युवतियों को वर्कशॉप का लाभ हो।

आप दुनिया में कोई भी ऐसा महान आदमी बता दो जो जीवन में कभी फ्लॉप न हुआ हो। जीवन उतार-चढ़ाव है। जीवन अगर है तो उतार-चढ़ाव आना ही है। 10 साल अच्छे और 10 साल बुरे। 10 साल घाटे के 10 साल मुनाफे के। वक्त कभी भी किसी का इंतजार नहीं करता। सूरज कभी रुकने के लिए नहीं ठहरता। परिवर्तन संसार का नियम है।

आकाश नागर : कुछ लोग आसानी से सफलता की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाते हैं, बहुत से लोग फेलियर साबित हुए हैं। अमिताभ बच्चन की भी शुरुआत की कई फिल्में फ्लॉप हुई थीं। आपके जीवन में भी क्या कुछ ऐसा रहा है?
आप दुनिया में कोई भी ऐसा महान आदमी बता दो जो जीवन में कभी फ्लॉप न हुआ हो। जीवन उतार-चढ़ाव है। जीवन अगर है तो उतार-चढ़ाव आना ही है। 10 साल अच्छे और 10 साल बुरे। 10 साल घाटे के 10 साल मुनाफे के। वक्त कभी भी किसी का इंतजार नहीं करता। सूरज कभी रुकने के लिए नहीं ठहरता। परिवर्तन संसार का नियम है। राजा और रंक दोनों ने उतार-चढ़ाव देखे हैं। जीवन जिस दिन खत्म हो जाएगा उसी दिन उतार चढ़ाव बंद हो जाएंगे। आप खुद डिसाइड करें कि आप शिव हैं या शव हैं।

जागृति सौरभ : अभिनय में आप बहुत अच्छा कर रहे थे। एक दौर में तो कोई भी फिल्म आपके बगैर अधूरी हुआ करती थी। फिर अचानक आपने निर्देशन की तरफ जाने का फैसला क्यों किया?
कभी-कभी आदमी क्रिकेट भी खेलता है, तो कभी फुटबॉल भी खेल लेता है। मैं जब निर्देशन भी कर रहा था तो तब भी 10-5 फिल्में कर रहा था। जिसके जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आए। लोग आए अपनी नाव पर बैठे-उतरे। बचपन जब से संभाला, 10 साल की उम्र से ही काम करना शुरू किया। फिजिकल वर्क हो चाहे मेंटल वर्क हो, कभी भी वक्त ने साथ नहीं छोड़ा। आई लव वर्क।

जागृति सौरभ : आप किस अभिनेता को अपना आदर्श मानते हैं?
आदर्श तो एक है जो जीवन का चित्रकार है। जिसने गर्भाशय यानी बिल्कुल अंधेरे में जीवन की नींव रखी। मैं अपना सुपर स्टार गॉड के बाद अपने माता-पिता को मानता हूं। हमारे गुरुजी वेद प्रभाकर शास्त्री जी हैं जो हमें बहुत कुछ सिखाते हैं।

जागृति सौरभ : अभी के दौर का कौन सा हास्य अभिनेता है जिसमें आप अपनी झलक पाते हैं या लगता है कि यह आगे जाएगा?
कोई नहीं, ओनली राजपाल। बड़ी फुर्सत में पैदा किया है ऊपर वाले ने राजपाल यादव को।

जागृति सौरभ : तो कोई ऐसा जो आ सकता है आपके जैसा?
मुझे नहीं मालूम कि कौन कॉमेडियन आ रहा है। मुझे पता भी नहीं कि कौन आ रहा है। 2019 में पूरी दुनिया छोटा सा गांव हो गई है। पहले फिल्मों में होता था कि कोई विलेन है तो कोई हीरो और कोई कॉमेडियन, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सभी विलेन हैं, सभी हीरो और सभी कामेडियन हैं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अगर मुझे कोई कॉमेडियन बोले या हीरो।

