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नेशनल हैंडबाॅल में हुआ चयन

पहाड़ में संघर्ष है, संसाधनों का अभाव है, पर इन मुश्किलों से कैसे निपटना है, ये पहाड़ की बेटियां बखूबी जानती हैं। एथलेटिक्स हो, बैडमिंटन या फिर बाॅक्सिंग,. ऐसा कोई खेल नहीं जिसमें उत्तराखण्ड की बेटियों ने अपनी धाक ना जमाई हो। इन बेटियों में अब अल्मोड़ा जिले की रानीखेत की रहने वाली भावना का नाम भी शामिल हो गया है। सुदूरवर्ती गांव में रहने वाली भावना का चयन नेशनल हैंडबाॅल चैंपियनशिप के लिए हुआ है। भावना राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली हैंडबाॅल प्रतियोगिता में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करेंगी। प्रतियोगिता का आयोजन हरियाणा के कैथल में होगा, जिसमें उत्तराखण्ड की टीम भी हिस्सा लेगी। भावना भी राज्य से चुनी गई इसी टीम का हिस्सा हैं।
भावना की इस उपलब्धि पर क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपक साह (कन्नू) ने छात्रा को सम्मानित करने की बात कही है। भावना के परिजन और शिक्षक भी खुश हैं। पिछले दिनों द्वाराहाट में राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ का आयोजन हुआ था, जिसमें भावना ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। इसी के चलते भावना को स्टेट टीम का हिस्सा बनाया गया है। भावना जीआईसी श्रीखेत में पढ़ती हैं। वो इससे पहले राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

नेशनल बैटमिंटन के लिए हुआ चयन

चमोली जिले की साक्षी राणा का राष्ट्रीय, चैंपियनशिप के लिए चयन हुआ है। पहाड़ के छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली साक्षी के सपने बड़े हैं, इन सपनों को पूरा करने का जज्बा भी है। जल्द ही साक्षी राष्ट्रीय बैटमिंटन चैंपियनशिप में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करती दिखेंगी। साक्षी राणा का गांव भारत- चीन सीमा से लगा हुआ है इस गांव में भोटिया जनजाति के लोग रहते हैं। साक्षी इसी गांव की रहने वाली है। इस गांव का नाम है मलारी। महज 17 साल की साक्षी इस वक्त राजकीय इंटर काॅलेज नंदप्रयाग में पढ़ रही हैं, वो 11वीं की छात्रा है। साक्षी की सफलता कई मायनों में बेहद खास है। बैटमिंटन का शौक तो बहुतों को होता है, पर इसमें नेशनल खेल पाने का मौका कम लोगों को ही मिलता है।

साक्षी मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं, ऐसे में प्रैक्टिस का खर्चा वहन कर पाना परिवार के बूते से बाहर था। साक्षी का परिवार भी चाहता तो अपनी मजबूरियां बताकर बेटी के बढ़ते कदमों को पीछे खींच सकता था, पर परिवार ने सपोर्ट किया। इसी सपोर्ट की बदौलत साक्षी अब नेशनल खेलने जा रही है। साक्षी के पिता को बैडमिंटन का शौक है। पिता ने ही उन्हें बैटमिंटन खेलने की सलाह दी। स्कूल में व्यायाम शिक्षक ने उन्हें बैटमिंटन की बारीकियां सिखाईं। बाद में साक्षी नंदप्रयाग पहुंची तो वहां कोच आलोक सिंह नेगी ने उनके हुनर को तराशने में मदद की। साक्षी होनहार हैं, इसीलिए संस्थाओं और अधिकारियों ने भी उनके लिए संसाधन जुटाए और इस तरह साक्षी नेशनल खेलने के लिए तैयार हो गईं।

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