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ऑस्ट्रेलिया में होगी अग्नि-परीक्षा

भारतीय क्रिकेट टीम कंगारुओं की धरती पर कदम रख चुकी है। रोहित ब्रिगेड के पास एक मात्र लक्ष्य 15 साल बाद एक बार फिर टी-20 वर्ल्ड कप पर कब्जा करना है। ऑस्ट्रेलियाई धरती पर 16 अक्टूबर से आईसीसी ट्रॉफी के लिए कसरत शुरू हो जाएगी। लेकिन इस बड़े टूर्नामेंट में उसे कई चुनौतियों का सामना करना होगा। क्योंकि साल 2022 की शुरुआत से ही चोटिल खिलाड़ियों की वजह से कप्तानी में बदलाव के चलते टीम का प्रदर्शन भी प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में खेल जानकारों का कहना है कि टीम इंडिया के साथ-साथ नए कप्तान और नए कोच की भी अग्नि-परीक्षा टी-20 वर्ल्ड कप में होगी, क्योंकि एशिया कप की परीक्षा में तो वह पूरी तरह विफल रही है

भारतीय क्रिकेट टीम रोहित शर्मा की कप्तानी और कोच राहुल द्रविड़ की कोचिंग में इस साल के शुरुआत से ही लगातार बदलाव के दौर से गुजर रही है। साल 2022 की शुरुआत से ही चोटिल खिलाड़ियों की वजह से कप्तानी में बदलाव के चलते टीम का प्रदर्शन भी प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। नए कप्तान और नए कोच के साथ टीम की असल परीक्षा टी-20 वर्ल्ड कप में होगी, क्योंकि एशिया कप की परीक्षा में तो टीम इंडिया पूरी तरह विफल रही है। हालांकि कप्तान रोहित शर्मा का रिकॉर्ड बतौर कप्तान अच्छा कहा जा सकता है लेकिन शुरुआती जीतों के बाद भी टीम एशिया कप में सुपर 4 स्टेज से बाहर हो गई। इस पूरे टूर्नामेंट में रोहित शर्मा का बल्ला भी खामोश ही रहा। उनके बल्ले से कोई खास बड़ी पारी देखने को नहीं मिली। ऐसे में अगर टीम को टी-20 वर्ल्ड कप में जीत दर्ज करनी है तो टीम के कोच और कप्तान दोनों को एक नई रणनीति के साथ वापसी करनी होगी।

दरअसल इस बार ऑस्ट्रेलिया में होने वाले फटाफट क्रिकेट के महाकुंभ की उल्टी गिनती शुरु हो गई है। इसमें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए भारतीय टीम भी कंगारुओं की धरती पर कदम रख चुकी है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि रोहित के पास एकमात्र लक्ष्य 15 साल बाद इसके लिए एक बार फिर टी-20 वर्ल्ड कप पर कब्जा करना है। ऑस्ट्रेलियाई धरती पर 16 अक्टूबर से जद्दोजहद शुरू हो जाएगी। हाल ही में एशिया कप के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में हुई किरकिरी के बाद भारतीय टीम अपने घर में ऑस्ट्रेलिया और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज जीतकर प्रशंसकों को राहत जरूर दी है लेकिन इस टूर्नामेंट में उसे कई चुनौतियों का सामना करना होगा।

पिछले टी-20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज से ही बाहर होने के बाद से टीम इंडिया ने द्विपक्षीय टी-20 सीरीज में बेहतर प्रदर्शन दिखाया। यूएई में पिछले साल विराट ब्रिगेड की बेइज्जती के बाद से रोहित शर्मा की अगुआई में भारतीय टीम ने अपराजय रहते हुए एक के बाद एक 8 द्विपक्षीय टी-20 सीरीज अपने नाम किया है। इसी कड़ी में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया पर 2-1 से सीरीज जीत बेहद खास मानी जा सकती है, हालांकि कंगारू टीम अपने कई स्टार खिलाड़ियों के बिना इस सीरीज में उतरी थी। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि टीम इंडिया टी-20 वर्ल्ड कप के लिए पूरी ताकत झोंकते हुए खिताबी दौड़ में खुद को आगे रखेगी। क्योंकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपने घर में पहली बार टी-20 सीरीज जीत के बावजूद भारतीय टीम प्रबंधन की टेंशन कम नहीं हुई है। दरअसल, विश्व कप में उतरने से पहले ही भारतीय टीम को कई झटके लग चुके हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि चोट के कारण तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के इस बड़े टूर्नामेंट से बाहर हो जाने से टीम का संतुलन बिगड़ गया है।

