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फिर उत्तराखण्ड की मेजबानी पर संकट

38वें नेशनल गेम्स

कई सालो के इंतजार के बाद जब पिछले साल गोवा में उत्तराखंड को 38वें नेशनल गेम्स आयोजित कराने की मेजबानी मिली तो सूबे में खेल प्रतिभाओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खिलाड़ियों को खुशी इस बात की थी कि अपने ही प्रदेश में उनको देश दुनिया के सामने चमकने का मौका मिलेगा। साथ ही नेशनल गेम्स आयोजित होने से राज्य की बेहतर पहचान बनेगी तथा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ट्टाामी ने इस बाबत समीक्षा बैठक कर सभी तैयारियों को पूरा कराने के भी आदेश दिए। फिलहाल प्रदेश में 38वें नेशनल गेम्स के आयोजन को लेकर सभी इंफ्रास्ट्रक्टर भी तैयार है। लेकिन नेशनल गेम्स की मेजबानी पर अभी भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा नेशनल गेम्स लगातार टाले जा रहे है। बावजूद इसके कि ट्टाामी सरकार की तरफ से कई बार इस बाबत ओलंपिक संघ को पत्र लिखे जा चुके है। डर है कि कही 2018 और 2021 की तरह एक बार फिर उत्तराखण्ड से राष्ट्रीय खेलो की मेजबानी ना छिन जाए

उत्तराखण्ड को खेल में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रदेश की प्रतिभाए आगे आती रहती है लेकिन इस पहाड़ी प्रदेश में नेशनल गेम्स कराने का अगर किसी ने पहली बार सोचा तो वो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत है। रावत के कार्यकाल में राष्ट्रीय खेलो के आयोजन के लिए हल्द्वानी से लेकर टिहरी तक इंफ्रास्टचर खड़ा किया गया। हल्द्वानी ने अंतरर्राष्टीय स्तर का स्टेडियम बनाया गया तो टिहरी झील में 200 करोड़ खर्च कर वाटर सपोर्टड की तैयारी की गई। जिसके तहत ही एक पानी पर तैरता हुआ फाइव स्टार होटल भी बना। पिथौरागढ़ और टिहरी में स्पोर्ट्स कॉलेज भी बनाए गए। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राष्टीय खेलो का आयोजन कराने की योजना 2014 में ही कर दी थी। लेकिन तब आधी अधूरी तैयारी के चलते खेल टाल दिए गए थे। कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनावों में इसको अपने वादे में भी शुमार किया था। हरीश रावत ने 2017 के विधानसभा चुनावों में कहा था कि अगर उनकी सरकार फिर से सत्ता में आती है तो 2018 में उत्तराखण्ड में नेशनल गेम्स आयोजित करा दिए जाएंगे।

2017 में कांग्रेस की सरकार तो आई नहीं लेकिन सत्ता में आई त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने इस तरफ कोई खास ट्टयान नहीं दिया। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने सूबे में राष्ट्रीय खेल कराने की योजना पर काम किया। यहां तक कि पिछले साल खेल मंत्री रेखा आर्य को गोवा में आयोजित हुए 37वंे नेशनल गेम्स के दौरान अगले खेलो का आयोजन उत्तराखण्ड में कराने की मेजबानी भी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री धामी ने इस पर गंभीरता से काम भी किया है। इस संबंध में कई समीक्षा बैठक आयोजित की जा चुकी है। सरकार की तरफ से भारतीय ओलंपिक संघ को कई पत्र लिखे जा चुके है। जिसमे स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि उत्तराखण्ड 38वें नेशनल गेम्स कराने के लिए तैयार है। बस इंतजार है तो भारतीय ओलंपिक संघ की हरी झंडी का। लेकिन फिर भी ना जाने क्यों भारतीय ओलंपिक संघ इस मामले में चुप्पी साट्टा रहा है। चर्चा यह है कि कही पूर्व की भांति एक बार फिर से उत्तराखण्ड से राष्ट्रीय खेलो की मेजबानी छीनने की तैयारी तो नहीं की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खेलो के आयोजन के प्रति गंभीरता को इससे समझा जा सकता है कि उन्होंने गत 7 फरवरी को ही राष्ट्रीय खेलों के आयोजन की तैयारियों के संबंट्टा में इस साल की पहली समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए राज्य स्तरीय खेलों का आयोजन इससे पहले किया जाए। जो खिलाड़ी दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं, उन्हें अपने राज्य से खेलने को प्रेरित किया जाए। राज्य में युवा खिलाडियों के व्यापक हित में तैयार की गई खेल नीति का प्रचार-प्रसार किया जाए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि जी-20 के सफल आयोजन की भांति यह आयोजन भी सफलतापूर्वक संपन्न हो। इससे राज्य की बेहतर पहचान बनेगी तथा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस आयोजन के लिए अभी से वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों और इस वर्ष गोवा में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय खेलों की व्यवस्था का भी अट्टययन किया जाए। इस बात का ध्यान रखा जाए कि प्रदेश में होने वाले राष्ट्रीय खेल पर्यटन के साथ ही राज्य की संस्कृति के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनें।

