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पहली अरब महिला बास्केटबाॅल रेफ्री

इस बार ओलिम्पिक के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब बास्केटबाॅल के खेल में अरब की महिला ‘रेफ्री’ के तौर पर नजर आएंगी। 32 वर्षीय साराह गामल, मिस्र की रहने वाली हैं और वे अरब की पहली महिला बास्केटबाॅल रेफ्री हैं जो टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में हिस्सा लेंगी।

साराह बताती हैं कि ‘इस यात्रा में सबसे नकारात्मक बात जो मुझे हमेशा सुनाई जाती है वो ये कि मैं इस दौरान हिजाब पहन कर क्यों रखती हूं।’ लेकिन साराह मानती हैं कि यह तो तभी से सुन रही हूं जब से हिजाब पहन कर रेफरिंग कर रही हूं। यह मेरे लिए बड़ी बात है कि मैं अफ्रीका और अरब की देशों की महिलाओं के जज्बे को बढ़ाने का काम कर रही हूं।

लोगों को इसमें दिलचस्पी है कि पहली बार काला हिजाब पहने, एक स्पोर्ट कंपनी के लोगो छपे हुए कपड़े पहने कोई महिला इस खेल में नजर आएगी, बल्कि उन्हें यह देखना चाहिए कि यहां तक पहुंचने के लिए हम जैसे महिलाओं को किन-किन संघर्षों से गुजरना पड़ता है। वे एक मीडिया संस्थान से अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहती हैं कि ‘मुझे शुरू से ही हिजाब पहनने को लेकर कई बातें सुनाई गईं। पर यह तो सामान्य बात है, भला इससे लोगों को क्या समस्या होती है?’

साराह गमल के पास ऐसे न कितने कड़वे अनुभव होंगे, लेकिन एक असली खिलाड़ी की तरह साराह कभी पीछे नहीं हटीं। साराह, फीबा वल्र्ड युथ कप 2018 जो बेलारूस में हुआ था उसमें भी रेफ्री की भूमिका निभा चुकी हैं। साथ ही वर्ष 2017 में साराह, अफ्रीकन वुमेन्स चैंपियनशिप में भी हिस्सा ले चुकी हैं। यह सब सफर का वो मोड़ है जहां साराह न जाने कितनी औरतों को हिम्मत और हौसला दे, उन्हें प्रेरित करती होंगी।

वो कहती हैं कि ‘आज तक उन्हें उनके हिजाब की वजह से किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई। टूर्नामेंट में हर बार वे हिजाब पहनती हूं और रेफरिंग करती हूं। टोक्यो के लिए भी तैयार हूं, मेरा पूरा ध्यान अपने ट्रेनिंग और इवेंट पर है।’

हालांकि अरब में महिला के अधिकारों की स्वतंत्रता की बात करें तो एक दशक पहले तक स्थितियां काफी बदहाल थीं। सऊदी महिलाओं को वोट देने का अधिकार तो साल 2015 में ही मिल गया था, लेकिन यह वैश्विक स्तर पर काफी देर से लिया गया निर्णय था। 2018 में उनके हाथों में ड्राइविंग सीट भी आ गई। फिर उन्हें सिनेमा और स्टेडियम में जाकर फुटबाॅल मैच देखने की इजाजत भी हासिल हो गई। साल बदला और 2019 के पहले नियम लागू हुआ कि सऊदी अरब में कोई पुरुष अपनी पत्नी को जानकारी दिए बिना तलाक नहीं ले सकेगा। यानी आगे से ऐसे ‘सीक्रेट डिवोर्स’ नहीं होंगे जिसके बारे में संबंधित महिला को जानकारी न हो। यह वे बड़े बदलाव हैं जिससे वहां की महिलाओं के बंद जिंदगियों में रौनक के साथ-साथ खुली सांस का एक नया अनुभव लेकर आया।

साराह भी मानती हैं कि वे जहां से आती हैं वहां से आकर ऐसी जगह पहुंचकर इनकी जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं, क्योंकि आपको सिर्फ खुद को ही नहीं साबित करना होता, बल्कि आपके पीछे है आपके वर्ग का भविष्य। मेरी तैयारियां कहती हैं कि मुझे अब किसी से कोई डर नहीं, मैं बिल्कुल घबराई हुई नहीं हूं, बस पहले से ज्यादा जिम्मेदार महसूस कर रही हूं। साराह को हिम्मत देने के लिए उन्हें देश-विदेश से अनेक शुभकामनाएं और बधाइयां मिल रहीं हैं। अंततः खुद ही कहती हैं कि इस बार ओलंपिक इतिहास रचने जा रहा है और उन्हें गर्व है कि वे उसका हिस्सा होंगी।

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