[gtranslate]
sport

राहुल गांधी के ट्वीट बाद सीएम रावत ने वसीम प्रकरण पर बिठाई जांच

भारत के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी और उत्तराखण्ड क्रिकेट टीम के कोच वसीम जाफर ने पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया। वसीम पर उत्तराखंड में क्रिकेट टीम में धर्म आधारित चयन के आरोप लगे थे। इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 13 फरवरी को एक ट्वीट किया। जिसमे उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ वर्षों में नफरत इतनी ज्यादा बढ़ी है कि उसने हमारे प्यारे खेल क्रिकेट को भी अपनी आगोश में ले लिया है। भारत हम सभी का है, इस एकता को बांटने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। इसके बाद खेल में भी राजनीति एक मुद्दा बन गया। राहुल गांधी के ट्वीट के तीन दिन बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में एक जाँच बिठा दी है।

दिग्गज बल्लेबाज और देश के लिए 31 टेस्ट खेलने वाले जाफर ने इस बाबत कहा कि टीम में मुस्लिम खिलाड़ियों को तरजीह देने के सीएयू के सचिव माहिम वर्मा के आरोपों से उन्हें काफी तकलीफ पहुंची। जाफर ने चयन में दखल और चयनकर्ताओं और संघ के सचिव के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर बीते 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जाफर ने 10 फरवरी को ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी और कहा कि जो कम्युनल एंगल लगाया, वह बहुत दुखद है। मैं इकबाल अब्दुल्ला का समर्थन करता हूं और उसे कप्तान बनाना चाहता था जो सरासर गलत है।

वसीम का कहना है कि बायो बबल में मौलवी आए और हमने नमाज पढ़ी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलवी, मौलाना जो भी देहरादून में शिविर के दौरान दो या तीन शुक्रवार को आए, उन्हें मैंने नहीं बुलाया था। इकबाल अब्दुल्ला ने मेरी और मैनेजर की अनुमति में जुमे की नमाज के लिए अनुमति मांगी थी। वसीम ने इस बाबत एक ट्वीट भी किया है। जिसमे उन्होंने कहा था कि कप्तानी के लिए जय बिष्ट के नाम की सिफारिस की थी, इकबाल की नहीं लेकिन सीएयू अधिकारियों ने इकबाल को पसंद किया।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि वसीम के बचाव में कई पूर्व क्रिकेटर सामने आए हैं। भारत के पूर्व महान स्पिन गेंदबाज व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की क्रिकेट समिति के प्रमुख अनिल कुंबले ने जाफर का समर्थन करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि मै आपके साथ हूं वसीम। आपने सही किया। दुर्भाग्यशाली खिलाड़ी हैं, जिन्हें आपके मेंटर नहीं होने की कमी खलेगी। इसके अलावा पू्र्व तेज गेंदबाज इरफान पठान ने भी एक ट्वीट किया। जिसमे उन्होंने लिखा कि श्दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको यह समझाना पड़ा।

दूसरी तरफ सीएयू के सचिव महिम वर्मा ने जाफर पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी। इस सनसनी के फैलने के बाद पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए ताकि सच लोगों के सामने आ सके। क्या था पूरा मामला: उत्तराखण्ड क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने को वसीम जाफर पर कोच के कार्यकाल के दौरान धर्म के आधार पर खिलाड़ियों के चयन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

जिसका वसीम जाफर ने खारिज कर दिया। वसीम ने चयन में दखल और चयनकर्ताओं और संघ के सचिव के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने खिलाड़ियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए बायो बबल सुरक्षा घेरा अनिवार्य किया था। ऐसे में उत्तराखण्उ की सीनियर टीम के कैंप के दौरान एक धार्मिक गुरु कैसे पहुंचे और यह बात इतने दिनों बाद क्यों और कैसे बाहर निकलकर आई। इसके लिए कहीं न कहीं टीम मैेनेजर दोषी है। क्योंकि कैंप के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट जमा करनी होती हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने रिपोर्ट जमा नहीं की। अगर जमा की तो क्या उस रिपोर्ट को पढ़ने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। अब्दुल्ला के मुताबिक धार्मिक गुरु को बलुाने की अनुमति टीम मैनेजर दी थी। टीम मैनेजर ने सुरक्षा घेरे में किसी बाहरी व्यक्ति को कैसे आने दिया और खिलाड़ियों की सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों किया, इन सब सवालों के जवाब सीएयू अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को भी देने होंगे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD