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Sargosian / Chuckles

किस ओर करवट लेंगे मुस्लिम मतदाता?

खतौली विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सीट है, जहां 5 दिसंबर को होने वाला उपचुनाव उफान पर है। भाजपा समर्थकों और गठबंधन समर्थकों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाई हुई है। लेकिन इस उपचुनाव में विधानसभा के आम चुनावों जैसा उत्साह नजर नहीं आ रहा। लेकिन सियासी गलियों में मुस्लिम बूथों और मतदाताओं को लेकर खूब आंकड़ेबाजी और कयास भी लगाए जा रहे हैं। गठबंधन की ओर से चुनाव आयोग को चिट्ठी से जाहिर हो गया है कि मुस्लिमों की चाल पर सभी राजनीतिक दलों की निगाह है। गठबंधन का सियासी समीकरण मुस्लिम बाहुल्य गांव के मतदान प्रतिशत पर टिका है। यही वजह है कि रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह ने मुस्लिम लोगों से मुलाकात कर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। जातियों के हिसाब से ही जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है। देखने वाली बात यह होगी कि इस उपचुनाव में जातीय गणित का फॉर्मूला कितना कामयाब रहेगा। मुख्य चुनाव में दलित बहुल बूथों पर बसपा को खूब वोट मिले थे। मगर, इस बार बसपा प्रत्याशी मैदान में नहीं है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अनुसूचित जाति के वोट किसके हिस्से में आते हैं। गौरतलब है कि खतौली विधानसभा के मुख्य चुनाव में कई बूथों पर 80 फीसदी मतदान हए थे, लेकिन इस बार मुस्लिमों के मतदान की चाल पर सबकी निगाह टिकी है। सपा-रालोद-आसपा गठबंधन ने तो चुनाव आयोग को भाजपा पर आरोप लगाते हुए चिट्ठी भी लिख दी है। मुख्य चुनाव की बात करें तो खतौली विधानसभा में कुल 69.65 प्रतिशत मतदान हुआ था। 80 फीसदी मतदान का आंकड़ा छूने वाले कई बूथ थे। मुस्लिम बहुल गांव माने जाने वाले दाहखेड़ी के बूथ संख्या-एक पर 84.81 प्रतिशत मतदान हुआ था। बूथ संख्या दो पर 77.16 और बूथ संख्या तीन पर 76.94 प्रतिशत वोट पड़े थे। मगर उपचुनाव में सबसे बड़ा सवाल मुस्लिम मतदाताओं की चाल पर ही आकर टिक गया है।

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