[gtranslate]
sport

छोटी टीमों का बड़ा धमाका

टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद अब फीफा वर्ल्ड कप भी साफ संकेत दे रहा है कि किसी भी टीम को कमजोर आंकने के दिन लद गए हैं। कतर में फुटबॉल वर्ल्ड कप अब अपने दूसरे पड़ाव में प्रवेश कर गया है। इस दौरान दिग्गज टीमें उलट-फेर का शिकार हो गईं। उलट-फेर करने वाली टीमों में पहले सऊदी अरब ने लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना को चौंकाया और अब जापान ने 2014 की वर्ल्ड चैंपियन को 2-1 से हरा दिया। दिलचस्प बात यह है कि जापान ने 0-1 से पिछड़ने के बाद जर्मनी को हराया। ऐसे में सवाल उठता है कि बड़ी टीमें उलट-फेर का शिकार क्यों हो रही हैं? खेल विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय से छोटी टीमों के देशों में सुविधाएं और लीग स्ट्रक्चर बेहतर हुई हैं। टीम के पास अब एनालिटिक्स, फॉरेन कोच और अच्छे ग्राउंड्स की सुविधाएं हैं। इस वजह से वे अब दूसरी टीमों के गेम को भी बारीकी से समझ पा रहे हैं

फीफा विश्व कप 2022 एक नए आयोजन स्थल पर एक नए चैंपियन की ताजपोशी के लिए तैयार है। इस बार फुटबॉल विश्व कप का आयोजन कतर में पहली बार हो रहा है। वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज के मुकाबले खत्म हो चुके हैं। साथ ही 16 टीमें प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी हैं। लेकिन अब तक कोई टीम खिताब की दावेदार नहीं लग रही है। इसका कारण यह है कि छोटी और हल्की मानी जाने वाली कई टीमों ने दिग्गजों को धूल चटाई है।

गौरतलब है कि वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले ब्राजील, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी और बेल्जियम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। लेकिन, जर्मनी और बेल्जियम ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई। अर्जेंट ीना, ब्राजील, स्पेन जैसी टीमें आगे जरूर बढ़ीं लेकिन इन्हें भी लीग स्टेज में हार झेलनी पड़ी।

दरअसल वर्ल्ड कप में छोटी टीमें अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। इसकी मुख्य वजह है इनमें से कई टीमों के कुछ खिलाड़ी बड़े यूरोपियन क्लबों के लिए खेलते हैं। जैसे साउथ कोरिया के हुएंग मं सोन इंग्लैंड के क्लब टॉटेनहेम के लिए खेलते हैं। अब एशियाई, अफ्रीकन और यूरोपियन टीम के बीच ज्यादा बड़ा अंतर नहीं रहा है क्योंकि इन टीमों के अधिकांश खिलाड़ी क्लबों के लिए एक साथ ही खेलते हैं।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी टीमों के देशों में सुविधाएं और लीग स्ट्रक्चर बेहतर हुई हैं। टीम के पास अब एनालिटिक्स, फॉरेन कोच और अच्छे ग्राउंड्स की सुविधाएं हैं। इस वजह से वे अब दूसरी टीमों के गेम को भी बारीकी से समझ पा रहे हैं। इसी का नतीजा है ऑस्ट्रेलिया, जापान, मोरक्को और छोटी टीमों ने इस वर्ल्ड कप में सबको चौकाया और राउंड ऑफ 16 में अपनी जगह पक्की की। आने वाले मुकाबले में और भी बड़े उलट-फेर हो सकते हैं और उसमें किसी को हैरानी भी नहीं होगी। क्या पता कतर के मौसम का फायदा उठाकर कोई एशियाई टीम पहली बार वर्ल्ड चैंपियन भी बन जाए।

टूर्नामेंट से बाहर हुआ बेल्जियम
बेल्जियम फीफा वर्ल्ड कप 2022 से बाहर हो गया। इससे पहले बेल्जियम 2018 वर्ल्ड कप में तीसरे नंबर पर था। वहीं 2014 वर्ल्ड कप में टीम क्वार्टर फाइनल तक गई थी। वर्ल्ड कप की दावेदार माने जाने वाली बेल्जियम टीम का बाहर हो जाना फैंस के लिए निराशाजनक रहा।

अफ्रीकन टीम से पहली बार हारा ब्राजील
फीफा वर्ल्ड कप के ग्रुप-जी के आखिरी मुकाबले में कैमरून ने ब्राजील को 1-0 से हराकर सभी को चौंका दिया। इसी के साथ कैमरून वर्ल्ड कप में ब्राजील को हराने वाला पहला अफ्रीकी देश बन गया। हालांकि जीतने के बावजूद कैमेरून प्री क्वार्टर फाइनल में नहीं पहुंच पाया।

जापान ने किया सबसे ज्यादा हैरान
जापान की टीम इस वर्ल्ड कप में दो पूर्व चैंपियनों को हरा चुकी है। उसने पहले जर्मनी और फिर स्पेन को मात देकर फुटबॉल जगत को स्तब्ध कर दिया। जापान के 5 खिलाडी इंग्लैंड की प्रीमियर लीग और 14 खिलाड़ी स्पेन की ला लिगा में खेलते हैं। इस वजह से उन्हें यूरोप और वहां की फुटबॉल की अच्छी समझ है।

अटैक कम गोल ज्यादा
इस वर्ल्ड कप में पिछले वर्ल्ड कप के मुकाबले कम अटैक करने पर गोल होने का चांस ज्यादा रहा है। फुटबॉल वेबसाइट ऑप्टा एनालिसिस के अनुसार इस बार कम अटैक करने पर ज्यादा गोल मिले हैं। यानी हर गोल के लिए बाकी वर्ल्ड कप की तुलना में कम बार अटैक करना पड़ा है। इस वर्ल्ड कप में एक गोल के लिए एवरेज 8.6 शॉट गोल की तरफ खेले गए। जबकि 2018 में एक गोल स्कोर करने 9.6 और 2014 वर्ल्ड कप में 9.9 शॉट खेलने की जरूरत हुई थी। इसके अलावा वर्ल्ड कप 2002 में एक गोल स्कोर करने के लिए एवरेज 11.2 शॉट गोल की तरफ मारने पड़े थे। छोटी टीमें आमतौर पर अटैक के कम मौके बना पाती हैं। लेकिन, इस कम अटैक पर पर तुलनात्मक रूप से ज्यादा गोल हुए लिहाजा उन्हें फायदा मिला।

वार में गलतियां
इस साल वर्ल्ड कप में वार यानी वर्चुअल असिस्टेंट रेफरी कॉन्ट्रोवर्सी से भरा हुआ है। जापान की स्पेन के खिलाफ कॉन्ट्रोवर्सी और कतर के खिलाफ इक्वाडोर के एनर वेलेंसीया का गोल खारिज करना भी शामिल है। टेक्नोलॉजी होने के बावजूद ऐसे निर्णय लेने की वजह से फैंस में नाराजगी है। वार की गलतियों का फायदा भी छोटी टीमों को मिला है। हालांकि यह कई मौकों पर मजबूत टीमों के पक्ष में भी गया है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD