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भारत की उम्मीदों को झटका

विश्वकप से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बड़ा उलटफेर करते हुए भारतीय टीम को उसी की धरती पर हराकर वनडे सीरीज पर 3-2 से कब्जा कर लिया है। ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज 3-1 से और वनडे सीरीज 2-1 से हराने वाली भारतीय टीम अपने ही घर में उसी टीम के खिलाफ बुरी तरह पस्त हो गई। स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर के बिना अधूरी दिख रही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने दुनिया की दूसरे नंबर वाली टीम को उसके घर में आकर पहले टी-20 सीरीज में 2-0 से मात दी और फिर निर्णायक मुकाबले में वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम किया।

दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान पर खेले गए निर्णायक वनडे में भारत को 35 रनों से शिकस्त देकर ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 2 साल का सूखा खत्म कर दिया है। दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 2 साल से किसी भी द्विपक्षीय वनडे सीरीज को जीतने में नाकामयाब रही है और ऐसे में विश्वकप से पहले भारत जैसी मजबूत टीम को उसी के घर पर हराकर डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने विश्वकप के लिए अपना दावा भी ठोक दिया है।

इस दौरे से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम बुरे दौर से गुजर रही थी। टीम के दो स्टार खिलाड़ी डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ बॉल टेंपरिंग प्रकरण में दोषी पाए जाने के कारण पिछले एक साल से टीम से बाहर हैं और तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क भी चोट के कारण टीम से बाहर थे। इन तीनों खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा था। कंगारुओं को ना सिर्फ विदेशी धरती पर, बल्कि घरेलू मैदानों पर भी हार का सामना करना पड़ रहा था। भारतीय टीम भी कंगारुओं को उन्हीं के घर में टेस्ट और वनडे सीरीज में मात देकर लौटी थी और ऐसे में किसी भी क्रिकेट फैन ने ये नहीं सोचा होगा कि यही टीम विश्व की नंबर 2 वनडे टीम भारत को पहले टी-20 सीरीज और फिर वनडे सीरीज में मात दे देगी।

आस्ट्रेलिया ने इससे पहले 2009 में भारतीय सरजमीं पर छह मैचों की सीरीज 4-2 से जीती थी। इस बार उसने पहले दो मैच गंवाने के बाद लगातार तीन मैच जीतकर सीरीज 3-2 से अपने नाम की। यह वनडे में पांचवां अवसर है जबकि किसी टीम ने पहले दो मैच हारने के बाद सीरीज जीती। ये जीत ऑस्ट्रेलियाई टीम को ऐसे वक्त में मिली है जब विश्वकप शुरू होने में कुछ ही समय बचा है और ऐसे में टीम के लिए ये जीत संजीवनी का काम कर सकती है। ऑस्ट्रेलिया के लिए इस जीत के अलावा अच्छी खबर ये है कि टीम के स्टार खिलाड़ी डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ पर लगा हुआ बैन भी 29 मार्च को खत्म हो रहा है और ये दोनों खिलाड़ी भी विश्वकप के लिए उपलब्ध होंगे। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम भी विश्वकप में विपक्षी टीमों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

शुरुआती दो मैचों में पिछड़ने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने रांची और मोहाली वनडे जीतकर सीरीज 2-2 से बराबर कर ली थी। फिरोजशाह कोटला में आखिरी मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 272 रन बनाए तो लगा टीम इंडिया यह मैच और सीरीज जीत लेगी, लेकिन मेहमान टीम के गेंदबाजों ने मेजबानों को 50 ओवरों में 237 रनों पर ऑल आउट करके 35 रनों से यह मैच और सीरीज जीत ली।

273 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारत की बल्लेबाजी इस हद तक खराब थी कि उसकी जितनी बुराई की जाए कम है। ओपनर रोहित शर्मा ने किसी तरह 89 गेंदों पर 56 रन बनाए। उसके बाद सबसे ज्यादा 46 रन आठवें नंबर पर उतरे तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने बनाए। ओपनर शिखर धवन 12, कप्तान विराट कोहली 20, चौथे नंबर पर आए रिषभ पंत 16, विजय शंकर 16, रवींद्र जडेजा (00) आते-जाते रहे। यही कारण था कि भारत ने 28.5 ओवर में 132 रन पर छह विकेट गंवा दिए। सातवें विकेट के लिए केदार जाधव 44 और भुवनेश्वर की 46 रनों की पारी खेली। इन दोनों ने 91 रनो की साझेदारी करके कुछ उम्मीदें जगाईं, लेकिन इन दोनों के आउट होते ही सब कुछ चौपट हो गया। इसी के साथ फिरोजशाह कोटला का एक रिकॉर्ड भी कायम रहा। इस मैदान पर केवल दो अवसरों पर 250 रन से अधिक के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया गया है। आाखिरी बार विश्वकप 1996 में श्रीलंका ने यह कारनामा किया था। भारतीय टीम फिर से यहां 250 से ज्यादा के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकी।

इस साल इंग्लैंड में होने वाले विश्वकप से पहले भारतीय टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह अंतिम वनडे सीरीज थी। इसमें उसे अपने अंतिम-15 खिलाडी तय करने थे, लेकिन सीरीज के परिणाम और खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने सबको निराश कर दिया है। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने टीम इंडिया के कलाई के स्पिनरों कुलदीप यादव एवं युजवेंद्रा सिंह चहल की गेंदों को आसानी से पढ़ लिया तो उसके गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों की तकनीकी कमियों को उजागर कर दिया। ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर एडम जांपा ने 10 ओवर में 46 रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने इस सीरीज में कुल 11 विकेट लिए। तेज गेंदबाज पैट कमिंस ने इस सीरीज में भारतीय पिचों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे ज्यादा 14 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया के हाथों अपने घर में वनडे सीरीज 2-3 से हारने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि टीम और खिलाड़ी इस हार से निराश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने माना कि विश्वकप में सफल होने के लिए सही फैसले लेने की जरूरत है।

कोहली ने साथ ही कहा कि विश्वकप के लिए टीम संतुलित है और सिर्फ स्थान को लेकर जद्दोजहद है। कोहली ने मैच के बाद कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो हम में से कोई भी खिलाड़ी निराश नहीं है, न ही किसी तरह का पछतावा है। निश्चित ही जो प्रयोग किए गए, हार के लिए उनका बहाना नहीं दे सकते। विश्वकप को लेकर संभवत एक ही स्थान के लिए हमें माथा-पच्ची करनी है अन्यथा हम अपने 11 खिलाड़ियों को लेकर अपने दिमाग में बहुत साफ है। हमने कुछ फैसले सही नहीं लिए, उस पर हमें सोचना होगा। विश्वकप में हमें कहां जाना उस पर हम बिल्कुल साफ है। हमारा ध्यान अब सिर्फ बेहतर फैसले लेने पर है। हमारी टीम संतुलित है। विश्वकप में आगे जाने के लिए हमें बस अपने सही फैसले लेने पर ध्यान देना है।

ऑस्ट्रेलिया ने उसी तरह की क्रिकेट खेली, जिस तरह की हमने आस्ट्रेलिया में खेली। उनमें वही ऊर्जा और इच्छा शक्ति थी जो ऑस्ट्रेलिया में हममें थी। उन्होंने हाथ आए मौकों को भुनाया और हम पर हावी रहे। भारत के साथ भारत में सीरीज जीतना ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत बड़ी बात है और इस जीत से उनका आत्मविवास काफी बढ़ेगा।

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