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कंगारुओं पर भारी भारत

कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय टेस्ट टीम ने आखिरकार ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर वो कर दिखाया जिसकी सब उम्मीदें लगाए हुए थे। भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज से पहले कई दिग्गजों ने कहा था कि इस भारतीय टीम के पास ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने का सुनहरा मौका है और शुरुआत कुछ इसी तरह से हुई है। भारत ने एडिलेड टेस्ट मैच के पांचवें दिन मेजबान कंगारू टीम को करारी मात देते हुए सीरीज में 1-0 से बढ़त हासिल कर ली है। टीम इंडिया ने लगभग 11 साल बाद ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर किसी टेस्ट मैच में जीत दर्ज की है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट में टीम इंडिया ने इतिहास रचते हुए ऑस्ट्रेलिया को 31 रन से हरा दिया। पिछले 86 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया में सीरीज के पहले टेस्ट मैच में जीत हासिल की है। जहां तक ऑस्ट्रेलिया में कोई टेस्ट मैच जीतने की बात है तो भारतीय टीम ने देशवासियों को तकरीबन 11 साल बाद यह खुशी और गौरव का क्षण दिया है। इससे पहले 86 साल के इतिहास में भारत सिर्फ पांच टेस्ट मैच जीत पाया था। यह उसकी छठवीं टेस्ट मैच जीत है।

भारत ने टेस्ट सीरीज के पहले मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया हालांकि उसका ये फैसला तब गलत साबित होता दिख रहा था जब उसने 41 रन पर ही अपने 4 विकेट खो दिए थे, इसके बाद चेतेश्वर पुजारा की 123 रन शानदार पारी की बदौलत किसी तरह 250 रन तक पहुंचने में सफल रही। इसके बाद टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 235 रन पर समेट 15 रन की बढ़त हासिल की। इसके बाद भारतीय टीम ने अपनी दूसरी पारी में पुजारा और रहाणे के अर्द्धशतक की बदौलत 307 रन का स्कोर खड़ा किया। पहली पारी में 15 रन से पिछड़ने के कारण ऑस्ट्रेलिया को 323 रन का लक्ष्य मिला, जिसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया 291 रन पर सिमट गई। मैच के बाद कप्तान विराट कोहली ने इस जीत के लिए सभी खिलाड़ियों की तारीफ की लेकिन गेंदबाजों की विशेष तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि चार गेंदबाजों के साथ खेलकर विपक्षी टीम के 20 विकेट निकालना बहुत बड़ी उपलब्धि है। गेंदबाजों के इस प्रदर्शन को देखते हुए अब बल्लेबाजों पर ज्यादा दबाव है कि वे अच्छा स्कोर खड़ा करें ताकि गेंदबाजों को विरोधी को आउट करने का पर्याप्त मौका मिल सके।

चार मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट मैच में भारतीय टीम द्वारा दिए गए 323 रन के लक्ष्य के जवाब में पांचवें दिन ऑस्ट्रेलिया की पूरी पारी 291 रन पर सिमट गई। पांचवें दिन ऑस्ट्रेलिया ने थोड़ा संघर्ष जरूर किया लेकिन जिस तरह से भारतीय गेंदबाजों ने गेंदबाजी की, उसके सामने टिकना बिल्कुल आसान नहीं था। 5वें दिन भारत को जीत के लिए 6 विकेट की दरकार थी तो ऑस्ट्रेलिया को 219 रन बनाने थे। भारत को पहली सफलता के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा और इशांत शर्मा ने पहली पारी के हीरो ट्रेविस हेड को अंजिक्ये रहाणे के हाथों कैच आउट करवा दिया।

इसके बाद कप्तान टिम पेन और शॉन मार्श ने थोड़ा संघर्ष किया लेकिन उनकी ये कोशिश नाकाफी साबित हुई। जसप्रीत बुमराह ने भारत को दिन की सबसे बड़ी सफलता दिलाते हुए शॉन मार्श को विकेटकीपर ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट करवाया, इसके बाद इसी गेंदबाज ने ऑस्ट्रेलिया के कप्तान टिम पेन को भी पवेलियन भेजा।मोहम्मद शमी ने मिचेल स्टार्क को आउट कर भारत को 8वीं सफलता दिलाई। जसप्रीत बुमराह ने सैट बल्लेबाज पैट कमिंस को आउट कर ऑस्ट्रेलिया की उम्मीद धूमिल कर दी और आखिर में अश्लिन ने हेजलवुड को आउट कर ऑस्ट्रेलिया की पारी 291 पर ऑल आउट कर कर दी। चौथे दिन के खेल शुरू हुआ तो पुजारा और रहाणे ने भारत के स्कोर को आगे बढ़ाया। पुजारा और रहाणे ने अर्द्धशतक जड़े। हालांकि इन दोनों के बाद भारत के निचले क्रम के बल्लेबाज नहीं चल पाए। टीम ने अपने आखिरी चार विकेट चार रन के अंदर गंवा दिए। पुजारा ने 71 और रहाणे ने 70 रन बनाए। इन दोंनों की मदद से भारत 307 रन बनाने में सफल रहा। वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए नाथन लियोन ने 122 रन देकर छह और मिशेल स्टार्क ने 40 रन देकर तीन विकेट लिए।

