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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती अपने कोर वोट बैंक के खिसक जाने से भारी अवसाद में बताई जा रही हैं। पार्टी के उत्तर प्रदेश विधानसभा में मात्र 18 विधायक हैं। इनमें से भी सात ने बहन जी के खिलाफ बगावत कर डाली है। उनकी बगावत से बौखलाई बहनजी ने समाजवादी पार्टी से भविष्य में किसी प्रकार का राजनीतिक गठबंधन न करने का ऐलान कर डाला। बसपा सुप्रीमो का मानना है कि पार्टी विधायकों ने सपा प्रमुख की शह पर बगावत की है। इस बगावत से तिलमिलाई मायावती ने आवश्यकता पड़ने पर भाजपा का साथ देने की बात भी कह डाली। आवेश में बहनजी ने कह तो दिया लेकिन तुरंत ही पलटी भी मार डाली है। अब उनका नया बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने वैचारिक धरातल पर मतभेद होने के चलते भाजपा के साथ न जाने का ऐलान किया है। जानकारों का दावा है कि ऐसा उन्होंने पार्टी के कुछ उन करीबी नेताओं की सलाह बाद किया है जो भीम आर्मी के चंद्रशेखर के बढ़ते प्रभाव के चलते बसपा के बचे-खुचे वोट बैंक के खिसकने की आशंका से भयभीत हैं। इस बीच राज्य में सपा एक बार फिर से सक्रिय हो उठी है। कांग्रेस नेता अनु टंडन के पार्टी छोड़ सपा में शामिल होने से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है तो टीम प्रियंका की कार्यशैली से त्रस्त कांग्रेस के कुछ और नेता भी सपा की तरफ ताकते बताए जा रहे हैं।

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