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Sargosian / Chuckles

बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों की आहट

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब राजनीति के अखाड़े में खुद के दम पर उतरने की कवायद करते नजर आने लगे हैं। कांग्रेस संग उनकी बातचीत टूटने के तुरंत बाद पीके ने एलान कर डाला कि वे ‘जन स्वराज’ की स्थापना के उद्देश्य से अपने गृह प्रदेश बिहार में पदयात्रा निकाल जनता संग सीधे संवाद स्थापित करने जा रहे हैं। पटना के सत्ता गलियारों में पीके के इस कदम को लेकर नाना प्रकार की कयासबाजियों का बाजार गर्म हो चला है। बहुतों का मानना है कि पीके आने वाले दिनों में ‘जन स्वराज पार्टी’ नाम से नया राजनीतिक दल बनाने जा रहे हैं। कहा-सुना यह भी जा रहा है कि यह दल आने वाले दिनों में जद(यू) संग गठजोड़ कर सकता है यानी जद(यू) अगला चुनाव भाजपा के बजाए पीके की पार्टी के साथ गठबंधन कर लड़ सकत है। खबर जोरों पर है कि भाजपा पीके को अभी से अपने लिए बिहार में खतरा मानने लगी है। इस चलते ही पीके की पदयात्रा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कह डाला कि बिहार में किसी नए राजनीतिक दल के लिए कोई स्थान नहीं है। राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि भाजपा को भय है कि पीके बिहार में उसके कोर वोट बैंक स्वर्ण मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित कर सकते हैं। जानकारों की माने तो प्रदेश भाजपा नेताओं संग नीतीश कुमार के तेजी से खराब हो रहे संबंध आने वाले दिनों में कुछ बड़ा गुल खिला सकते हैं। जद(यू) इन दिनों राजद और लोजपा संग नजदीकी बढ़ाने में जुटी है। ये तीनों ही दल पिछड़ी जातियों में अपनी गहरी पैठ रखते हैं। ऐसे में भाजपा को स्वर्ण वोट बैंक में पीके की सेंधमारी का खतरा नजर आने लगा है।

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