राधा चौधरी : आज के तनाव भरे माहौल में किसी को हंसाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। हास्य कलाकार बनना चुनौतीपूर्ण काम होता है। आपने यह क्यों चुना?
हमने कोई रास्ता नहीं चुना। हमने सिर्फ कला का रास्ता चुना। कला का आकार इतना बड़ा है कि सातों समुंदर बहुत छोटे हैं। हमने कला के पुजारी का चोला पहना। हमें नहीं मालूम कि कॉमेडियन कौन होता है। मुझे यह भी पता नहीं है कि कामेडी किसे कहते हैं। सिनेमा मनोरंजन के लिए है। अगर मैं डॉयलाग बोलूं तो जनता का मनोरंजन जरूर होना चाहए।

राधा चौधरी : लोगों की अवसाद भरी जिंदगी में खुशी के दो पल देने का विचार कैसे उत्पन्न हुआ?
जो खुशी देता है, तो फिर उसको आप दुनिया का सबसे बड़ा कलाकार क्यों नहीं मानते हो। क्या होता है कामेडियन, इसके लिए मैं पूरी दुनिया से एक घंटा नहीं, बल्कि आठ घंटे बहस करने के लिए तैयार हूं।

दाताराम चमोली : कॉमेडी के अलावा आप और फिल्में भी कर सकते थे। लेकिन लगता है कि आपके साथ निर्माता निर्देशकों ने न्याय नहीं किया। सिर्फ कॉमेडी तक सीमित रखा आपको?
ऐसी बात नहीं है। मेरे साथ कहीं से कोई अन्याय नहीं हुआ। 15-20 निगेटिव फिल्में की हैं। 20-21 मुख्य भूमिका की फिल्में की। 60-70 पार्ट भूमिका की, 20-25 सामाजिक भूमिका की फिल्में की। 200 फिल्मों में काम किया। अभी भोपाल ट्रेजडी पर फिल्म की है। इतनी बड़ी फिल्म है जिसमें पूरे हॉलीवुड-बॉलीवुड के कलाकारों ने काम किया। संवेदनशील फिल्म है।

जागृति सौरभ : आपकी कोई ऐसी फिल्म बताइए जिसमें आपकी मुख्य भूमिका हो और वह आपके बहुत करीब हो?
मैं पूरी फिल्म इंडस्ट्री और जनता का बहुत धन्यवाद करता हूं कि कभी भी लोगों ने मुझे नकारा नहीं। आज तक दाढ़ी लगाकर जंगल जैसा रोल एक ही हुआ है। 20 रोल आए सबको मना कर दिया क्योंकि मैं वैरायटी पंसद इंसान हूं। अभिनय हमारे ब्लड में है। मैं अभिनय सीखता नहीं जीता हूं। मुझे अच्छा लगता है। अभिनय हमारी कमजोरी और अभिनय ही हमारी मजबूती है।

आकाश नागर : यादव जी आपके भीतर जो कलाकार है, जो भावनाएं आपके अंदर हैं उनमें कहीं न कही एक प्यार भरा दिल भी हिलोरे मारता होगा। आपने जिंदगी में किसी से प्यार भी किया होगा, वो पल आपके कैसे रहे हैं?
बहुत अच्छे, बहुत ही अच्छे। मैं लकिस्ट इंसान हूं। मुझे सबका प्यार मिला। उम्र के हर पड़ाव में प्यार मिला। जब बच्चा था तो मेरी मां का प्रेम मिला। मुझे लगता है कि सौ जन्म भी कुर्बान हैं उस मां पर। फिर उसके बाद भाई, रिश्तेदारों का प्यार मिला। सबका मैं दुलारा रहा। इंस्टीट्यूट में क्लास का प्यारा रहा। दोस्तों का प्रेम भी हमें भरपूर मिला।

जागृति सौरभ : कोई लाइफ में ऐसा आया हो जिससे आपको प्यार हुआ हो, मां-बाप भाई-बहन से अलग?
मैंने आज तक कोई विवाद की पब्लिसिटी नहीं की। व्यक्तिगत पब्लिसिटी नहीं करना चाहूंगा। लेकिन दुनिया की नारी शक्ति को प्रणाम। जिसने जिस स्टेज में अपनी भूमिका निभाई। मां, बहन, बेटी और प्रेमिका के रूप में।