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में होने वाले 38वें राष्ट्रीय खेलों पर लगभग 450 करोड़ रुपये का खर्चा होगा । इसमें 91 करोड़ रुपये की धनराशि भारत सरकार ने पहले ही उपलब्ध करा दी है। जबकि शेष धनराशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। राष्ट्रीय खेलों में 38 खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें स्वीकृत 34 खेलों के अलावा योग, कराटे, मलखंब एवं एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, कयाकिंग, कैनोइंग, बास्केटबॉल, वालीबॉल, बैडमिंटन, कराटे आदि प्रतियोगिता शामिल की जाएगी। वर्तमान में विभाग के पास दो अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम, 24 राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम, पांच बहुउद्देशीय खेल हॅल, 16 इंडोर हॉल, चार तरणताल, एक आइस रिंक है। इसके अलावा तीन राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम, छह बहुउद्देशीय खेल हॉल, तीन इंडोर हॉल, एक शूटिंग रेंज एवं एक एक्वेटिक सेंटर भी राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए तैयार है।

जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय खेलों के लिए उत्तराखण्ड में दो मुख्य शहर देहरादून और हल्द्वानी को चयनित किया जा चुका है जहां राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होनी है। इसके अलावा छह अन्य शहर हरिद्वार, ऋषिकेश, गूलरभोज, रुद्रपुर, नैनीताल, एवं पिथौरागढ़ को भी चयनित किया गया है। राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों सहित लगभग 18,000 लोगों को प्रतिभाग करना है। जिनकी आवासीय व्यवस्था के लिए दो खेल गांव हल्द्वानी और देहरादून में विकसित किये जाने प्रस्तावित थे। लेकिन अब सरकार खेल गांव न बनाकर आयोजन स्थल के निकट के होटलों में खिलाड़ियों को ठहरने की व्यवस्था कर रही है। बताया जा रहा है कि बीते वर्ष गोवा में आयोजित हुए 37वें राष्ट्रीय खेलों में भी खिलाड़ियों को होटलों में ठहराया गया था, जिसकी प्रशंसा खिलाड़ियों ने भी की थी।

जब उत्तराखण्ड से छिन गई थी नेशनल गेम्स की मेजबानी
गत् वर्ष गोवा में उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए भारतीय ओलंपिक संघ का ट्टवज मिलने के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव की अट्टयक्षता में एक हाई पावर कमेटी का गठन भी हो गया था। इसके बाद से ही उम्मीद जताई जा रही थी कि इस साल मार्च अप्रैल में खेलो का आयोजन होगा। लेकिन तब यह कहकर टाल दिया गया कि इस दौरान लोकसभा चुनाव होने है जिसके चलते यह आयोजन आगे के लिए बढ़ाते हुए अब कहा जा रहा है कि संभवत अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के दूसरे सप्ताह के बीच राष्ट्रीय खेल शुरू होंगे। विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिंहा के मुताबिक विभाग राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार है। विभाग की ओर से राष्ट्रीय खेलों की तिथि तय करने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ को पत्र लिखा गया है। कहा गया है कि इसके लिए दो नवंबर की तिथि तय कर दी जाए, लेकिन दो महीने बाद भी भारतीय ओलंपिक संघ से लिखित में कुछ नहीं आया। अब भारतीय ओलंपिक संघ की ओर से मौखिक रूप से कहा गया है कि इस साल राष्ट्रीय खेल नहीं होंगे। इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रदेश के पिछले खराब रिकॉर्ड इस बात की तस्दीक करते हैं कि उत्तराखण्ड से समय-समय पर इस प्रकार के बड़े आयोजन की मेजबानी छिनती रही है। इससे पूर्व 2018 और 2021 में जहां उत्तराखण्ड से राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी छिन गई थी, तो औली में होने वाले शीतकालीन खेलों को भी संसाट्टानों की कमी के कारण जम्मू एवं कश्मीर में शिफ्ट किया गया था।

