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मैरीकॉम का मास्टर पंच

भारत की दिग्गज खिलाड़ी एमसी मैरीकॉम ने विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में छठी बार स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोता को 5-0 से हराया। वे विश्व चैम्पियनशिप में छह गोल्ड जीतने वाली दुनिया की पहली महिला बॉक्सर बन गई हैं। इससे पहले मैरीकॉम और आयरलैंड की केटी टेलर के नाम पांच-पांच गोल्ड थे। केटी अब प्रोफेशनल बॉक्सर बन गई हैं। इस कारण वे इस बार टूर्नामेंट में नहीं उतरीं।
मैरीकॉम विश्व चैम्पियनशिप (महिला और पुरुष) में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली मुक्केबाज भी बनीं। उन्होंने छह स्वर्ण और एक रजत जीतकर क्यूबा के फेलिक्स सेवोन (91 किलोग्राम भार वर्ग) की बराबरी भी कर ली है। फेलिक्स ने 1986 से 1999 के बीच छह स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था। विश्व बॉक्सिंग चैंपियन में एमसी मेरीकॉम ने 48 किलोग्राम के लाइट फ्लाइवेट कैटेगिरी में यूक्रेन की हना ओखोटा को हराया। 35 वर्षीय मैरीकॉम ने नई दिल्ली के केडी जाधव इंडोर स्टेडियम में हेना को एकतरफा मैच में 5-0 से हराया।
विश्व चैम्पियनशिप में मेरीकॉम ने आखिरी बार 2010 में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वह 2002, 2005, 2006 और 2008 में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। यूक्रेन की हना केवल 22 साल की हैं। उनके और मेरीकॉम के बीच में 13 साल की आयु का अंतर है। ‘हंटर’ उपनाम से प्रसिद्ध हेना ने यूरोपियन यूथ चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था। मैरीकॉम का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा लोकटक क्रिश्चियन मॉडल स्कूल और सेंट हेवियर स्कूल से पूरी की। आगे की पढाई के लिए वह आदिमजाति हाई स्कूल, इम्फाल गईं। लेकिन परीक्षा में फेल होने के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और फिर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय से परीक्षा दी। मैरीकॉम की रुचि बचपन से ही
एथलेटिक्स में थी।
उनके मन में बॉक्सिंग का आकर्षण 1999 में उस समय उत्पन्न हुआ जब उन्होंने खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग रिंग में लड़कों के साथ बॉक्सिंग के दांव-पेंच आजमाते देखा। मैरीकॉम बताती हैं कि ‘मैं वह नजारा देखकर स्तब्ध थी। मुझे लगा कि जब वे लड़कियां बॉक्सिंग कर सकती हैं तो मैं क्यों नहीं?’ साथी मणिपुरी बॉक्सर डिंग्को सिंह की सफलता ने भी उन्हें बॉक्सिंग की ओर आकर्षित किया। मैरीकॉम की शादी ओन्लर कॉम से हुई है। उनके जुड़वां बच्चे हैं।

2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीता। 2010 के एशियाई खेलों में कांस्य तथा 2014 के एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। दो वर्ष के अध्ययन प्रोत्साहन अवकाश के बाद उन्होंने वापसी करके लगातार चौथी बार विश्व गैर-व्यावसायिक बॉक्सिंग में स्वर्ण जीता। उनकी इस उपलब्धि से प्रभावित होकर एआईबीए ने उन्हें मॅग्नीफिसेंट मैरी (प्रतापी मैरी) का संबोधन दिया। मणिपुर के एक गरीब परिवार में जन्मी मेरीकॉम के परिवार वाले नहीं चाहते थे कि वो बॉक्सिंग में जाएं। बचपन में मेरीकॉम घर का काम करती, खेत में जाती, भाई-बहन को संभालती और उसके साथ -साथ प्रैक्टिस भी करती थीं।