गौरतलब है कि इस महाकुंभ में कप्तान और कोच का अपनी-अपनी पोस्ट संभालना कोई ज्यादा पुरानी बात नहीं है, इसीलिए कहा जा रहा है कि ‘हनीमून’ खत्म और अब परीक्षा का सामना करने का समय आ गया है। जब दोनों ने अपने पद ग्रहण किए थे तब कहा गया था कि दोनों के साथ भारतीय क्रिकेट में एक नया युग शुरू हो रहा है और ये विराट कोहली-रवि शास्त्री से ज्यादा कामयाब रहेंगे। रोहित और द्रविड़ दोनों ही इस सीनियर ड्यूटी से पहले अपनी क्षमता साबित कर चुके थे और इसीलिए उम्मीद और भी ज्यादा हो गई थी। नौबत यह आ गई है कि जहां एक ओर कहा जा रहा है कि टी-20 वर्ल्ड कप का नतीजा चाहे जो रहे, भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए रोहित शर्मा को कप्तानी अपने आप छोड़ देनी चाहिए, वहीं राहुल द्रविड़ के साथ ‘भारत की क्रिकेट का सबसे काला दौर’ वापस लौटने जैसी बात हो रही है। यह कहा जाना कि वे टीम इंडिया के लिए अगले ग्रेग चैपल साबित होंगे, भले ही कुछ ज्यादा है पर सोच यहां तक पहुंच चुकी है, यह चेतावनी है।

ऐसी सोच की सबसे खास वजह है 2022 एशिया कप में निराशाजनक प्रदर्शन, जिस टूर्नामेंट को जीतने गए थे, उसका फाइनल भी नहीं खेल सके। इस नतीजे ने टीम के हर डिपार्टमेंट की कई खामियां उजागर की। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अपनी पिचों पर शुरुआती टी-20 इंटरनेशनल में 208 के विशाल स्कोर का बचाव करते हुए भी हार ने सवाल खड़े कर दिए हैं। रोहित शर्मा की कप्तानी पर सवाल हैं तो द्रविड़ के कोचिंग के तरीके पर भी तसल्ली नहीं। रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ उस तरह के नतीजे देने में नाकामयाब रहे हैं जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी। इसलिए विशेषज्ञ की बात सीधे टी-20 वर्ल्ड कप पर आ जाती है, यानी कि टीम इंडिया के लिए टी-20 का खिताब जीतना बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

भारत की आईसीसी इवेंट्स में कामयाबी की बात करते हुए इन दोनों के नाम के साथ सवाल एक ही जुड़ता है। क्या इस बार जीतेंगे? चुनौती जितनी बड़ी टीम के लिए है, उतनी ही कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ के लिए भी है। क्योंकि दोनों का पहला बड़ा इम्तिहान है। हर बार वह ‘प्रयोग और वर्ल्ड कप की तैयारी’ से जोड़कर चुप तो कराते आ रहे हैं, पर अब उन सभी प्रयोग का नतीजा सामने लाने का समय आ गया है। एशिया कप वेक-अप कॉल था और टीम सुपर 4 में पाकिस्तान और श्रीलंका दोनों से हार के बाद फाइनल भी नहीं खेल सकी।

इसीलिए कहा जा रहा है कि रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ के लिए हनीमून खत्म और अब टिके रहने की चुनौती सामने है। आईसीसी इवेंट में कामयाबी मिले, यही तो लक्ष्य था रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ को लाते हुए। ऐसा नहीं है कि उनके साथ टीम कामयाब नहीं रही, पर जहां जीत की सख्त जरूरत थी वहां नहीं जीते। खास तौर पर राहुल द्रविड़ के जिस जादुई ‘टच’ की उम्मीद थी, वह नजर नहीं आया। गलत खिलाड़ियों के साथ, बगैर जीत की भूख के खेलती नजर आई टीम।

