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Sargosian / Chuckles

बिहार में जीरो, बंगाल में हीरो

चुनाव विशेषज्ञ कहलाए जाने वाले प्रशांत किशोर इन दिनों पश्चिम बंगाल में खासे सक्रिय बताए जा रहे हैं। अपने गृह राज्य बिहार में स्वयं सक्रिय राजनीति में उतरने का इशारा कर प्रशांत किशोर उर्फ पीके ने राज्य के नेताओं की नींद उड़ा डाली थी। अब लेकिन लगता है उनका उत्साह फीका पड़ गया है। बिहार विधानसभा के चुनाव घोषित हो चुके हैं। राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं लेकिन पीके इस परिदृश्य से कोसों दूर पश्चिम बंगाल में बैठे तृणमूल कांग्रेस के लिए रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। खबर है कि ममता बनर्जी के कई करीबी पीके की कार्यशैली से खासे नाराज हैं। इन नेताओं का मानना है कि पीके पार्टी के लिए रणनीति बनाने के बजाय टिकट बांटने के काम में जुटे हैं। दरअसल, टीम द्वारा पीके तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संदेश दिया जा रहा है कि पार्टी के टिकट वितरण में उनकी सक्रिय भूमिका रहेगी। इतना ही नहीं पीके की सलाह पर ममता बनर्जी ने सभी बड़े नेताओं के सोशल मीडिया एकाउंट्स टीम पीके के हवाले कर दिए हैं। तृणमूल नेताओं को भारी नाराजगी इसके चलते भी है कि टीम पीके अशालीन भाषा का इस्तेमाल उनके ट्विटर एकाउंट आदि पर कर रही है। पिछले दिनों वरिष्ठ तृणमूल नेता दिनेश त्रिवेदी के ट्विटर हैंडल से एक ट्विट राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ किया गया। ट्विट में जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग राज्यपाल के लिए किया गया उस पर स्वयं राज्यपाल ने टिप्पणी कर डाली कि यह भाषा त्रिवेद्री जैसे शालीन व्यक्ति की हो ही नहीं सकती। राज्यपाल ने यहां तक कह डाला कि यह भाषा टीम पीके की है। जानकारों का दावा है कि त्रिवेदी समेत ममता के कई पुराने साथी पीके और उनकी टीम से खिन्न हो पार्टी छोड़ने तक पर विचार कर रहे हैं।

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