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किसे मिलेगी टी ट्वेंटी की कमान?

हिटमैन के नाम से मशहूर भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा के टी 20 फॉर्मेट से रिटायरमेंट लेने के बाद खेल जगत में कई सवाल उठ रहे हैं। खेल प्रेमी सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिख रहे हैं कि अब भारतीय टीम की कमान किसे मिलेगी? अगला टी-20 विश्वकप कौन सा कप्तान जिताएगा? वो कौन होगा जो 2026 में भारत और श्रीलंका की मेजबानी में होने वाले टी-20 विश्वकप में टीम इंडिया की कमान संभालेगा

अमेरिका और वेस्टइंडीज की मेजबानी में खेला गया टी-20 विश्व कप भारत की जीत के साथ समाप्त हो गया है। रोहित शर्मा अगुवाई में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सात रनों से ऐतिहासिक जीत के साथ दूसरी बार यह खिताब अपने नाम कर करीब डेढ़ दशक यानी 2007 के बाद टी 20 विश्वकप खिताब के सूखे को भी खत्म कर दिया है, वहीं हिट मैन के नाम से मशहूर भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जडेजा ने टी 20 फॉर्मेट से संन्यास ले लिया है। ऐसे में खेल जगत में कई सवाल उठ रहे हैं। खेल प्रेमी सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिख रहे हैं कि अब भारतीय टी-20 टीम की कमान किसे मिलेगी? अगला टी-20 विश्वकप कौन सा कप्तान जिताएगा? क्या वह फाइनल मुकाबले में कैच से मैच पलटने वाले सूर्यकुमार यादव होंगे? या मैच के टर्निग प्वाइंट साबित हुए क्लासेन और मिलर का विकेट लेने वाले हार्दिक पंड्या होंगे, प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट जसप्रीत बुमराह या फिर मौत को मात देकर विश्व चैम्पियन बनने वाले ऋषभ पंत होंगे? वो कौन होगा जो 2026 में भारत और श्रीलंका की मेजबानी में होने वाले टी-20 विश्वकप में टीम इंडिया की कमान संभालेगा।

खेल विश्लेषकों और पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का कहना है कि रोहित के बाद अब टीम इंडिया का टी-20 में कौन कप्तान होगा इस सवाल का अभी तक जवाब नहीं मिला है। भारत और जिम्बाब्वे के बीच 6 जुलाई से जो पांच टी-20 मैचों की सीरीज खेली जानी है उसके लिए शुभमन गिल को कप्तान बनाया गया है। लेकिन वे नियमित कप्तान नहीं हैं। लिहाजा चयनकर्ता किसी नए खिलाड़ी को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। अगर भारतीय टीम पर नजर डालें तो हार्दिक पांड्या भी कप्तानी कर चुके हैं और इस पद के प्रबल दावेदार हैं। हालांकि इस सूची में ऋषभ पंत का नाम भी शामिल है। पंत आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी करते हैं और उनके पास भी अनुभव की कमी नहीं है।

हार्दिक पांड्या: पांड्या की बात करें तो वे अनुभवी खिलाड़ी हैं और कप्तान बनने के दावेदारों की रेस में सबसे आगे हैं। उनके पास टी-20 में 100 मैचों का अनुभव है जो अन्य किसी दावेदार के पास नहीं है। पांड्या ने 16 टी-20 मैचों में कप्तानी की है। इनमें से टीम ने 10 मुकाबले जीते हैं। इसके अलावा हार्दिक ने अपने नेतृत्व में गुजरात टाइटंस को पहले ही सीजन में आईपीएल 2022 का चैम्पियन बनाया है। 2023 में भी खुद को साबित किया और टीम को लगातार दूसरे फाइनल में पहुंचाया, हालांकि टीम रनर-अप रही। इसके अलाव पंड्या ने पांच द्विपक्षीय सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी की है। इनमें से 4 में जीत हासिल की है।