आकाश नागर : यादव जी प्रेमिका के रूप में ही बताने की बात हमने पूछी। कॉलेज में फिल्म इंडस्ट्री में या सामाजिक जीवन में कहीं भी कोई आपकी जिंदगी में कोई ऐसा क्षण रहा हो, जिसको आप आज तक भूल नहीं पाए हों?
किसी लड़की को मैं कभी भूलना ही नहीं चाहता। नारी शक्ति पुरुष से हर काम में आठ गुणा ज्यादा है। नारी खुद ऊपर वाले की एक रचना है। वह अपने प्राणों के साथ रिस्क लेकर एक प्राण को जन्म देती है। उसका तो जितना भी गुणगान किया जाए कम है।

आकाश नागर : आध्यात्मिकता में विश्वास करते हैं आप?
बिल्कुल, 100 प्रसेंट। आध्यात्मिक नहीं होता तो आप लोगों के प्रश्नों के उत्तर कुछ और ही होते।

जागृति सौरभ : बॉलीवुड में बहुत सारे लोग हैं जो राजनीति पर कुछ कहना नहीं चाहते, ऐसा क्यों?
उन लोगों को राजनीति नहीं करनी चाहिए। राजनीति अभिव्यक्ति है। अभिन्य प्रोक्सी है।

जागृति सौरभ : नहीं सर, अभिनय अलग चीज है। हम समाज में रहते हैं तो सही-गलत पर बोलना चाहिए ही, लेकिन वे कभी नहीं बोलते?
ज्यादातर सोशल मीडिया का जमाना है हर आदमी तो बोल ही रहा है।

आदमी अपने कर्म के अलावा ऐसा धर्म करना चाहता है जिसमें उसे संतुष्टि मिले। मैंने अपने कर्म अभिनय के अलावा इसे इसलिए किया कि इसमें लोगों का भला है। पॉलिटिक्स में मैंने बीए किया है। मुझे जितनी कबड्डी पसंद है उतनी ही राजनीति भी पसंद है। अभिनय मेरी रोजी-रोटी है, राजनीति मेरे लिए सेवा है

दाताराम चमोली : आपने राजनीतिक पार्टी की जरूरत क्यों महसूस की?
आदमी अपने कर्म के अलावा ऐसा धर्म करना चाहता है जिसमें उसे संतुष्टि मिले। मैंने अपने कर्म अभिनय के अलावा इसे इसलिए किया कि इसमें लोगों का भला है। पॉलिटिक्स में मैंने बीए किया है। मुझे जितनी कबड्डी पसंद है उतनी ही राजनीति भी पसंद है। अभिनय मेरी रोजी-रोटी है, राजनीति लिए सेवां है। हर अभिनेता साल में 5 फिल्में करे तो 200 दिन से ज्यादा की शूटिंग नहीं करता है। अब शेष 165 दिन मेरे पास हैं। अगर मैं अपने एक महीने में 10 दिन भी जन सेवा के लिए देता हूं तो यह मेरे लिए खुशकिस्मती है। देश के लिए जो अच्छा हो सके उसके लिए मैं राजनीति के जरिए अपनी सहभागिता निभाना चाहता हूं। मसखरापन तो जिंदगी भर चलेगा। हॉलीवुड में आदमी 40 साल के बाद जवान होता है। 40 साल में 10 साल का जीवन का एक्सपीरीयेंस भी होता है। अभी तो हम अभिनय करने के लिए जवान हुए हैं। हमने पार्टी के लिए पार्टी नहीं बनाई है, बल्कि देश के लिए बनाई हैं। जब हम दसवीं में होते हैं। तब 15 साल की उम्र में प्रेम भी उमड़ता है। मां-बाप की चिंताएं भी उभरती हैं। 16वें साल में आते ही बच्चे पर आठ दिशाओं के बोझ आने लगते हैं। आज देश में 25 करोड़ बच्चे हैं। सभी को स्कूल जा-जाकर बताऊंगा कि आज तुम्हारे पास गूगल है। जब तुम 3-6 घंटे होम वर्क करने बैठते हो तो खाली 5 मिनट आप संविधान का एक पन्ना पढ़ो इससे आप 15 से 20 साल के बीच में संविधान के पूरे लॉ को पढ़ जाओेगे। जिस दिन आप देश का संविधान पढ़ लोगो तो आप देश के और जिंदगी के संविधान में एकरूपता पाओगे। मेरी पार्टी का मकसद यह है कि 750 करोड़ की दुनिया में अगर 10 प्रतिशत यानी 70 करोड़ लोगों के पास भी पहुंच गया तो सभी को संविधान पढ़ाकर रहूंगा।

