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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से खराब चल रहा है। उनके खराब स्वास्थ्य का असर महाराष्ट्र सरकार और शिवसेना के कामकाज को अब प्रभावित करने लगा है। खबर है कि कुछ अर्सा पहले ही रीढ़ की हड्डी का आॅपरेशन करा घर लौटे उद्धव अभी आॅफिस जाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें डाॅक्टरों ने बेड रेस्ट करने की कड़ी हिदायत दी है। इस चलते उद्धव महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी भाग नहीं ले सके हैं। सूत्रों की मानें तो ठाकरे घर से ही महत्वपूर्ण सरकारी फाइलों को तो निपटा रहे हैं लेकिन शिव सेना की बाबत अभी वह कई महत्वपूर्ण फैसलों को नहीं ले पा रहे हैं जिसके चलते पार्टी भीतर बेचैनी बढ़ने लगी है। खबर गर्म है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं मध्य ठाकरे सीनियर के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर नाना प्रकार की चर्चाएं होने लगी हैं। कुछेक नेताओं की राय है कि ठाकरे जूनियर आदित्य को विधिवत शिव सेना की कमान सौंप देनी चाहिए ताकि अगले वर्ष प्रस्तावित मुंबई नगर निगम के चुनावों की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू की जा सके। आदित्य ठाकरे को सीएम बनाए जाने की मांग भी कुछेक युवा शिव सैनिक करने लगे हैं। हालांकि यह भी कहा-सुना जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस संग गठबंधन वाली सरकार में आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बना पाना टेढ़ी खीर है इसलिए सरकार के बजाए शिवसेना की कमान उन्हें सौंपने की बातें ज्यादा हो रही है। इस सबके बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भी सीनियर ठाकरे के स्वास्थ्य बाबत शिवसेना सांसद विनायक राउत से बात की है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वयं विनायक राउत के पास जाकर उद्धव ठाकरे के स्वास्थ्य की जानकारी ली। खबर यह भी जोरों पर है कि उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मी ठाकरे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने तो सार्वजनिक तौर पर यह बात कह डाली है। हालांकि पाटिल के इस बयान पर शिवसेना ने खासा ऐतराज जताते हुए उनकी शिकायत प्रधानमंत्री से करने की धमकी दी है। आदित्य ठाकरे अपने पिता के पूरी तरह स्वस्थ होने की बात कहकर इस प्रकार की चर्चाओं पर रोक लगाने का प्रयास तो कर रहे हैं लेकिन चर्चाएं थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं।

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