इसके अलावा कई मौकों पर शानदार प्रदर्शन का इजहार किया है। बीते दिनों ही हार्दिक ने टी20 विश्वकप 2024 के फाइनल में दमदार प्रदर्शन किया है। अगर पांड्या के कप्तानी रिकॉर्ड को देखें तो वह अच्छा रहा है। इसलिए उन्हें अगला कप्तान बनाया जा सकता है।
पांड्या की कमजोरी
1. बीते आईपीएल के 2024 संस्करण में मुंबई इंडियंस ने हार्दिक को नया कप्तान बनाया। फ्रेंचाइजी ने उन्हें 15 करोड़ रुपए में गुजरात से ट्रेड किया, लेकिन वे कप्तानी संभाल नहीं सके और टीम अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर रही। 2. पंड्या टी-20 में अब तक 1 हजार 492 रन बना चुके हैं लेकिन अपनी कप्तानी में उनका प्रदर्शन कमजोर रहता है। वे अपनी कप्तानी में महज 296 रन ही बना सके हैं।

ऋषभ पंत: पंत के भीतर जीत का जबर्दस्त जज्बा उन्हें भारतीय कप्तानों की रेस का दावेदार बनाता है। वे आज से 18 महीने पहले अस्पताल में थे और जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे, उनका कार एक्सीडेंट हुआ था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि पंत भारत की टी-20 विश्वकप की विश्व विजेता टीम का हिस्सा होंगे।

26 साल के इस युवा ने अपनी मेहनत के दम पर महज डेढ़ साल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की है। उन्होंने टी-20 विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ 42 रनों की पारी खेलकर भारत को 119 के स्कोर तक पहुंचाया था। ऋषभ टी-20 में 74 मैच खेल चुके हैं और 1 हजार 158 रन बनाए हैं। उन्होंने 5 मैचों में भारत की कप्तान की और दो जीते एक बेनतीजा रहा। पंत के पास आईपीएल मैचों में कप्तानी का भी अच्छा अनुभव है। वे 2021 में श्रेयस के चोटिल होने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान बने और टीम को फाइनल तक पहुंचाया था। पंत के पास एक प्लस पॉइंट यह है कि वे विकेट के पीछे से गेम चलाते रहते हैं। उनमें धोनी जैसी खूबियां हैं। ऋषभ पंत का अब तक प्रदर्शन शानदार रहा है और कम उम्रके चलते चयनकर्ता पंत को टी-20 टीम की कमान दे सकते हैं।

पंत की कमजोर कड़ी
1. पंत पर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। वे खेल के दौरान कई बार गैर जिम्मेदाराना शॉर्ट खेलकर आउट होते हैं।
2. 2016 के अंडर-19 विश्वकप से पहले एशिया कप के लिए भारतीय टीम के कप्तान बनाए गए थे, लेकिन कुछ कारणों से उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया था।

सूर्यकुमार यादव: सूर्यकुमार यादव अपने दमदार प्रदर्शन से टीम इंडिया का कैप्टन बनने की दावेदारी ठोंक रहे हैं। 68 मैचों में 167.74 के स्ट्राइक रेट से 2 हजार 340 रन बना चुके हैं। वे अपनी कप्तानी में एक शतक भी जमा चुके हैं। सूर्या की कप्तानी में भारत ने 7 में से 5 मैच जीते हैं। सूर्या अपनी कप्तानी में 164.83 की स्ट्राइक रेट से 300 रन बना चुके हैं। सूर्य मुंबई से हैं इसलिए उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा भी मुंबई के हैं। भारतीय क्रिकेट के इतिहास को देखें तो मुंबई के 4 खिलाड़ी भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं।

सूर्यकुमार के साथ प्लस प्वाइंट यह भी है कि वे बीसीसीआई का भरोसा जीत रहे हैं। भारतीय बोर्ड ने उन्हें बतौर कप्तान अब तक तीन मौके दिए हैं और वे किसी में फेल नहीं हुए हैं। उनका खुद की कप्तानी में रिकॉर्ड भी बेहतर है।