आकाश नागर : आपने जो राजनीतिक पार्टी का गठन किया वह किस राजनेता से प्रभावित होकर किया। आप विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाए तो आपने पार्टी का गठन क्यों किया?
जब हमारे गांव में फट्टे टॉकिज नहीं थे। गांव में चारों तरफ चार महीने पानी भरा रहता था। उस समय पर्दे पर कई स्टार थे। माननीय बच्चन साहब थे। उस समय मैंने सपना देखा था कि स्क्रीन के जो ये बड़े स्टार हैं इनके साथ काम करना है। यह बात मैंने सन् 84 में सोची थी जो 2000 में पूरी हुई। यानी सोलह साल लग गए यहां तक पहुंचने में। 16 साल में बच्चन साहब के पास पहुंच गए और पूरी इंडस्ट्री के साथ आज हमने 200 फिल्में कर ली हैं, तो राजपाल के कर्म पर भरोसा करो। राजपाल के आत्मविश्वास पर भरोसा करो, राजपाल के प्यार पर भरोसा करो। अभी 9 महीने की बच्ची है हमारी पार्टी।’ 9 महीने की बच्ची कभी बच्चे को जन्म नहीं दे सकती है। लेकिन 10 पांच साल की मेहनत से ये भारत की सर्वश्रेष्ठ पार्टी होगी। इसका नाम है ‘सर्व संभाव पार्टी।’ अभी राजपाल यादव के कश्मीर से कन्या कुमारी तक फैंस हैं, फॉलोवर नहीं। लेकिन 100 प्रसेंट एक दिन वह आएगा कि फैंस फालोवर में बदलेंगे। जिस दिन फैंस फलाओवर में बदलेंगे उस दिन उनको आप नहीं बदल पाओगे।

दाताराम चमोली : राजनीतिक मूल्यांकन की बात आएगी तो आप एनटी रामाराव जी को ऊपर रखेंगे या फिर अमिताभ बच्चन जी को?
कौन बेहतर था कौन बेहतर नहीं था यह कुंडली बनाना मेरे वश की बात नहीं है। पिछले 70 सालों में जो कुछ अच्छा हुआ वो हमारे साथ है। जो कुछ भी बुरा हुआ वो भी हमारे साथ है। हम प्रोड्यूसर लोग कभी फिल्म फ्लॉप करने के लिए नहीं बनाते। कोई अपनी पार्टी फ्लॉप करने के लिए नहीं बनाता है। कोई अभिनेता अपना अभिनय फ्लॉप करने के लिए अभिनय नहीं करता है। मैं चाहता हूं कि पिछले 70 साल में जो कुछ भी हुआ है वो हमारे लिए एक इतिहास है। 2019 से हम अपनी ऊर्जा कहां लगा सकते हैं उस पर विचार करना होगा।

दाताराम चमोली : जब आपने पार्टी का गठन किया तो कहा था कि बड़ी लकीर खींचना चाहता हूं?
बिल्कुल कहा था, लेकिन अपनी लकीर बड़ी करने के चक्कर में किसी की लकीर छोटी नहीं करना चाहता। मैं एवरेस्ट पर एवरेस्ट नहीं रखना चाहता। अपने कर्म से एवरेस्ट के समांतर एवरेस्ट बना लो, उसका स्वागत है।

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