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अगले वर्ष चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इन चार राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, और गोवा में से तीन में भाजपा सत्तारूढ़ है। केवल पंजाब ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस की सरकार है। भाजपा के लिए इन तीन राज्यों में सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश है जहां से लोकसभा के 80 सांसद आते हैं। कोरोना संकट काल में केंद्र सरकार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार की लचर कार्यशैली चलते जनता का आक्रोश इन दिनों चरम् पर है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के प्रति जनाक्रोश के साथ-साथ भाजपा नेताओं और कार्यकत्ताओं में भी भारी नाराजगी पसर चुकी है। ऐसा ही हाल उत्तराखंड का भी हैं जहां चार बरस तक भाजपा आलाकमान ने सत्ता त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों बनाए रखी। त्रिवेंद्र रावत बेहद खराब मुख्यमंत्री साबित हुए। सत्ता के आखरी बरस में उन्हें सीएम पद से भाजपा ने हटा कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास तो किया है लेकिन हालात उसके प्रतिकुल ही है। ऐसे में चिंतित राष्ट्रीय स्वयं संघ आगे आता नजर आ रहा है। गत् सप्ताह संघ प्रमुख ने कोरोना काल के दौरान सकारात्मक सोच बनाए रखने की बात इसी उद्देश्य चलते कही। संघ प्रमुख ने सकारात्मकता पर बोलते हुए इशारे इशारों में केंद्र सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा कर डाला। उन्होंने सभी को साथ लेकर चलने पर बल दिया और ‘एकला चलो’ की नीति को गलत बताया। जानकारों का दावा है कि भागवत का इशारा मोदी ही थे जो सबकुछ अपने हिसाब और तरीके से करने में यकींन रखते हैं। इससे पहले संघ की दिल्ली इकाई के प्रमुख नेता राजीव तुली भी कोरोना काल में भाजपा नेताओं की भूमिका पर सवाल खड़े कर चुके हैं। खबर है कि भागवत की इस स्पीच ने भाजपा भीतर खासी खलबली मचा डाली है।

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