सूर्य का कमजोर पक्ष
सूर्यकुमार के पास कप्तानी का उतना अनुभव नहीं है जितना पांड्या और पंत के पास है। उन्होंने 7 टी-20 और एक आईपीएल मैच में कप्तानी की है। इस मामले में वे मात खा सकते हैं। दूसरा यह कि उनकी उम्र उनके पक्ष में नहीं है। वे 33 साल के हो चुके हैं। ऐसे में चयनकर्ता ऐसे खिलाड़ी को कप्तान बनाना चाहेंगे जो कुछ साल टीम की कमान संभाल सके।

जसप्रीत बुमराह: भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह टीम के लिए तुरुप का इक्का हैं। बुमराह अभी तक 70 टी-20 मैचों में 89 विकेट ले चुके हैं। इनके नाम कई रिकॉर्ड हैं, लेकिन सिर्फ 2 मुकाबलों में ही भारतीय टीम की कप्तानी की है और दोनों ही मुकाबले जीते हैं। बुमराह अपनी कप्तानी में खेले 2 मुकाबलों में 4 विकेट ही ले सके हैं। लेकिन उनके फेवर में सीनियरिटी है। रोहित, कोहली और जडेजा के रिटायरमेंट के बाद बुमराह ही सबसे सीनियर हैं जो उनकी दावेदारी मजबूत कर रही है। इसलिए बोर्ड बुमराह के नाम पर विचार कर सकता है।

बुमराह की राह का रोड़ा
कई अहम मौकों पर बुमराह चोटिल हो जाते हैं। ऐसे में फिटनेस उनके कप्तान बनने की राह का रोड़ा बन सकती है। अब तक कोई भी गेंदबाज भारतीय टी-20 टीम का स्थाई कप्तान नहीं बना है। अधिकतर बल्लेबाजों को ही कप्तानी सौंपी गई है।

बतौर चैम्पियन टी-20 करियर का अंत
टी-20 विश्व कप 2024 का खिताबी मुकाबला जीतने के तुरंत बाद टीम के कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली ने क्रिकेट के इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया है, वहीं इसके अगले ही दिन ऑल राउंडर रविंद्र जडेजा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से टी-20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास की घोषणा कर डाली है।

इन तीनों के टी20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास लेने से भारत के एक क्रिकेट युग का अंत हो गया है। रोहित 2007 से तो विराट 2010 से और जडेजा 2009 से भारत की टी20 टीम का हिस्सा रहे हैं। इन्होंने इस प्रारूप में कई बड़े कीर्तिमान बनाए और अब टी20 चैम्पियन बनकर अपने-अपने करियर का अंत किया है।

रोहित शर्मा की बात करें तो उन्होंने 62 टी-20 मैचों में भारत की कप्तानी की और 50 में टीम को जीत मिली तो महज 12 में हार मिली। यानी 81 फीसदी मैचों में भारत ने सफलता हासिल की। इसी के साथ वह टी-20 में भारत के सबसे सफल कप्तान भी बने। उनके बाद एमएस धोनी ने 72 में से 42 टी-20 में भारत को जीत दिलाई थी।

दूसरी तरफ विराट ने 2017 में भारत की कप्तानी संभाली। उन्होंने 50 मैचों में कप्तानी की जिसमें से 32 में टीम को जीत और 16 में हार मिली। 2 मुकाबले बेनतीजा भी रहे। यानी विराट की कप्तानी में भारत ने 64 प्रतिशत टी-20 मैच जीते। उन्होंने 2021 में एकमात्र बार विश्वकप में कप्तानी की, भारत ने 5 में से 3 मैच जीते, लेकिन टीम सेमीफाइनल में भी जगह नहीं बना सकी।

रवींद्र जडेजा की बात करें तो उन्होंने भारत के लिए 2009 में डेब्यू किया था। टी-20 फॉर्मेट में उन्होंने कुल 74 मैच खेले। जिनमें 127.16 के स्ट्राइक रेट से 515 रन बनाए और 54 विकेट अपने नाम किए। वहीं टी-20 विश्वकप 2024 में जडेजा ने 8 मैचों की पांच पारियों में मात्र 36 रन बनाए। इस दौरान उनके स्कोर 2, 17, 9, 7, 10 रहे। इतना ही नहीं, गेंदबाजी में भी उन्होंने सिर्फ 1 विकेट लिया।

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