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भारतीय खेलों की धूमिल होती छवि

कुछ ही महीनों बाद यानी 23 जुलाई, 2021 से शुरू होने वाले खेलों के महाकुंभ ओलंपिक से पहले भारतीय खेल को बड़ा झटका लगा है। इस झटके की वजह है भारतीय स्टार खिलाड़ी एवं ओलंपिक विजेता सुशील कुमार पर लगे हत्या के आरोप। इन आरोपों के बाद से खेल जगत में सुशील कुमार ही नहीं, बल्कि भारतीय खेल की छवि भी धूमिल हुई है। दरअसल, हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के माॅडल टाउन में कुछ पहलवानों के बीच जमकर मारपीट हुई। मारपीट में पांच पहलवान गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें से एक पहलवान सागर धनखड़ की बाद में मौत हो गई, बाकी चार की हालत गंभीर बनी हुई है। इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब पुलिस को दी गई शिकायत में आरोपियों के तौर पर स्टार खिलाड़ी सुशील पहलवान का नाम सामने आया। अब पुलिस सुशील कुमार को जगह-जगह तलाश रही है। भारतीय स्टार खिलाड़ी सुशील कुमार जब अपने खेल के शीर्ष पर थे तो उन्होंने अकेले दम पर भारतीय कुश्ती को बुलंदियों पर पहुंचाया लेकिन अब जब पुलिस हत्या के मामले में उनकी तलाश कर रही है तो खेल की छवि भी उतनी ही धूमिल हो रही है जितनी इस पहलवान की छवि।

सुशील ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल को नई बुलंदियों तक पहुंचाया और प्रेरणादायी विरासत तैयार की। बापरोला गांव का यह पहलवान इस खेल में अब तक भारत का एकमात्र विश्व चैंपियन है। वह एकमात्र भारतीय खिलाड़ी है जिसके नाम पर दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक दर्ज हैं। हालांकि, भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) अब चिंतित है कि वर्षों में सुशील अन्य पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से खेल की जो प्रतिष्ठा बनाई है उसे नुकसान पहुंचा है।

डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर ने कहा, ‘हां, मुझे यह कहना चाहिए कि इससे भारतीय कुश्ती की छवि को बेहद नुकसान पहुंचा है। लेकिन पहलवान मैट से बाहर क्या करते हैं इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है। हम मैट पर उनके प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं।’ उल्लेखनीय है कि पुलिस चार मई को हुए एक झड़प के सिलसिले में सुशील कुमार की भूमिका का पता लगा रही है।

उल्लेखनीय है कि साल 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक में सुशील कुमार के कांस्य पदक जीतने के साथ भारत ने कुश्ती में ओलंपिक पदक के 56 साल के सूखे को खत्म किया था। सुशील कुमार की इस उपलब्धि से कुश्ती को काफी फायदा हुआ और इसके बाद भारत के लिए योगेश्वर दत्त, गीता, बबीता और विनेश फोगाट, रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक और विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं बजरंग पूनिया, रवि दाहिया और दीपक पूनिया ने शानदार प्रदर्शन किया।

कुश्ती जगत हालांकि अब स्तब्ध है, क्योंकि पुलिस ने सुशील के खिलाफ ‘लुक आउट सर्कुलर’ जारी किया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह पहलवान एक झड़प में युवा पहलवान की मौत के बाद से गायब है। बता दें कि यह घटना उस समय हुई जब भारत ओलंपिक में कुश्ती में अब तक के अपने सर्वाधिक आठ कोटे हासिल करने का जश्न मना रहा है। भारतीय पहलवानों से टोक्यो ओलंपिक में उनके अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

तोमर ने कहा, ‘इसने ही नहीं, बल्कि फरवरी में हुई घटना ने भी भारतीय कुश्ती की छवि को दागदार किया था।’ वह कोच सुखविंदर मोर से जुड़ी घटना का संदर्भ दे रहे थे जो हरियाणा के रोहतक के जाट काॅलेज में साथी कोच मनोज मलिक सहित पांच लोगों की हत्या में शामिल था। सुखविंदर ने कथित तौर पर मलिक के साथ निजी दुश्मनी के कारण पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बाद में दिल्ली एवं हरियाणा पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

सुशील कुमार को डब्ल्यूएफआई वार्षिक अनुबंध की सूची से हटाने के मामले में विनोद कुमार ने कहा कि वे अभी इस पर विचार नहीं कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सुशील कुमार को दिसंबर 2018 में चार अन्य पहलवानों के साथ ए ग्रेड में शामिल किया गया था। इससे उन्हें 30 लाख रुपये वार्षिक की वित्तीय सहायता मिलती है। बता दें कि नूर सुल्तान में 2019 विश्व चैंपियनशिप के पहले दौर में हार के बाद से सुशील ने हालांकि किसी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है।

भारत को सुशील, योगेश्वर, बजरंग और अब टोक्यो के लिए क्वालीफाई कर चुके रवि दहिया और दीपक पूनिया जैसे पहलवान देने वाले छत्रसाल स्टेडियम की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। सूत्र ने बताया कि योगेश्वर और बजरंग जैसे पहलवान यहां से जा चुके हैं, क्योंकि सुशील के समूह ने उन्हें निशाना बनाया था। सुशील के कोच और ससुर एशियाई खेल 1982 के चैंपियन सतपाल सिंह 2016 तक स्टेडियम प्रभारी थे लेकिन इसके बाद वह अतिरिक्त निदेशक के पदक से सेवानिवृत्त हो गए।

सुशील को इसके बाद ओएसडी नियुक्त किया गया था। सूत्र ने कहा, ‘रेलवे से प्रतिनियुक्ति पर यहां काम कर रहे सुशील कुमार ही सारे फैसले करते हैं। अगर आप उसकी बात नहीं सुनते या उसके सुझाव के अनुसार काम नहीं करते तो वह धीरे-धीरे आपको प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘लोग कुछ भी कहने से डरते हैं। वे करियर बनाने आते हैं, राजनीति में शामिल होने नहीं। इसलिए स्टेडियम की राजनीति में शामिल होने से आसान उन्हें इसे छोड़कर जाना लगता है।’

यह पहला मामला नहीं है जब सुशील कुमार पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। कई साल पहले उन पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में पहलवान प्रवीण को पीटने का आरोप लगा था। इससे पहले सुशील कुमार की सुंदर भाटी, काला जठेड़ी एवं लाॅरेंस बिश्नोई जैसे बड़े गैंगस्टर से सांठ-गांठ की बात भी सामने आ चुकी है। अब सुशील कुमार के उत्तराखण्ड में छिपे होने की सूचना पर दिल्ली पुलिस की चार टीमें सुशील और उनके करीबियों को ढूंढ़ने में लगी हुई हैं।

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