sport

इतिहास रचने से एकदम दूर

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट  मैचों की मौजूदा टेस्ट सीरीज अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। भारत तीन मैचों के बाद सीरीज में 2-1 से आगे है, सिडनी में खेला जाने वाला यह चौथा टेस्ट निर्णायक हो गया है। भारत को ऑस्ट्रेलिया में पहली टेस्ट सीरीज जीतने के लिए इस मैच में जीत या ड्रॉ चाहिए, ऑस्ट्रेलिया को हार टालने के लिए हर हाल में जीत की जरूरत है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक बेहद रोमांचक सीरीज खेली गई है, ऐसे में सिडनी में खेले जा रहे सीरीज के अंतिम टेस्ट मैच पर खेल प्रेमियों की निगाहें टिकी रहेंगी। अगर हम इस मैदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा बेहद भारी है। उसने इस मैदान पर हमें पांच बार हराया है, जबकि हम उसे सिर्फ एक बार ही यहां मात दे पाए हैं। हालांकि इसके बावजूद अच्छी बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया में सिडनी ही वह मैदान है, जहां भारत के बल्लेबाज खुद को सहज पाते हैं।
भारत ने सिडनी में अब तक 11 टेस्ट मैच खेले हैं, इनमें से वह सिर्फ एक मुकाबला ही जीत सका है, भारत को यह जीत 40 साल पहले, यानी 1978 में बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में मिली थी। बाकी 10 मैचों में पांच मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीते हैं, बाकी पांच मैच बराबरी पर खत्म हुए। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैदान पर कुल 106 टेस्ट मैच खेले हैं। उसने इनमें से 59 मैच जीते हैं। बाकी मैचों में से 28 में उसे हार मिली, जबकि 19 ड्रॉ रहे हैं। भारत ने 1978 के बाद से यहां आठ टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन उसे अब तक जीत का इंतजार है। भारत ने 1978 में सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को पारी और 2 रन से हराया था, यह भारत की ऑस्ट्रेलिया में उसके खिलाफ दूसरी जीत थी। भारत की इस जीत के हीरो उसके स्पिनर थे। भारत की तीन स्पिनरों, कप्तान बिशन सिंह बेदी, भगवत चंद्रशेखर और इरापल्ली प्रसन्ना ने कुल मिलाकर 17 विकेट झटके थे। दो विकेट मीडियम पेसर करसन घावरी और एक विकेट मोहिंदर अमरनाथ ने लिए थे। ऐसे में यहां स्पिनरों का बोल-बाला रहा है।
इस निर्णायक  टेस्ट के लिए टीम में ओपनर  केएल राहुल की वापसी हुई है। वहीं रोहित शर्मा पिता बनने के वजह से मुंबई लौट गए हैं, वे इस टेस्ट में नहीं खेल सकेंगे। टीम में अभी तीनों स्पिनर आर अश्विन, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव को शामिल किया गया है। इसीलिए शायद विराट ने एहतियात के तौर पर कुलदीप यादव को भी टीम में शामिल किया है। जिससे जरूरत पड़ने पर वे दो स्पिनर्स के साथ मैच में उतर सकें। वहीं इस मैच के लिए टीम इंडिया के प्रमुख तेज गेंदबाज इशांत शर्मा को शामिल नहीं किया है। उनकी जगह उमेश यादव को जगह मिली है। उमेश यादव को पर्थ टेस्ट में खिलाया गया था, लेकिन वे पर्थ में प्रभावी प्रदर्शन करने में नाकाम रहे थे। इस मैच में टीम इंडिया की 141 रनों से करारी हार हुई थी। इसके बाद मेलबर्न टेस्ट में उमेश यादव को प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया था। मेलबर्न टेस्ट में जसप्रीत बुमराह के शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 137 रनों से मात दी थी।
