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हॉकी में भारत की पहली परीक्षा आज

लगभग  43 वर्ष  से विश्व कप खिताब का सूखा झेल रही भारतीय हॉकी टीम इस बार अपना दूसरा खिताब जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। आत्मविश्वास से भरी मेजबान टीम कलिंगा स्टेडियम में घरेलू दर्शकों की हौसलाअफजाई के बीच आज शाम 7.00 बजे से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विश्वकप  2018  का  आगाज करेगी। दूसरे मैच में बेल्जियम का सामना कनाडा से होगा।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम 14वें हॉकी विश्वकप में अपना पहला मैच खेलने उतरेगी। भारत के सामने दक्षिण अफ्रीकी टीम होगी। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में रंगारंग समारोह के साथ टूर्नामेंट का आगाज हुआ। यह  तीसरा मौका है जब भारत इस प्रतिष्ठित टूर्मामेंट की मेजबानी कर रहा है। पिछले तीन संस्करणों में से टीम इंडिया केवल एक बार विश्व खिताब पर कब्जा करने में सफल हुई है। ये खिताब भी उसने 43 साल पहले 1975 में जीता था। मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में आयोजित तीसरे विश्वकप के खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम ने चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को मात दी थी। लेकिन इसके बाद भारतीय टीम मेडल पोडियम तक भी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में कोच हरेंद्र सिंह के कंधों पर टीम इंडिया को खिताब दिलाने की जिम्मेदारी है।

तैयारी खत्म अब भारत के असल इम्तिहान की बारी है। कप्तान सेंटर हाफ मनप्रीत सिंह की अगुआई में मेजबान भारत दुनिया की शीर्ष 16 टीमों के हॉकी ‘महाकुंभ’का आगाज आज से भारत और दक्षिण अफ्रीकी टीम के मैच से शुरु होगा। भारत का पहला लक्ष्य अपने पूल ‘सी’ में सभी मैच जीत शीर्ष पर रह कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने का होगा। भारत के पूल में चारों टीमें अलग-अलग शैली से खेलने वाली हैं। भारत को पूल में सबसे कड़ी चुनौती बेल्जियम से मिलेगी इसके बावजूद भारत को दक्षिण अफ्रीका और कनाडा को हल्के में लेने की भूल से बचना होगा।

भारत की ताकत आक्रामक हॉकी है और उसी पर काबिज रहने के साथ भारत को अपने युवा तुर्कों पर भरोसा रखना होगा। भारतीय टीम के सामने इस बार अपने हॉकी प्रेमियों को पदक की सौगात देने की चुनौती होगी भले ही इस पदक का रंग कुछ भी हो।अगर पदक का रंग सुनहरा हो तो मेजबान के नाते सोने पर सुहागा होगा। भारत तीसरी बार हॉकी विश्व कप की मेजबानी कर रहा है। चीफ कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में घर में पदक  जीतने की हसरत को पूरा करने के लिए भारत की कोशिश दक्षिण अफ्रीका पर बड़ी जीत के साथ आगाज कर शुरू से ही लय पाने की होगी।

भारत एफआईएच रैंकिंग में पांचवें स्थान पर है और दक्षिण अफ्रीका 15वें पायदान पर  है। मैदान पर उतरने पर रैंकिंग मायने नहीं रखती। फिर भी यह हकीकत है कि भारत अपनी ऊंची  रैंकिंग के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मनोवैज्ञानिक लाभ की स्थिति में होगा।विश्व कप जिस तरह का फार्मेट है और उसमें भारत को क्रासओवर से बचने के लिए अपना ध्यान सभी पूल मैच जीतने पर लगाना होगा। भारत की अग्रिम पंक्ति में खासतौर पर मनदीप, दिलप्रीत और सिमरनजीत की त्रिमूर्ति ने डी में कुछ धैर्य दिखाया तो फिर बेल्जियम की मजबूत चुनौती के बावजूद अपने पूल में शीर्ष पर रह कर क्वार्टर फाइनल ही नहीं उससे भी आगे सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद दिख रही हैं।

दक्षिण अफ्रीका से भारत की टीम दो वर्ष पहले 2016 के रियो ओलंपिक में एक प्रैक्टिस मैच खेली थी  उसमें भारत को भारतीय टीम इस जीत को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा है। बड़े टूर्नामेंट की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका से अंतिम बार छह साल पहले भारतीय टीम लंदन ओलंपिक में भिड़ी थी तब 2-3 से हार गई थी।
भारत ने दक्षिण अफ्रीका के सबसे अनुभवी स्कीमर ऑस्टिन स्मिथ, कप्तान टिम ड्रमंड और जूलियन हाइक , रेट हॉलकेट जैसे सवा सौ से ज्यादा मैच खेल अनुभवी खिलाड़ियों खासतौर पर स्मिथ की मजबूत चौकसी की तो फिर उसकी जीत की राह आसान हो जाएगी। भारत को दक्षिण अफ्रीका के जवाबी हमलों से चौकस रहना होगा।

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