दरअसल, डिंको सिंह ने उन दिनों 1998 में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं से मेरीकॉम को भी बॉक्सिग का चस्का लगा। काफी समय तक तो उनके मां-बाप को पता ही नहीं था कि मेरीकॉम बॉक्सिंग कर रही है। वर्ष  2000 में अखबार में छपी स्टेट चैम्पियन की फोटो से उन्हें पता चला, पिता को डर था कि बॉक्सिंग में चोट लगी तो इलाज कराना मुश्किल होगा और शादी में भी दिक्कत होगी। लेकिन मेरीकॉम नहीं मानी। मां-बाप को ही जिद्द माननी पड़ी। मेरी ने 2001 के बाद से चार बार वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीती। इसी बीच मेरीकॉम की शादी हुई और अब उनके दो जुड़वा बच्चे और एक छोटा प्रिंस भी है। मेरीकॉम के जीवन पर बॉलीवुड में बायोपिक भी बन चुकी है, जिसका प्रदर्शन 2014 में हुआ। जिसमें प्रियंका चोपड़ा ने मेरीकॉम की भूमिका अदा की थी।
मैरीकॉम ने वर्ष  2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैम्पियनशिप जीती। अब तक वह 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं। बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2003 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार किया और  वर्ष 2006 में पद्मश्री से सम्मानित किया। 29 जुलाई 2009 को वे भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए (मुक्केबाज विजेंदर कुमार तथा पहलवान सुशील कुमार के साथ) चुनीं गईं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्त्रीत्व की नई परिभाषा देकर अपने शौर्य बल से नए  कीर्तिमान गढ़ने वाली विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज मैरीकॉम को 17 जून 2018 को वीरांगना सम्मान से भी  विभूषित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित 10वीं एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाज चैम्पियनशिप 24 नवंबर, 2018 को उन्होंने 6 विश्व चैम्पियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनकर इतिहास बनाया। विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बता दिया कि इस 35 वर्षीय युवा मां में अभी बहुत जान बाकी  है और इसका नजारा 2020 में जापान में होने वाले ओलंपिक पदक में दिखाई दे सकता है।
छह बार की विश्व चैम्पियन, लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता मैरी का मंत्र है कि अगर मैं फिट रहूंगी तो स्वर्ण पदक मेरे कब्जे में रहेगा। जब उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तो वह उनके लिए भी चौंकाने वाली ही खबर थी। जहां एक ओर सचिन तेंदुलकर से लेकर रेखा जैसी हस्तियों पर राज्यसभा में अनुपस्थित रहने पर सवाल उठते हैं तो वहीं मैरी भारत में रहने पर सुबह सात बजे इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अभ्यास करती हैं और घर आकर संसद सत्र में शामिल होने के लिए निकल पड़ती हैं। वह नहीं चाहती कि उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठें। मैरी अपनी तुलना फिलीपींस के प्रोफेशनल मुक्केबाज मैनी पैक्युआओ से करती हैं जो वहां के सीनेट मेंबर भी हैं। मैरी का मानना है कि उनका दायरा मैनी से भी बड़ा है क्योंकि वह एक मां भी हैं। जीत के बाद मैरीकॉम ने कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत मुश्किल रहा। आपके प्यार से यह संभव हो सका। मेरा अगला लक्ष्य 2020 टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतना है। 51 किग्रा कैटेगरी ओलंपिक में मेरे लिए मुश्किल होगा, लेकिन मैं खुश हूं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस जीत के लिए अपने सभी प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करती हूं, जो मुझे यहां समर्थन करने के लिए आए। मैं आप सभी की तहेदिल से शुक्रगुजार हूं। मेरे लिए यह महान पल है।’ उन्होंने यह जीत देश को समर्पित की। हेना से मुकाबले के बारे में उन्होंने कहा कि यूक्रेनी खिलाड़ी के खिलाफ मैच आसान नहीं था, क्योंकि वह मुझसे लंबी थी। इस चैम्पियनशिप में उतरने से पहले मैरीकॉम ने कहा था कि वे सौ फीसदी फिट हैं और 2020 टोक्यो ओलंपिक में भी उतरेंगी। टूर्नामेंट से पहले सभी खिलाड़ियों का फिटनेस चेक करने के लिए 100 मीटर की रेस हुई थी। जिसमें  मैरी  दूसरे नंबर पर रही थीं। टोक्यो ओलंपिक में उन्हें एक बार फिर क्वालिफायर में 51 किलो में खेलना होगा। उन्होंने कहा, ‘यह आसान नहीं है क्योंकि मैं भी इंसान हूं। इसमें अधिक परिश्रम लगता है लेकिन मैं अपनी ओर से पूरा प्रयास करूंगी।’ अपनी उपलब्धियों के बारे में मेरीकॉम ने कहा, ‘यह सब हासिल करने वाली पहली महिला मुक्केबाज बनकर मैं बहुत खुश हूं। हर किसी के सपने होते हैं और मुझे खुशी है कि मैं अपने सपने पूरे कर सकी।
विश्वकप में मैरीकॉम के पदक
वर्ष जगह पदक 
 2001 पेंसिलवेनिया रजत
 2002 तुर्की स्वर्ण
 2005 रूस स्वर्ण
 2006 नई दिल्ली स्वर्ण
 2008 चीन स्वर्ण
 2010 बारबाडोस स्वर्ण
 2018 नई दिल्ली स्वर्ण
8 Comments
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