चौथे दिन आस्ट्रेलिया की दूसरी पारी दिन की समाप्ति तक भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने 15 रन देकर दो और रविचंद्रन अश्विन ने 44 रन देकर दो-दो विकेट लेकर भारत को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं। मार्श और हेड ने हालांकि अंतिम घंटे में भारतीय गेंदबाजों के सामने कड़ी परीक्षा से गुजरकर मैच के रोमांचक अंत की उम्मीदें भी जगाई। लेकिन पांचवें दिन ऑस्ट्रेलियाई टीम ने संघर्ष तो किया पर लक्ष्य को पाने में सफल नहीं हो पाई। भारत की ओर से गेंदबाजी में शमी,बुमराह और अश्विन ने तीन-तीन विकेट लिए तो इशांत शर्मा को एक विकेट मिला। पुजारा को पहली पारी में शतक और दूसरी पारी में अर्धशकीय पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।

इससे पहले साल 2008 में ये मौका आया था जब दुनिया की सबसे तेज पिच में शुमार पर्थ की पिच पर अनिल कुंबले की अगुआई वाली भारतीय टेस्ट टीम ने यादगार जीत दर्ज की थी। टीम इंडिया ने 2008 में ऑस्ट्रेलियाई टीम को आखिरी बार ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर मात दी थी। उस मैच में भारत ने 72 रनों से जीत दर्ज की थी। उस जीत को मिलाकर आज से पहले भारतीय टीम ने अपने टेस्ट इतिहास में ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर सिर्फ 5 टेस्ट मैच जीते थे और अब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में अपनी छठी टेस्ट जीत करके शानदार अंदाज में छक्का लगाया है। ये जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि ये सीरीज के पहले ही मैच में मिली है और आने वाले बाकी तीन टेस्ट मैचों में भारतीय खिलाड़ी बढ़े हुए मनोबल के साथ मैदान पर उतर सकेंगे।

भारतीय टेस्ट टीम ने ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर अपने इतिहास की पहली टेस्ट जीत 1977 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर हासिल की थी। उस सीरीज में टीम इंडिया सीरीज के पहले दो टेस्ट मैच गंवा चुकी थी लेकिन तीसरे टेस्ट में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 222 रनों से विशाल जीत दर्ज करते हुए इतिहास रचा था। उस मैच में बल्लेबाज सुनील गावस्कर और गेंदबाज बीएस चंद्रशेखर स्टार बने थे। मैच की पहली पारी में भारत 256 रनों पर सिमटा था, इसके बाद कंगारू टीम पहली पारी में 213 रन पर सिमट गई। चंद्रशेखर ने इस पारी में 52 रन देकर 6 विकेट लिए थे। दूसरी पारी में गावस्कर ने 118 रन बनाते हुए ऑस्ट्रेलिया के सामने 387 रनों का लक्ष्य रखा और फिर दूसरी पारी में कंगारू टीम को 164 रन पर पस्त करते हुए मैच जीत लिया। ठीक पहली पारी की तरह दूसरी पारी में भी चंद्रशेखर ने 52 रन देकर 6 विकेट लिए। टीम इंडिया ने 1977 में ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर अपनी पहली जीत दर्ज की थी जिससे उनके हौसले बुलंद हो चुके थे।

