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महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महाविकास अघाड़ी गठबंधन की मुसीबतें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। भाजपा आलाकमान का महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्य की सत्ता हाथों से निकल जाने का गम ढाई बरस बाद भी हल्का होता नजर नहीं आ रहा है। इस गम का साइड इफेक्ट महाविकास अघाड़ी सरकार के मंत्रियों और इस गठबंधन में शामिल नेताओं पर तेजी से कस रहे कानूनी शिकंजे के रूप में सामने आ रहा है। एक दूसरा साइड इफेक्ट महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी एवं राज्य सरकार के मध्य दिनों दिन बढ़ रहे तनाव से समझा जा सकता है। केंद्रीय जांच एजेंसियां विशेष रूप से महाविकास अघाड़ी के नेताओं पर मेहरबान हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साले की ईडी जांच चल रही हैं तो आदित्य ठाकरे के कई करीबियों के यहां भी इनकम टैक्स और ईडी दस्तक दे चुकी है। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार, जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं तो उनकी पार्टी के बड़े नेता नवाब मलिक और अनिल देशमुख अलग-अलग मामलों में जेल की यात्रा पर हैं। पार्टी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत, प्रताप सरनायक, अनिल परब आदि पर भी इन एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण पर आदर्श सोसाइटी मामले में मुकदमा चल ही रहा है। मुंबई के सत्ता गलियारों में चर्चा गर्म है कि इन एजेंसियों की जद में अब सीधे सीएम ठाकरे और उनका परिवार आने वाला है। केंद्र सरकार के बढ़ते दबाव का महाराष्ट्र सरकार मुंहतोड़ जवाब प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं को कानूनी चपेट में लेकर दे रही है। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और पूर्व सीएम देवेन्द्र फणनवीस के खिलाफ लगातार राज्य सरकार की जांच एजेसियों का दबाव बढ़ रहा है।

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