बात अपनी अपनी
लेट लतीफ हम नहीं है, देरी भारतीय ओलंपिक संघ की तरफ से की जा रही है। देरी क्यों की जा रही है उसका पता हमे नहीं है। हम तो खेलों के आयोजन की पूरी तैयारी करा चुके है। हमने सभी कार्य पूरे कर लिए है। इंफ्रास्ट्रक्चर हमारा कम्प्लीट है। एक बार आप भारतीय ओलंपिक संघ से भी बात कीजिए।
अमित सिंहा, प्रमुख सचिव, खेल

हमारी तरफ से राष्ट्रीय खेलो के आयोजन की पूरी तैयारी हो चुकी है। यहां सारे इन्फ्राट्रक्चर तैयार है। हमारी तरफ से कई बार भारतीय ओलंपिक संघ को इस बाबत तीन बार पत्र लिखे जा चुके है। फिलहाल आईओए की तरफ से एक जीटीसीसी कमेटी (गेम्स कोर्डिनेशन कमेटी) के उत्तराखण्ड में आकर निरीक्षण करने का इंतजार है। इस कमेटी के निरीक्षण के बाद ही राष्ट्रीय खेलो के आयोजन को आईओए की तरफ से हरी झंडी मिलेगी। इस संबंट्टा में हमारे मुख्यमंत्री जी कई बार समीक्षा बैठक ले चुके है। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के रुकने की व्यवस्था भी पूरी है।
डीके सिंह, सचिव, उत्तराखण्ड ओलंपिक संघ

मोदी के चौलेंज को पूरा कर दिखाया था राजीव मेहता ने
वर्ष 2015 में केरल के बाद गोवा और उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय खेलो का आयोजन कराने थे लेकिन इन दोनों ही राज्यों में आधी-अधूरी तैयारी की वजह से ये खेल 2018 से टलते आ रहे है। सूत्रों के अनुसार 36वें राष्ट्रीय खेल गोवा, 37वें छत्तीसगढ़ जबकि 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखण्ड को तत्कालीन हरीश रावत सरकार के समय 2014 में ही आवंटित कर दिए गए थे। गोवा ने 36वें खेल कराने से अपने हाथ पीछे खींचे और छत्तीसगढ़ और उत्तराखण्ड में भी तैयारी अधूरी रहने से राष्ट्रीय खेल लगातार खिसकते रहे। लेकिन हल्द्वानी के ही एक ओलंपिक संघ के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी ने रिकॉर्ड समय में राष्ट्रीय खेलो का आयोजन करा कर सबको अचंभे में डाल दिया। बताया जाता है कि भारतीय ओलंपिक संघ के तत्कालीन सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय खेलो का आयोजन न होने पर नाराजगी प्रकट की थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राजीव मेहता को चैलेंज के तौर पर गुजरात में नेशनल गेम्स कराने की बात कही। तब राजीव मेहता ने प्रधानमंत्री मोदी का यह चैलेंज स्वीकारते हुए महज दो माह में ही गुजरात में राष्ट्रीय खेल सितंबर 2022 में आयोजित करा दिए। हालांकि, इन खेलों में उत्तराखण्ड का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। 32 राज्यों में से उत्तराखण्ड की टीम एक गोल्ड समेत 18 पदकों के साथ 26वें स्थान पर रही थी। राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखण्ड की स्थिति पर बात करे तो वर्तमान में सूबे का देशभर में 26वां स्थान हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार राष्ट्रीय खेलों में राज्य को टॉप टेन में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा। हालांकि उत्तराखण्ड को 26वें स्थान से टॉप टेन में शामिल होना विभाग के सामने बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

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