इससे पहले मेहमान टीम ऑस्ट्रेलिया में सात बॉक्सिंग डे टेस्ट का हिस्सा रही और इनमें से 5 मैचों में उसे हार झेलनी पड़ी, जबकि 2 मैच का ड्रा पर समाप्त हुए। रिकॉर्ड पर निगाह डालें तो मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर जीत के लिए भारतीय टीम को 37 सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा था। उसे यहां आखिरी बार 1981 में जीत मिली थी। दूसरी ओर, टेस्ट क्रिकेट में यह भारत की 150वीं जीत थी।
यह पहली बार हुआ, जब भारतीय टीम ने दोनों पारियां घोषित करने के बाद विदेश में टेस्ट मैच अपने नाम किया। इससे पहले 2004 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए टेस्ट में भारत (705/7 – 211/2) ने दोनों पारी घोषित की थी, जबकि 2007 में चिट्टगांव में बांग्लादेश के खिलाफ ऐसा किया था। लेकिन दोनों ही मौकों पर मैच ड्रॉ रहा था। इस बार भारतीय टीम ने जीत हासिल करने में कामयाबी हासिल की।
भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा है कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतना काफी बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि इसी मैदान से उनकी कप्तानी में टीम में बदलाव के दौर की शुरुआत हुई थी। महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास लेने के बाद कोहली ने चार साल पहले इसी मैदान पर भारतीय टेस्ट कप्तान के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। भारत तब दुनिया की सातवें नंबर की टीम थी, और अब इस प्रारूप में दुनिया की नंबर एक टीम है। टीम इंडिया चार मैचों की सीरीज में 2-1 की अजेय बढ़त के साथ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को अपने पास बरकरार रखना तय कर चुकी है।
कोहली ने कहा, ‘सिर्फ चार साल हुए हैं मुझे कप्तानी संभाले अगर ऐसा होता है तो यह शानदार होगा। क्योंकि मैं तीसरी बार यहां टेस्ट दौरे पर आया हूं और मुझे पता है कि यहां जीतना कितना मुश्किल है।’ भारतीय कप्तान ने कहा, ‘आप ऑस्ट्रेलिया में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन टीम के रूप में जीत दर्ज करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है।  ईमानदारी से कहूं तो पिछले दो दौरों के व्यक्तिगत प्रदर्शन किसी को याद भी नहीं है। अंतिम टेस्ट जीतना प्रदर्शन में निरंतरता हासिल करने की तरफ एक और कदम बढ़ाना होगा, आपका नाम भले ही सम्मान के साथ बोर्ड पर लिखा हो, लेकिन अगर आपकी टीम जीत दर्ज नहीं करती, तो यह मायने नहीं रखता। अब तक यह बड़ी चीज है, बड़ी सीरीज जीत, सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, लेकिन पूरी टीम के लिए भी होगी क्योंकि इसी स्थान पर हमने बदलाव के दौर की शुरुआत की थी।
भारतीय कप्तान ने कहा, ‘इसी स्थल पर जब महेंद्र सिंह धोनी ने 2014 में कप्तानी छोड़ी थी, और हमारी टीम काफी युवा थी, दुनिया की छठे या सातवें (टेस्ट रैंकिंग) नंबर की टीम। हम यहां दुनिया की नंबर एक टीम के रूप में वापस आए हैं और हम इस विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। टीम के लिए जीतना ‘जुनून’ बन गया है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप देखो, तो पिछले मैच में अंतिम विकेट गिरने के बाद सभी की भावनाएं सामने आ गईं, यहां तक कि सबसे कम बोलने वाले खिलाड़ियों की भी। क्योंकि हमें पता है कि एक टीम के रूप में अगर आप एक दिशा में जोर लगाते हो तो चीजें सही होती हैं और यह जुनून होना चाहिए।
सिडनी में भारत के 11 टेस्ट मैचों का प्रदर्शन 
वर्ष विजेता अंतर
1947 ड्रॉ ……..
1968 ऑस्ट्रेलिया 144 रन
1978 भारत पारी – 2 रन
1981 ऑस्ट्रेलिया पारी – 4 रन
1986 ड्रॉ ……..
1992 ड्रॉ ……..
2000 ऑस्ट्रेलिया पारी – 141 रन
2004 ड्रॉ ……..
2008 ऑस्ट्रेलिया 122 रन
2012 ऑस्ट्रेलिया पारी – 68 रन
2015 ड्रॉ ……..

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like