बात साफ है, दोनों के साथ बहुत संयम दिखा दिया और उनका टीम इंडिया के कप्तान और कोच के तौर पर कामयाबी का ग्राफ तभी सही होगा जब टीम आईसीसी इवेंट जीते और इसीलिए टी-20 वर्ल्ड कप चुनौती है। एशिया कप में प्रदर्शन के बाद सवाल, क्या अब भी टाइटल के लिए फेवरेट है? अब जबकि टी-20 वर्ल्ड कप के मैच कुछ ही दिन दूर, तब भी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध मैचों में अपनी आखिरी इलेवन को मौका देने की जगह टीम प्रयोग करती नजर आई। मिडिल ऑर्डर तय नहीं, प्लेइंग इलेवन के लिए नंबर 1 विकेटकीपर तय नहीं और जडेजा की जगह कौन लेगा, यह तय नहीं।

किसी भी कप्तान या कोच के लिए इस हाई-प्रोफाइल क्रिकेट टीम की जिम्मेदारी आसान चुनौती नहीं है। ऐसे में दोनों को ढेरों खिलाड़ियों के साथ टीम को संभालना पड़ेगा। कई बदलाव और प्रयोग हुए पर अच्छे कप्तान और कोच की पहचान तो यही है कि टीम पर इसका असर न आने दें। रिपोर्ट कार्ड में सिर्फ मैचों और आईसीसी इवेंट के नतीजे देखे जाते हैं। इसलिए जहां द्रविड़ को साबित करना है, वे सिर्फ अंडर 19 को टाइटल दिलाने वाले कोच नहीं, वहीं रोहित शर्मा को साबित करना है वे सिर्फ आईपीएल टाइटल जीतने वाले कप्तान नहीं। राहुल द्रविड़ का कॉन्ट्रैक्ट अगले साल के 50 ओवर के वर्ल्ड कप तक है इसलिए वे वर्ल्ड कप तक तो टीम के साथ रहेंगे ही और टीम को एक नई अस्थिरता से बचाने के लिए रोहित को भी तब तक के लिए टीम का कप्तान बनाए रखना होगा। इसलिए हाल फिलहाल किसी बदलाव की बात न कर टीम को जीत की राह पर ले जाने की बात करें।

इनकी कमी जरूर खलेगी

खासकर डेथ ओवरों में अपने ‘अचूक यॉर्कर’ से बल्लेबाजों को चित करने वाले बुमराह की कमी जरूर खलेगी, जबकि ऑस्ट्रेलिया के बड़े मैदानों पर जडेजा की गैरमौजूदगी तीनों विभागों (बॉलिंग-फीलि्ंडग-बैटिंग) में महसूस की जाएगी। उनकी जगह रखे गए अक्षर पटेल के लिए अपनी सफलताओं को वहां दोहराना आसान नहीं होगा, हालांकि उन्होंने भारतीय परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन कर दिखाया है। उल्लेखनीय है कि अक्षर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज के तीन मैचों में 8 विकेट चटकाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे।

सबसे बड़ी चिंता डेथ बॉलिंग

डेथ बॉलिंग भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। माना जा रहा है कि डेथ ओवर्स में अर्शदीप सिंह की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। अर्शदीप ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के पहले दो मैचों में खूब रन लुटाए। हालांकि बाएं हाथ के इस नवोदित पेसर ने तिरुवनंतपुरम में अपने पहले ही ओवर में 3 विकेट लिए। इसके बाद गुवाहाटी में भी उन्होंने अपने पहले ओवर में 2 विकेट लेकर 238 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही अफ्रीकी टीम को बैकफुट पर धकेल दिया था। इंदौर के अपेक्षाकृत छोटे होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे मैच में भारत के तेज आक्रमण का जिम्मा संभाल रहे दीपक चहर, मोहम्मद सिराज, उमेश यादव और हर्षल पटेल ने 11 से ज्यादा की इकोनॉमी से रन लुटाए।

असली ताकत उसकी बैटिंग
स्पष्ट है कि टीम इंडिया की असली ताकत उसकी बल्लेबाजी है। भारतीय बल्लेबाजों ने पिछले कुछ मैचों में अपनी छाप छोड़ी है। कमजोर कड़ी साबित हो रहे सलामी बल्लेबाज केएल राहुल फॉर्म में लौटने के संकेत दे चुके हैं। चौथे नंबर पर सूर्यकुमार यादव बड़ी शक्ति बनकर उभरे हैं। रोहित और विराट कोहली भी टीम के हिसाब से बल्ला चला रहे हैं। दूसरी तरफ दिनेश
कार्तिक को जितने भी मौके मिले, उनका उन्होंने भरपूर फायदा उठाया है।

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