अगले साल 1978 में जब भारतीय टीम फिर ऑस्ट्रेलिया पहुंची तो इस बार सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में इतिहास दोहराया गया। भारत ने इस बार सीरीज का चौथा टेस्ट मैच जीता। भारत ने उस मैच में पारी और 2 रन से जीत दर्ज की थी। इस बार चंद्रशेखर और बिशन सिंह बेदी की गेंदबाजी ने कहर बरपाया। ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में कुल 131 रन पर सिमट गई थी। भारत ने अपनी पहली पारी में 8 विकेट पर 396 रन पर पारी घोषित कर थी। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया 263 रनों पर सिमट गया और उसने पारी और 2 रन से मैच गंवा दिया। चंद्रशेखर ने 6, बेदी और प्रसन्ना ने 5-5 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया था। भारतीय टीम जब 1981 में मेलबर्न के मैदान पर पहुंची तो इस मैदान पर 1977 की जीत ज्यादा पुरानी नहीं हुई थी। टीम इंडिया को यहां जीतना आता था। मैच की पहली पारी में गुंडप्पा विश्वनाथ के 114 रनों के दम पर भारत 237 रन बनाकर ऑलआउट हुआ। फिर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में419 रन बना डाले। दूसरी पारी भारत 324 रन पर सिमटा जिस दौरान सुनील गावस्कर को 70 रनों के स्कोर पर एलबीडब्ल्यू आउट दिया गया और ये विवादित फैसला भी बना जिसे खूब सुर्खियां भी मिलीं। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को कुल 143 रनों का लक्ष्य दिया लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने गजब का प्रदर्शन किया और मेजबान टीम को कुल 83 रन पर ऑल आउट करते हुए मैच 59 रन से जीत लिया।  चौथी पारी में कपिल देव ने 28 रन देते हुए 5 विकेट लिए। ये भारत की ऑस्ट्रेलिया में बेहतरीन जीत थी।

भारत ने मेलबर्न और सिडनी के मैदान पर टेस्ट जीत दर्ज कर ली थी और एक बार फिर 2003 में बारी आई एडिलेड ओवल मैदान की। सौरव गांगुली की कप्तानी वाली उस टीम ने इतिहास रचा था। मैच की पहली पारी में रिकी पोंटिंग के 242 रनों की पारी के दम पर कंगारुओं ने 556 रनों का स्कोर खड़ा किया जिस दौरान कुंबले ने 5 विकेट लिए। जवाब में भारत ने पहली पारी में 523 रन बना डाले जिसमें राहुल द्रविड़ ने ऐतिहासिक दोहरा शतकजड़ा और 233 रनों की पारी खेली। वहीं लक्ष्मण ने 148 रनों की पारी खेली। आस्ट्रेलया की दूसरी पारी में भारतीय तेज गेंदबाज अजीत अगरकर 6 विकेट के कहर के आगे कंगारू टीम 196 रन पर सिमट गई और भारत को 230रनों का लक्ष्य मिला। अपनी दूसरी पारी में टीम इंडिया ने 72.4 ओवर में 6 विकेट खोते हुए लक्ष्य हासिल कर लिया और एक बार फिर द्रविड़ ने नाबाद 72 रनों की पारी खेलकर टीम को 4 विकेट से मिली यादगार जीत तक पहुंचाया।

इसके बाद करीब पांच साल बाद जब टीम इंडिया 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंची तो दुनिया की सबसे तेज पिच वाका पर भारत ने इतिहास रचा। भारत इससे पहले मेलबर्न, सिडनी और एडिलेड में जीत दर्ज कर चुका था, इस बार पर्थ की बारी थी। ये उस टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच था। भारत ने राहुल द्रविड़ के 93 रनों की मदद से पहली पारी में 330 रन बनाए, जवाब में कंगारु अपनी पहली पारी में 212 रन पर ही सिमट गए। इस दौरान आरपी सिंह ने सर्वाधिक 4 विकेट लिए। फिर दूसरी पारीमें लक्ष्मण के 79 रनों व तीसरे नंबर पर अचानक बल्लेबाजी करने उतरे इरफान पठान की 46 रनों की पारी के दम पर भारत ने 294 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 413 रनों का लक्ष्य दे डाला। अपनी दूसरी पारी में कंगारू टीम ने कोशिश तो काफी की लेकन वे 340 रन पर सिमट गए। भारत ने यह मैच 72 रनों से जीता। इस दौरान इरफान पठान ने 3 विकेट लिए। पठान ने मैच में कुल 5 विकेट लिए और दूसरी पारी में शानदार बल्लेबाजी भी की, जिसके साथ ही वो मैन ऑफ द मैच भी बने।और अब वर्ष 2018 के अंत में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक बार फिर से एडिलेड में खेले गए चार मैचों की सीरीज के पहले ही टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने इतिहास रचते हुए ऑस्ट्रेलिया को 31 रनों से हरा दिया। जो भारत ने ऑस्ट्रेलिया में पिछले 86 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका और ऑस्ट्रेलिया में अपनी छठी टेस्ट मैच जीत करके शानदार अंदाज में जीत का छक्का लगाया है।

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