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महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी गठबंधन सरकार कब तक चलेगी कह पाना दिनों-दिन खासा मुश्किल होता जा रहा है। गठबंधन में शामिल सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना लगातार ऐसे संकेत दे रही है जिससे इस गठबंधन के ज्यादा समय तक नहीं चलने की आशंकाएं बढ़ रही हैं। गत् दिनों मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राव साहेब दानवे की तारीफ करते हुए उन्हें भविष्य का सहयोगी करार दे डाला। उनके इस बयान से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस सकते में आ गई। ठाकरे के इस बयान के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़ प्रदेश की राजनीति को खासा गर्मा डाला। इसके ठीक बाद वरिष्ठ शिवसेना नेता अनंत गीते ने राकंपा अध्यक्ष शरद पवार पर तीखा हमला करते हुए उन्हें पीठ में छुरा घोंपने वाला कह डाला। हालांकि गीते के इस बयान से शिवसेना ने खुद को अलग कर लिया है लेकिन मुंबई के सत्ता गलियारों में एक बार फिर से शिवसेना और भाजपा के एक होने की खबर जोर पकड़ने लगी हैं। कहा जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के जबर्दस्त दबाव चलते शिवसेना का एक बड़ा वर्ग भाजपा संग दोबारा गठबंधन के लिए ठाकरे पर दबाव बना रहा है। शिवसेना नेता अनिल परब पर इन एजेंसियों का शिकंजा कसने और पूर्व इंकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा (अब शिवसेना नेता) की एनआईए द्वारा गिरफ्तारी चलते शिवसैनिकों में भारी भय का माहौल है। खबर जोरों पर है कि भाजपा आलाकमान और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में बने हुए हैं। सूत्रों की मानें तो अगले वर्ष होने जा रहे मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले ही दोनों पुराने साथी एक हो महाराष्ट्र में सरकार बना सकते हैं। हालांकि राज्य सरकार और राज्यपाल के मध्य दिनों-दिन गहराती अविश्वास की खाई इसके ठीक उलट इशारा कर रही है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी लगातार ठाकरे सरकार पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर निशाने साध रहे हैं तो ठाकरे भी राज्यपाल पर तीखा हमला करने से बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। इन दोनों की नूराकुश्ती से इतर कहीं न कहीं कुछ ऐसा चल रहा है जिसके चलते महाविकास अघाड़ी सरकार का भविष्य खतरे में है।

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